नरोदा पाटिया दंगों ने ले ली थी 97 जानें, जानिए कब क्या हुआ

गुजरात में दंगे की लपटें उठीं तो नरोदा पाटिया सबसे बुरी तरह जला था. आपको बता दें कि नरोदा पाटिया में हुए दंगे में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी.

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गुजरात दंगे की एक तस्वीर (फाइल फोटो) गुजरात दंगे की एक तस्वीर (फाइल फोटो)

आशुतोष कुमार मौर्य

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2018,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

गुजरात में 2002 में भड़के दंगों में अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में सबसे बड़ा जनसंहार हुआ था. 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगियां जलाने की घटना के बाद अगले रोज जब गुजरात में दंगे की लपटें उठीं तो नरोदा पाटिया सबसे बुरी तरह जला था. आपको बता दें कि नरोदा पाटिया में हुए दंगे में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इसमें 33 लोग जख्मी भी हुए थे. BJP नेता और पूर्व मंत्री माया कोडनानी पर दंगे भड़काने के आरोप लगे, हालांकि इसी साल 20 अप्रैल को गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दे दिया.

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गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बाबू बजरंगी सहित आठ आरोपियों को दोषी करार दिया था. इनमें से ही तीन दोषियों पी.जे. राजपूत, राजकुमार चौमल और उमेश भरवाद को आज सजा सुनाई जाएगी. जानिए क्‍या है नरोदा पाटिया दंगा मामला-

केस में कब क्‍या हुआ.

25 फरवरी 2002: अयोध्या से 2000 से ज़्यादा कारसेवक साबरमती एक्सप्रेस से अहमदबाद जाने के लिए बैठे.

27 फरवरी 2002: गोधरा में साबरमती एक्‍सप्रेस 4 घंटे की देरी से पहुंची. यहां एक भीड़ ने ट्रेन को घेर का आग के हवाले कर दिया. जिसमें 59 कारसेवकों की मौत हो गई. (इस मामले में अदालत ने 31 लोगों को दोषी ठहराया है. इनमें से 11 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है.)

28 फरवरी 2002: वीएचपी ने गोधरा कांड के विरोध में बंद का आह्वान किया. इसी दौरान उग्र भीड़ ने नरोदा पाटिया इलाके में हमला कर दिया.

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2009 में शुरू हुआ मुकदमा

अगस्‍त 2009 में नरोदा पाटिया कांड का मुकदमा शुरू हुआ. इसमें 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई. अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए. इनमें पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल थे.

2012 में स्‍पेशल कोर्ट ने सुनाई सजा

अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिए विशेष अदालत ने बीजेपी विधायक और राज्‍य की नरेन्द्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को हत्या और षड्यंत्र रचने का दोषी पाया. इसके अलावा 32 अन्‍य को भी दोषी ठहराया गया था.

आरोपियों ने हाई कोर्ट में दी चुनौती

विशेष अदालत के फैसले को दोषियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी. यहां जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए.एस. सुपेहिया की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की. सुनवाई पूरी होने के बाद अगस्‍त 2017 में कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्ष‍ित रख लिया.

20 अप्रैल 2018- सबूतों के अभाव में BJP नेता माया कोडनानी निर्दोष करार. बाबू बजरंगी की आजीवन कारावास की सजा घटाकर 21 साल की गई.

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