साउथ कोरिया के BTS पॉप बैंड के चक्कर में नाबालिग लड़कियों ने रची हैरतअंगेज साजिश!

महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में साउथ कोरिया के बेहद लोकप्रिय बीटीएस पॉप बैंड के सदस्यों से मिलने के चक्कर में दो नाबालिग लड़कियों ने ऐसी साजिश रची, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया. यहां दोनों लड़कियों ने पैसे जुटाने के लिए अपने ही अपहरण की साजिश रच डाली.

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महाराष्ट्र के धाराशिव जिले की रहने वाली हैं दोनों लड़कियां. (Meta AI Image) महाराष्ट्र के धाराशिव जिले की रहने वाली हैं दोनों लड़कियां. (Meta AI Image)

aajtak.in

  • छत्रपति संभाजीनगर,
  • 30 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:08 PM IST

महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में साउथ कोरिया के बेहद लोकप्रिय बीटीएस पॉप बैंड के सदस्यों से मिलने के चक्कर में दो नाबालिग लड़कियों ने ऐसी साजिश रची, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया. यहां दोनों लड़कियों ने पैसे जुटाने के लिए अपने ही अपहरण की साजिश रच डाली. लेकिन समय रहते पुलिस ने इस साजिश का पर्दाफाश कर दिया. दोनों से पुलिस स्टेशन में पूछताछ की गई है.

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जानकारी के मुताबिक, 11 और 13 वर्षीय दोनों लड़कियां धाराशिव जिले के एक गांव की रहने वाली है. उन्हें दक्षिण कोरिया का लोकप्रिय बीटीएस पॉप बैंड बहुत पसंद है. वो उनके सदस्यों से मिलने के लिए जाना चाहती थीं. 27 दिसंबर को धाराशिव पुलिस को हेल्पलाइन नंबर पर एक व्यक्ति का फोन आया. इसमें दावा किया गया कि ओमेरगा तालुका से तीन लड़कियों को जबरन वैन में ले जाया गया है.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्होंने बस को सोलापुर जिले के मोहोल इलाके से गुजरते समय ट्रैक किया. ओमेरगा पुलिस ने मोहोल में समकक्षों के साथ-साथ बस स्टैंड पर एक दुकान चलाने वाली महिला से भी संपर्क किया. उस महिला की मदद से तीनों लड़कियों को बस से नीचे उतारा गया. इसके बाद उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन लाया गया. इतने देर में उनके माता-पिता भी पहुंच गए.

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इसके बाद अगले दिन पुलिस ने दोनों लड़कियों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि उनकी पुणे जाने, वहां काम करने और पैसे कमाने की योजना है. वो पैसे इसलिए कमाना चाहती हैं, ताकि उन पैसों से बीटीएस पॉप बैंड के पसंदीदा सदस्यों से मिलने के लिए साउथ कोरिया जा सकें. पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने वाली एक महिला का ट्रेस कर लिया, पुणे जा रही थी.

साउथ कोरिया के बेहद लोकप्रिय बीटीएस पॉप बैंड के सदस्य.

पुलिस ने अपहरण की साजिश रचने के आरोप में दोनों नाबालिग लड़कियों को हिरासत में ले लिया. हालांकि, पुलिस ने काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया. बताते चलें कि बच्चों के बीच बीटीएस बैंट का जबरदस्त खुमार देखने को मिलता है. दो साल पहले तो अहमदाबाद में कई बच्चों को डॉक्टर तक को दिखाना पड़ा था. यहां स्कूली बच्चों के अभिवावक शेल्बी अस्पताल पहुंचे थे. 

एक रिपोर्ट में लिखा गया था कि अभिवावक ये श‍िकायत लेकर आए कि उनके बच्चे कोरियन बैंड बीटीएस के सदस्यों के खाने, कपड़े पहनने और यहां तक कि उन्हीं की तरह रहने की लत से जूझ रहे हैं. इस बैंड को सुनकर वो इससे पूरी तरह प्रभावित हैं. उनकी जिंदगि‍यों में इसका असर साफ-साफ दिखता है. मनोचिकित्सक इस तरह के बच्चो को डिजिटल ड्रग के लती मानकर इलाज करते हैं. 

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दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश बताया था कि ऐसे बच्चों की तादाद बहुत ज्यादा है जो मोबाइल या कंप्यूटर पर म्यूजिक बैंड, किसी यू ट्यूब चैनल या गेम या फिर किसी ऐसे डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म के लती हो गए हैं. वो उनकी जिदंगी में पूरी तरह जगह बना चुका है. वहीं किसी म्यूजिक बैंड की तेज धुनों का आदी होना एक नशा है. इसे डिजिटल ड्रग कहते हैं.  

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