कचरे से खाने का जुगाड़, गैस-बिजली सपने जैसा... सबसे गरीब देश बुरुंडी में ऐसे रहते हैं लोग

Burundi Poor Country in World: बुरुंडी का कई सालों से दुनिया के सबसे गरीब देशों में गिना जाता है और कई बार इसे सबसे गरीब देश माना गया है. तो जानते हैं वहां कैसे हालात हैं...

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गरीबी में जी रहे बुरुंडी के लोग (फोटो- AP/PTI) गरीबी में जी रहे बुरुंडी के लोग (फोटो- AP/PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST

आपके लिए लैपटॉप, स्मार्टफोन अब काफी आम चुका है, लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहां ये सब सपने जैसा है. अभी यहां के लोग इन टेक्नोलॉजी से काफी दूर हैं और इनका लक्ष्य है कि बस दो टाइम खाना मिल जाए वो ही बड़ी बात है. बड़ी संख्या में लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा है और इलाज ना मिल पाने की वजह से लोगों की जल्दी ही मौत हो जा रही है. नतीजा ये है कि अब इस देश की आबादी में बच्चे और जवान ही ज्यादा है. इस देश का नाम है बुरुंडी, जो कई सालों से दुनिया के सबसे गरीब देशों की लिस्ट में पहले स्थान पर है. 

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यहां की तस्वीर जानने के बाद आप भी कहेंगे कि आखिर यहां के लोग दुनिया से कितने पीछे हैं और इनका सबसे अहम लक्ष्य पेट भरना है. यहां कच्चे मकानों में लोग रह रहे हैं और बिजली, गैस जैसी चीजें देश के कुछ हिस्सों में है. जहां फोन पहुंच गए हैं, वहां अभी बिजली नहीं है. पूरे गांव में एक चार्जिंग पॉइंट है, जहां लोग फोन चार्ज करते हैं. बच्चे तालाब से मछली पकड़कर या फिर कचरे से खाने का सामान ढूंढकर अपना पेट भर रहे हैं. वहीं, इस देश के पॉलिटिकल हालात भी काफी बुरे हैं. 

कहां है ये देश?

बुरुंडी पूर्वी अफ्रीका में ग्रेट लेक क्षेत्र का एक देश है. इसकी सीमाएं उत्तर में रवांडा, दक्षिण और पूर्व में तंजानिया और पश्चिम में कांगो से मिलती हैं. यहां की दो राजधानी है, जिसमें Gitega पॉलिटिकल राजधानी है जबकि Bujumbura आर्थिक राजधानी है. यहां के 80 फीसदी लोग हुतु हैं और 15 फीसदी तुत्सी हैं. यहां की आधिकारिक भाषा रुंडी और फ्रेंच है. यहां की 85 फीसदी आबादी गांवों या छोटे कस्बों में रहती है. 

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फैक्ट बताते हैं गरीबी की कहानी...

बुरुंडी में गरीबी की एक वजह वहां की पॉलिटिकल स्थिति भी है. यहां के लोग कई सालों से गृहयुद्ध आदि से परेशान हैं. जैसे कि बुरुंडी के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति की अक्टूबर 1993 में केवल 100 दिनों के कार्यकाल के बाद हत्या कर दी गई थी. साल 2005 में आधिकारिक तौर पर समाप्त हुए गृह युद्ध में 200,000 लोग मारे गए थे. गरीबी के हालात इतने बुरे हैं कि बुरुंडी में अधिकांश लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त नहीं है. बुरुंडी की 50 फीसदी आबादी भरपेट खाना नहीं खा पा रही है. 

यहां कमाई का अहम जरिया कृषि है और 80 फीसदी लोग अपनी भोजन और आय की जरूरतों को पूरा करने के लिए खेती पर निर्भर हैं. अगर आय के हिसाब से देखें तो यहां के लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा खाने में ही खर्च कर देते हैं. यहां के 75 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं. इनमें से 50 फीसदी लोग काफी ज्यादा गरीबी में रहते हैं. पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर प्रति 1,000 लोगों पर 82 है. पॉलिटिकल मार के अलावा बुरुंडी में बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा और मूसलाधार बारिश का भी खतरा बना रहता है और इन आपदाओं की मार भी यहां के लोगों को सहन करनी पड़ती है. 

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सिविल वॉर में मरते लोग

कुछ वक्त पहले एक बार जमीन की खुदाई से 6 हजार से अधिक लोगों के कंकाल बरामद किए गए थे. बुरुंडी के करुसी प्रोविन्स में 6 जगहों से 6033 लोगों के कंकाल बरामद किए गए थे. कंकालों के साथ गोलियां, लोगों के कपड़े, चश्मे और अन्य सामान भी जमीन के अंदर से मिले. बुरुंडी में 1993 में सिविल वॉर शुरू हो गया था जो 2005 तक चलता रहा. बताया जाता है कि सिविल वॉर के दौरान करीब 3 लाख लोगों की मौत हो गई थी. बुरुंडी में 1965, 1969, 1972, 1988 और 1993 में सामूहिक नरसंहार हुए थे. हुतु और तुत्सी समूह के ज्यादातर लोग हिंसा के शिकार हुए थे.

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