22 साल पहले हुई लूट की वह कहानी, जिसमें बरामदगी के बाद भी सभी आरोपी बरी

22 साल पहले सोने की एक लूट हुई थी. प्रयागराज के व्यापारी का 4 किलो सोना लूटने वाले 7 आरोपियों में 5 आरोपी पुलिस वाले थे. आरोप लगा कि पुलिसकर्मियों ने ही व्यापारी से सोना लूटा था. फिलहाल निचली अदालत से 16 साल की सुनवाई के बाद पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपी बरी कर दिए गए हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 29 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

22 साल पहले लखनऊ के चर्चित सोना लूट कांड ने उत्तर प्रदेश पुलिस की खूब किरकिरी करवाई. प्रयागराज के व्यापारी का 4 किलो सोना लूटने वाले 7 आरोपियों में 5 आरोपी पुलिस वाले थे. आरोप लगा कि पुलिसकर्मियों ने ही व्यापारी से सोना लूटा था. फिलहाल निचली अदालत से 16 साल की सुनवाई के बाद पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपी बरी कर दिए गए हैं.

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निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सरकार की तरफ से हाई कोर्ट में अपील की तैयारी की जा रही है. 22 साल पहले 19 सितंबर 2006 को लखनऊ के तेलीबाग इलाके में हुई प्रयागराज के व्यापारी विशाल वर्मा से 4 किलो सोना लूट में सभी आरोपी बरी कर दिए गए हैं. व्यापारी संजय गुप्ता के लिए 36 लाख रुपए लेकर विशाल वर्मा अपने भाई मोनू वर्मा के साथ लखनऊ आया था. लखनऊ के चौक से विशाल वर्मा ने पंकज अग्रवाल से 4 किलो सोना खरीदा.

दोनों भाई अपनी टाटा सुमो से प्रयागराज जाने लगे तो रास्ते में दोनों भाइयों ने दो-दो किलो सोना सुरक्षा के लिए अपनी कमर में बांध लिया. बताते हैं कि जैसे ही गाड़ी रायबरेली रोड तेलीबाग इलाके में पहुंची तभी पीछे से आई मारुति कार से पांच लोग उतरे और खुद को पुलिस बता कर दोनों भाइयों के आंख पर पट्टी बांध दी. रास्ते में  कार सवार लुटेरों ने दोनों भाइयों से उनका 4 किलो सोना छीन लिया और लावारिस हालत में लखनऊ के देवा रोड पर छोड़ दिया.

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बदमाशों के चंगुल से छूटे विशाल वर्मा ने सबसे पहले इसकी सूचना पंकज अग्रवाल को दी और पंकज अग्रवाल, विशाल वर्मा को लेकर आलमबाग थाने पहुंच गए, जहां सोना लूट की एफआईआर दर्ज करवाई गई. व्यापारी से 4 किलो सोना लूट की घटना पर लखनऊ क्राइम ब्रांच को लगाया गया और लखनऊ क्राइम ब्रांच ने 27 सितंबर 2006 को दो कॉन्स्टेबल सुशील और आलोक को गिरफ्तार किया.

इन दोनों से पूछताछ के बाद श्रावस्ती में तैनात सब इंस्पेक्टर संतोष सिंह और कांस्टेबल संतोष तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया. अगले दिन सब इंस्पेक्टर बैजनाथ यादव को गिरफ्तार किया गया. इस तरह लखनऊ क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सब इंस्पेक्टर संतोष सिंह, बृजनाथ यादव और कॉन्स्टेबल सुशील, आलोक और संतोष तिवारी को गिरफ्तार किया. पुलिस को सब इंस्पेक्टर संतोष सिंह और संतोष तिवारी के पास से एक 1-1 किलो सोना भी बरामद हुआ.

पुलिस वालों की गिरफ्तारी हुई इस घटना में शामिल दो अन्य आरोपी नीरज गुप्ता और सुभाष ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया. इनके पास से भी 1 किलो सोना बरामद हुआ. पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों के बयान, मोबाइल लोकेशन, बरामद सोने की पहचान और विशाल वर्मा के द्वारा दिए गए बयान के आधार पर पुलिस ने 6 दिसंबर 2006 को चार्जशीट दाखिल कर दी. गिरफ्तार किए गए सभी पुलिसकर्मियों समेत सात आरोपी  जमानत पर रिहा कर दिए गए.

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लखनऊ के चर्चित सोना लूट कांड में 22 साल बाद फैसला आया है और लखनऊ की निचली अदालत ने सभी पुलिसकर्मियों समेत सात आरोपियों को सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. हालांकि इस मामले में एडीजीसी ने निचली अदालत के फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा है कि ऊपरी अदालत में इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी, निचली अदालत ने पुलिस के द्वारा पेश किए गए सबूतों को नजरअंदाज किया है.अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील होगी.

 

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