गुजरात के गांधीनगर में प्राइवेट स्कूल के रिक्शा और वैन चालक आज से अपनी लंबित मांगों को लेकर पूरे राज्य में हड़ताल कर रहे हैं. इनकी मांग है कि वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र और परमिट प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. अगर देरी हो रही है तो औचक निरीक्षण रोका जाए. परिवहन विभाग ने कहा है कि बिना फिटनेस प्रमाण पत्र और परमिट के चलने वाले वैन और रिक्शा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
आज से शुरू हड़ताल
गुजरात में स्कूलवर्धी एसोसिएशन के साथ जुड़े तमाम रिक्शा और वैन चालकों ने अनिश्चित समय के लिए हड़ताल शुरू की है. पुलिस और आरटीओ की तरफ से स्कूल रिक्शा और वैन के परमिट को लेकर हो रही सरप्राइज चेकिंग से नाराज स्कूलवर्धी एसोसिएशन ने हड़ताल का एलान किया है. राजकोट गेम जोन में अग्निकांड के बाद सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठा रही है ऐसे में कुछ नियमों में हुए बदलाव की वजह से स्कूलवर्धी एसोसिएशन सरकार से नाराज है. एसोसिएशन का कहना है कि रिक्शा और वैन के परमिट, सरप्राइज चेकिंग और भाड़े के लिए मीटर के नियम को लेकर 3 महीने के लिए उन्हें राहत दी जाए. हालांकि सरकार अपने फैसले पर कायम है तो दूसरी तरफ स्कूलवर्धी एसोसिएशन ने हड़ताल का एलान कर दिया है.
डॉक्यूमेंट्स होने पर ही दिया जाएगा परमिट
स्कूलवर्धी एसोसिएशन ने सरकार से तीन महीने का समय मांगकर अपील की है कि आरटीओ और पुलिस की सरप्राइज चेकिंग बंद हो, तमाम रिक्शा और वैन को जल्द परमिट दिया जाए, भाड़े के लिए मीटर के नियम को वापिस लिया जाए. वहीं, इस मामले में सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि सरप्राइज चेकिंग बंद नहीं होगी. वाहन को तब ही परमिट दिया जाएगा जब उनके पास सभी डॉक्यूमेंट्स होंगे. मीटर के नियमों में भी कोई राहत नहीं दी जाएगी.
4 लाख से अधिक स्कूली बच्चे प्रभावित
अहमदाबाद में स्कूलवर्धी एसोसिएशन की हड़ताल की वजह से 4 लाख से अधिक बच्चे परेशान हैं, क्योंकि उन्हें स्कूल या घर जाने के लिए रिक्शा या वैन नहीं मिल रहे हैं. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही रिक्शा और वैन चालकों की हड़ताल की वजह से पेरेंट्स भी परेशान हैं. बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए कोई भी रिक्शा नहीं मिल रहा है.
परमिट देने में सरकारी की तरफ से हो रही देरी
स्कूलवर्धी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट धर्मेंद्र ब्रह्मभट्ट ने कहा कि सरकार के नियमों की वजह से हमारे सभी रिक्शा और वैन जप्त हो जाएंगे. हमें परमिट देने में सरकार की तरफ से विलंब हो रहा है. 10 दिनों में सिर्फ 200 रिक्शा और वैन का इंस्पेक्शन हो पाया है और दूसरी तरफ सरकार के आदेश पर पुलिस और आरटीओ रिक्शा और वैन की सरप्राइज चेकिंग कर रही हैं. हमने राहत के लिए वक्त मांगा है जिसको लेकर सीएम और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को पत्र भी लिखा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. ऐसे में हमारी रिक्शा और वैन को जप्त होने से बचाने लिए हड़ताल ही एक मात्र विकल्प बचा है.
अतुल तिवारी