देश की बागडोर असल मायने में उन अफसरों के हाथों में होती है, जो पूरी ईमानदारी से अपना फर्ज निभाते हैं. यदि नौकरशाही दुरुस्त हो तो कानून-व्यवस्था चाकचौबंद रहती है. जिस तरह से भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खोखला किए जा रहा है, लोगों का उसपर से विश्वास उठता जा रहा है. लेकिन कुछ ऐसे भी IPS अफसर हैं, जो ईमानदारी के दम पर नौकरशाही की साख बचाए हुए हैं. उनके कारनामे आज मिशाल के तौर पर पेश किए जा रहे हैं. aajtak.in ऐसे ही महिला पुलिस अफसरों की बहादुरी की दास्तान पेश कर रहा है.
मंजिता वंजारा: बॉलीवुड की किसी एक्शन थ्रिलर की तरह लेडी पुलिस अफसर का बुर्का पहन कर जुए के अड्डे पर छापा मारना. उनके साथ में सादी ड्रेस में बस एक सब इंस्पेक्टर और अड्डे पर 28 हार्डकोर जुआरी मौजूद. ऐसे में पुलिस ऑफिसर के साथ कुछ भी होने का डर. हमला होने पर जान जाने का भी जोखिम. ये किसी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि अहमदाबाद में हुए एक पुलिस रेड की हकीकत है. इस दिलेर पुलिस ऑफिसर ने इसे अंजाम दिया उनका नाम है डीसीपी मंजिता वंजारा. मंजिता के बड़े पापा और गुजरात के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट डीजी वंजारा 30 साल तक पुलिस विभाग के कई उच्च पदों पर रहे. मंजिता का सपना हमेशा से ही पुलिस की वर्दी पहनने का था. वह फिलहाल सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. इसके पहले गांधीनगर की बीएड कॉलेज में प्रोफेसर भी रह चुकी हैं. वह विज्ञान की स्टूडेंट हैं.
संजुक्ता पराशर: असम की महिला IPS अफसर संजुक्ता पराशर बहादुरी का दूसरा नाम हैं. वह साल 2006 बैच की IPS अफसर हैं, जो असम के सोनितपुर जिले में बतौर एसपी तैनात हैं. संजुक्ता पराशर बोडो उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभा रही हैं. उनके नेतृत्व में पुलिस उग्रवादियों के लिए काल बन गई है. इस ऑपरेशन के उन्होंने 2015 में करीब 16 आतंकियों को मार गिराया, जबकि 64 को गिरफ्तार किया. 2014 में 175 और 2013 में 172 आतंकियों को जेल पहुंचाया दिया. संजुक्ता ने राजनीति विज्ञान से दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से ग्रेजुएट किया है. इसके बाद JNU से इंटरनेशनल रिलेशन में PG और US फॉरेन पॉलिसी में MPhil और Phd किया है. साल 2006 बैच की IPS संजुक्ता ने सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक हासिल की थी. उन्होंने मेघालय-असम कॉडर को चुना. असम उनका गृह राज्य भी है.
ऊषा किरण: 27 साल की ऊषा किरण देश की पहली सीआरपीएफ महिला अफसर हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके में तैनात किया गया. ऊषा किरण मूल रूप से गुड़गांव की रहने वाली हैं. ऊषा ने 25 साल की उम्र में सीआरपीएफ ज्वॉइन कर ली थी. नक्सली इलाके में पोस्टिंग खुद ऊषा की पहली पसंद थी. ऊषा ने कहा था, 'वह खुद बस्तर आना चाहती हैं. उन्होंने सुना है कि यहां के लोग काफी सीधे-साधे होते हैं.' बताते चलें कि वह हर ऑपरेशन में जवानों की अगुवाई खुद करती हैं. इससे आप उनकी बहादुरी का अंदाजा लगा सकते हैं. वर्तमान में असिस्टेंट कमांडेंट ऊषा रायपुर से 350 किलोमीटर दूर बस्तर के दरभा डिवीजन स्थित सीआरपीएफ कैंप में तैनात हैं.
किरण बेदी: पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी देश की चर्चित IPS अफसर रही हैं. उनका जन्म 9 जून, 1949 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. इनके पिता का नाम प्रकाश पेशावरिया और माता का नाम प्रेमलता है. इनकी प्रारंभिक शिक्षा सैक्रेड हार्ट कन्वेंट स्कूल, अमृतसर में हुई. वह इंग्लिश में बी.ए. (आनर्स) के साथ पॉलिटिकल साइंस में एम.ए. हैं. आई.आई.टी. दिल्ली से उनको डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि भी मिली है. किरण बेदी को टेनिस खेलने का शौक था. टेनिस खेलते हुए उन्होंने कई खिताब जीते. वे ऑल-एशियन टेनिस चैम्पियनशिप और एशियन लेडीज टाइटल विजेता भी रह चुकी हैं. जुलाई 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में भर्ती होने के साथ ही उन्हें देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी होने का गौरव हासिल है. बतौर पुलिस अफसर किरण बेदी अपने काम की वजह से हमेशा सुर्खियों में रही हैं. उन्होंने नशीले पदार्थों के नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा जैसे प्रमुख काम किए हैं. उन्हें क्रेन बेदी के नाम से भी जाना जाता है. दिल्ली ट्रैफिक में तैनाती के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार को क्रेन से उठवा लिया था.
रुवेदा सलाम: पिता अक्सर कहा करते थे कि बेटी आपको एक अफसर बनना है. अपने पिता की यही बात रुवेदा के जेहन में बस गई. उन्होंने पिता के सपने को साकार किया. कश्मीर घाटी की पहली महिला मुस्लिम IPS बनने का गौरव हासिल करके पूरी दुनिया में नाम रौशन कर दिया. कश्मीर के कुपवाड़ा की रहने वाली रुवेदा को पिता की सीख लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही. वह यहीं नहीं रुकी. उन्होंने दोबारा UPSC का एग्जाम दिया. इस बार उन्हें IAS के लिए सलेक्ट किया गया. फिलहाल वह मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस में काम कर ही हैं. रुवेदा इससे पहले मेडिकल परीक्षा, कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (KAS) और इंडियन पुलिस सर्विसेज (IPS) की परीक्षाओं में सफलता हासिल कर चुकी हैं. IPS में चयन के बाद उनको चेन्नई में असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के तौर पर नियुक्त किया गया था.
सोनिया सिंह: यूपी में बुलंदशहर की सड़कों पर खास मकसद से एक टीम निकली. टीम में शामिल थे कुछ पुरूष और महिलाएं. टीम की अगुवाई एक महिला कर रही थी. दरअसल यहां जिस महिला का जिक्र किया जा रहा है वह कोई और नहीं बल्कि बुलंदशहर की एसएसपी सोनिया सिंह हैं. जींस-टॉप में नजर आ रही पुलिस कप्तान के इस अवतार को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया. शहर में लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ने की शिकायतें मिलने पर एसएसपी ने खुद सड़क पर निकलने का फैसला किया. एसएसपी का मकसद मनचलों को करारा सबक सिखाना था.
मंजिल सैनी: यूपी की राजधानी लखनऊ में तैनात IPS अफसर मंजिल सैनी लेडी सिंघम के नाम से मशहूर हैं. उनकी ईमानदारी और अनुशासन के उदाहरण दिए जाते हैं. मंजिल सैनी का जन्म 19 सितंबर 1975 को दिल्ली में हुआ था. स्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला लिया. वहां से फिजिक्स ऑनर्स करने के बाद दिल्ली कॉलेज ऑफ इकोनॉमिक्स से गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा देना का निर्णय लिया. मंजिल ने अपने पहले ही प्रयास में 2005 में परीक्षा पास कर लिया और आईपीएस अफसर बन गईं. उन्हें यूपी काडर मिला. वह बंदायू, मुजफ्फरनगर, इटावा, मथुरा सहित आधा दर्जन से भी ज्यादा जिलों में कार्य कर चुकी हैं.
अनीता प्रभा: मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी बनने जा रही अनीता प्रभा (शर्मा) की कहानी भी बहुत मार्मिक और हौसला बढ़ाने वाली है. अनूपपुर जिले के छोटे से इलाके कोतमा की रहने वाली अनीता प्रभा ने 25 साल की उम्र में वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना हर छात्र अपने जीवन में करता है. इतनी कम उम्र में अनीता ने अपने जीवन में काफी कठिनाइयों का सामना किया है. 12वीं पास करते ही साल 2009 में माता-पिता के दबाव में आकर महज 17 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई. अनीता के पति उनसे उम्र में 10 साल बड़े थे. अनीता की पढ़ने की जिद के आगे ससुराल वाले भी झुकने को मजबूर हो गए. ससुराल वालों ने ग्रेजुएशन करने की अनुमति दे दी. लेकिन किस्मत देखिए, ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में पति के एक्सीडेंट के कारण वह एग्जाम नहीं दे सकीं. आर्थिक मदद के लिए ब्यूटीशियन का कोर्स किया और पार्लर में काम करना शुरू किया. कैरियर को लेकर महत्वाकांक्षी अनीता और उनके पति के बीच बात अब बिगड़ने लगी थी. अनीता ने साल 2013 में व्यापम की फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा दी. चार घंटे में 14 किलोमीटर पैदल चलकर परीक्षा पूरी की. दिसंबर 2013 में उन्हें बालाघाट जिले में पोस्टिंग मिली. इसके बाद सब-इंस्पेक्टर बनी. लेकिन कुछ कर दिखाने की जिद ने आज उन्हें डीएसपी बना दिया.