कमरे में गलते रहे मां-बेटी के शव, किसी पड़ोसी को भनक तक नहीं

यूपी की आगरा के अर्जुन नगर इलाके में एक बंद कमरे से मां-बेटी के शव मिलने से शहर में सनसनी फैल गई. ये दोनों यहां बीते 15 साल से किराए पर रह रही थीं. वृद्ध मां का शव गलकर कंकाल जैसा ही रह गया था, वहीं बेटी का शव इतनी बुरी हालत में नहीं था. बताया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद से मां-बेटी बहुत परेशान थीं. पुलिस कंकाल और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर इस मामले की जांच कर रही है. डीएनए को संरक्षित करा दिया गया है. 

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आगरा के अर्जुन नगर इलाके की घटना आगरा के अर्जुन नगर इलाके की घटना

मुकेश कुमार / खुशदीप सहगल

  • आगरा,
  • 27 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

यूपी की आगरा के अर्जुन नगर इलाके में एक बंद कमरे से मां-बेटी के शव मिलने से शहर में सनसनी फैल गई. ये दोनों यहां बीते 15 साल से किराए पर रह रही थीं. वृद्ध मां का शव गलकर कंकाल जैसा ही रह गया था, वहीं बेटी का शव इतनी बुरी हालत में नहीं था. बताया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद से मां-बेटी बहुत परेशान थीं. पुलिस कंकाल और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर इस मामले की जांच कर रही है. डीएनए को संरक्षित करा दिया गया है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज के फॉरेन्सिक डिपार्टमेंट के हेड डॉ अजय अग्रवाल ने बताया कि मौके की जांच करने पर प्रथम दृष्टया यही लगता है कि वृद्धा विमला देवी की मौत 4 से 5 महीने पहले हो चुकी थी, इसलिए शव बिल्कुल गल चुका था. वहीं बेटी वीना की मौत 15-20 दिन पहले हुई जिसने अब गलना शुरू कर दिया था. डॉ अग्रवाल ने बताया कि शव 24 घंटे के बाद बदबू देना शुरू कर देता है और 15-20 दिन के बाद शव गलना शुरू कर देता है.

एक दुकानदार ने बताया कि नोटबंदी के बाद से मां-बेटी बहुत परेशान थीं. दोनों ने एक तरह से खुद को घर में ही बंद कर लिया था. कभी-कभार ही उन्हें बाहर निकल कर फल खरीदते देखा गया. घर में खाने के बर्तनों को देखने से पता चलता है कि महीनों से घर में खाना नहीं बना था. डिब्बे खाली पड़े थे. गैस पर भी जंग लग चुका था. वीना नर्स की नौकरी करती थी जो छूट चुकी थी. घर का खर्च विमला देवी के पेंशन के सहारे ही चलता था.

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मकान मालिक वीरेंद्र चंद्र के मुताबिक, दोनों ने बीते एक साल से किराया नहीं दिया था. वीरेंद्र चंद्र का कहना है कि वो मकान खाली कराना चाहते थे, लेकिन मां-बेटी इसके लिए तैयार नहीं थीं. मनोरोग विशेषज्ञ डॉ दिनेश राठौड़ ने बताया कि ये नेक्रोफीलिया का केस हो सकता है. ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति मृत व्यक्ति के साथ भी वैसे ही लगाव रखता है जैसे कि उसके जीवित होते समय. बहुत संभव है कि वीना इसी तरह के मनोरोग से पीड़ित हो.

वीना मां के शव से अलग नहीं होना चाहती हो. हालांकि भारत में इस तरह के मामले बहुत दुर्लभ हैं. हैरानी की बात ये है कि मां-बेटी की मौत का किसी को पता नहीं चला. जब कमरा खोला जा रहा था तो कई फीट पहले तक वहां की दुर्गंध को महसूस किया जा सकता था. पुलिस ये जानने की भी कोशिश कर रही है कि आसपास में किसी को शक क्यों नहीं हुआ जबकि दोनों मां-बेटी इतने दिनों से नहीं दिखी और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद रहा.

एक पड़ोसी ने बताया कि वीना अपनी मां से बहुत प्यार करती थी. कभी उसे घर पर अकेला नहीं छोड़ती थी. वीना ने मां का ध्यान रखने की वजह से शादी तक नहीं की. उसने मां की बीमारी की वजह से उसका ख्याल रखने के लिए ही नर्स की नौकरी छोड़ दी. वीना मां के शव से अलग नहीं होने देना चाहती थी. उसने किसी को उसके मरने की जानकारी भी नहीं दी. आसपास के लोगों को उनके बारे में ज्यादा नहीं पता कि वो कहां की रहने वाली थीं.

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