क्रिकेट मैच के प्रसारण में कई तरह की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है, जिसमें अब ड्रोन शूट भी शामिल है. अब क्रिकेट मैच में ड्रोन के जरिए स्टेडियम का नजारा दिखाया जाता है. क्या आप जानते हैं ये ड्रोन ऑपरेट कौन करता है और आप भी ये ड्रोन ऑपरेटर बनकर अपना करियर बना सकते हैं. ऐसे में जानते हैं कि ड्रोन ऑपरेटर बनने के लिए क्या करना होगा और क्रिकेट मैच में ड्रोन ऑपरेटर की नौकरी कैसे लगती है?
कैसे बनते हैं ड्रोन ऑपरेटर?
दरअसल, ड्रोन ऑपरेटर बनने के लिए आपको कोई पढ़ाई नहीं करनी होती है. इसके लिए एक ट्रेनिंग होती है, जिसमें आपको ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके लिए अब कई इंस्टीट्यूट खुल गए हैं, जिसमें आप अलग अलग ड्रोन के हिसाब से ट्रेनिंग ले सकते हैं. इसके बाद ड्रोन ऑपरेटर का लाइसेंस लेना होता है.
खास बात ये है इस ट्रेनिंग को 12वीं पास करने के बाद भी किया जा सकता है. बस Directorate General Of Civil Aviation ने ड्रोन से जुड़े कई नियम बनाए हैं. इसके लिए मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है.
कैसे बनता है लाइसेंस?
भारत में ड्रोन का नियमन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से किया जाता है. व्यावसायिक रूप से ड्रोन संचालित करने के लिए, आपको DGCA-अधिकृत प्रशिक्षण संस्थान से रिमोट पायलट प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा. यहां ऑनलाइन अप्लाई करके आप लाइसेंस ले सकते हैं.
कैसे लगती है मैच में नौकरी?
दरअसल, जो भी क्रिकेट मैच होते हैं, वो टूर्नामेंट बीसीसीआई या आईसीसी की ओर से आयोजित किए जाते हैं. ऐसे में कुछ कंपनियों को प्रोडक्शन का टेंडर मिलता है, जो वहां शूट का काम करते हैं. स्टार स्पोर्ट्स जैसे चैनल भी अलग अलग कंपनियों को टेंडर देते हैं और वे शूट का काम करते हैं. ऐसे में आप ड्रोन ऑपरेटर का लाइसेंस मिलने के बाद आप इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं. जब आप प्रोडक्शन टीम का हिस्सा बन जाते हैं तो आपको हर मैच में शूट करना होता है और अलग अलग जगह यात्रा करने का भी मौका मिलता है.
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