गुजरात के राजकोट में रिश्वतखोरी के एक मामले में रिटायर सरकारी कर्मचारी को स्पेशल कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई है. ये मामला साल 2006 का है. पश्चिम गुजरात बिजली कंपनी में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर रहे भरत गोहिल को दोषी मानते हुए 3 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई गई है. उसने जूनागढ-पोरबंदर सर्कल में 1620 बिजली के खंभे सप्लाई करने के कॉन्ट्रैक्ट के बिल को पास करने के लिए रिश्वत ली थी, जिसकी एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत हुई थी.
उस वक्त फरियादी ने कहा था कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर भरत गोहिल ने प्रति खंभे चार रुपए के हिसाब से 6480 रुपए रिश्वत मांगी थी. इस शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने उनको रंगे हाथ पकड़ लिया था. इसके बाद से स्पेशल कोर्ट में यह केस चल रहा था. कोर्ट में आरोपी ने कहा था कि रिश्वत के पैसे उसके पास से बरामद नहीं हुए थे, बल्कि ऑफिस के एक डस्टबीन से मिले थे. उस वक्त वो अपने एक सीनियर अफसर के साथ मीटिंग के लिए गए थे.
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि यदि यह बात सच है तो आरोपी ने फरियादी पर फर्जी केस के लिए कोई शिकायत क्यों नहीं किया था. इसके साथ ही उसने अपने सीनियर अफसर को गवाही के लिए क्यों नहीं बुलाया था. सरकारी पक्ष की ओर से दलील की गई कि आरोपी झूठ बोल रहा है. एंटी करप्शन ब्यूरो ने उसे पैसे लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. उनकी गैर मौजूदगी में कोई उनके ऑफिस में आकर पैसे रख जाए ऐसा कतई संभव नहीं है.
बताते चलें कि इसी साल सितंबर में गुजरात के मोरबी जिले में साल 2014 के रिश्वतखोरी के मामले मे कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को दोषी पाते हुए 5 साल के कारावास की सजा सुनाई थी. मोरबी जिले के मालिया थाने के एक कॉन्स्टेबल पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए से रिश्वत मांगने का आरोप था. उसे एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथ पकड़ा था. उसी केस मे स्थानीय कोर्ट ने आरोपी को 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी.
शिकायतकर्ता मनोज की भाभी पूजा को अपने पति के पास नैरोबी जाना था. इसके लिए पासपोर्ट बनाने की कागज़ी प्रक्रिया होती है. इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस वेरिफिकेशन भी होता है, जिसके लिए 17 मार्च 2014 को पूजा को मालिया पुलिस स्टेशन से फोन आया. पूजा पुलिस थाने पहुंची. कॉन्स्टेबल अमरतभाई ने हस्ताक्षर लेने के बाद 500 रुपए भुगतान करने के लिए कहा था. पूजा ने पूछा कि सारी प्रक्रिया और फीस तो पहले से भर दी है तो अब पैसे क्यों दें?
इसके बाद पुलिसकर्मी अमरत मकवाणा ने दूसरे दिन भी फोन करके फिर से कहा कि यदि पासपोर्ट चाहिए तो 500 रुपए देने होंगे. पूजा रिश्वत की रकम नहीं देना चाहती थी. इसलिए मनोज ने एंटी करप्शन ब्यूरो से शिकायत की और एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर रिश्वतखोर पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया. यह मामला विशेष न्यायाधीश (ACB) एवं प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला. इस दौरान 7 मौखिक और 35 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए गए.
ब्रिजेश दोशी