Rana Balachauria Murder Case: पंजाब में कबड्डी खिलाड़ी और प्रमोटर कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने इस सनसनीखेज हत्याकांड में शामिल दो शूटर और एक सहयोगी को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई की जानकारी खुद पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने दी. यह मामला न सिर्फ खेल जगत बल्कि पंजाब की कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ा चुनौतीपूर्ण बन गया था.
कई राज्यों में फैला था ऑपरेशन
यह गिरफ्तारी एक खुफिया जानकारी पर आधारित बड़े ऑपरेशन का नतीजा है, जो पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक फैला हुआ था। इस संयुक्त कार्रवाई में सिक्किम पुलिस, मुंबई पुलिस, पश्चिम बंगाल STF, हावड़ा पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में छिपे आरोपियों को पकड़ना एक बड़ी चुनौती थी।
पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान करण पाठक उर्फ करण डिफॉल्टर (निवासी अमृतसर), तरनदीप सिंह (निवासी बरहेवाल, लुधियाना) और आकाशदीप (निवासी उपला, तरनतारन) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, करण और तरनदीप ने सीधे तौर पर शूटिंग की थी, जबकि आकाशदीप ने उन्हें पनाह और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया।
अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार
इन तीनों की गिरफ्तारी के साथ ही इस हत्याकांड में अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
कैसे हुई थी राणा बलाचौरिया की हत्या
30 वर्षीय राणा बलाचौरिया की 15 दिसंबर 2025 को मोहाली के सोहाना में एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मैच के दौरान हुई इस वारदात से इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। खेल आयोजन के बीच हुई इस हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।
विदेशी हैंडलर से कनेक्शन
डीजीपी गौरव यादव के मुताबिक, आकाशदीप का संबंध विदेश में बैठे हैंडलर अमर खाबे राजपूता से है। आकाशदीप उसी का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है और उसी ने शूटरों को ठहरने और भागने में मदद की। इस एंगल ने मामले को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जोड़ दिया है।
पंजाब लाए जा रहे आरोपी
पुलिस ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों को आगे की जांच के लिए पंजाब लाया जा रहा है। उनसे पूछताछ के जरिए पूरे हत्याकांड की साजिश, फंडिंग और नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आएंगी।
बाकी साथियों की तलाश जारी
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होती। इस केस से जुड़े बाकी फरार आरोपियों और सहयोगियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास लगातार जारी हैं। पुलिस का उद्देश्य पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।
जांच में CCTV फुटेज का अहम रोल
AGTF के डीआईजी गुरमीत सिंह चौहान ने बताया कि मामले की जांच में CCTV फुटेज का अहम रोल रहा। फुटेज के जरिए आरोपियों की वारदात से पहले और बाद की गतिविधियों को रीक्रिएट किया गया। साथ ही, इस्तेमाल किए गए वाहनों की पहचान कर उनके भागने के रास्तों का भी पता लगाया गया।
पानीपत टोल प्लाजा तक ट्रेस हुआ रूट
पुलिस जांच में आरोपियों का एस्केप रूट पानीपत टोल प्लाजा तक ट्रेस किया गया. इसके बाद डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए यह पता चला कि आरोपी मुंबई, बेंगलुरु, सिलीगुड़ी, गंगटोक और कोलकाता होते हुए हावड़ा पहुंचे थे. इसी इनपुट के आधार पर गिरफ्तारी संभव हो सकी.
हावड़ा से हुई गिरफ्तारी
DIG के अनुसार, AGTF की टीम ने DSP राजन परमिंदर के नेतृत्व में हावड़ा में छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया. पश्चिम बंगाल पुलिस और STF के सहयोग से यह ऑपरेशन सफल रहा. लंबे समय से फरार आरोपी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गए.
शूटरों का आपराधिक इतिहास
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों का पहले से आपराधिक बैकग्राउंड रहा है. वे पहले भी गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं. इसी वजह से पुलिस को आशंका है कि यह हत्या किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है.
एनकाउंटर और एक्शन
हत्या के दो दिन बाद इस केस का एक आरोपी मोहाली के लालड़ू में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था. इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे. मारे गए आरोपी की पहचान हरपिंदर उर्फ मिड्डू, निवासी नौशहरा पन्नुआं, तरनतारन के रूप में हुई थी, जिसने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया.
aajtak.in