डूंगरपुर केस: UP के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को 7 साल की सजा, 8 लाख रुपए जुर्माना भी देना होगा

डूंगरपुर केस में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सात साल जेल की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही आठ लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया है. उनके साथ चार आरोपियों को 16 मार्च को रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया था. सीतापुर जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए.

Advertisement
वरिष्ठ सपा नेता आजम खान को डूंगरपुर मामले में हुई सजा... वरिष्ठ सपा नेता आजम खान को डूंगरपुर मामले में हुई सजा...

संतोष शर्मा / समर्थ श्रीवास्तव

  • रामपुर/लखनऊ,
  • 18 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

यूपी के रामपुर के चर्चित डूंगरपुर केस में सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को सात साल जेल की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही तीन दोषियों को पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई गई है. इनमें रामपुर के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अजहर अहमद खान, पूर्व क्षेत्राधिकारी आले हसन और बरकत अली शामिल हैं. 16 मार्च को रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने चारों लोगों को दोषी करार दिया था. सीतापुर जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए. 

Advertisement

किसको कितनी सजा...

आजम खान- 

1. आईपीसी की धारा 452 के तहत 7 साल की जेल, 5 लाख रुपए जुर्माना

2. आईपीसी की धारा 427 के तहत 2 साल की सजा और 2 लाख रुपए जुर्माना

3. आईपीसी की धारा 504-506 के तहत 2 साल की सजा और 1 लाख रुपए जुर्माना 

पूर्व क्षेत्राधिकारी आले हसन, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अजहर अहमद खान और बरकत अली-

1. आईपीसी की धारा 452 के तहत 5 साल की सजा और 2 लाख रुपए जुर्माना 

2. आईपीसी की धारा 427, 506, 504 के तहत 1 साल की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माना

साल 2019 में रामपुर की डूंगरपुर बस्ती में निजी जमीन पर जबरन कब्जा करने आए आरोपियों ने जमकर हंगाम किया था. आरोप है कि वहां मौजूद घर में घुसकर लोगों से मारपीट की गई थी. पैसे और सामान लूट लिए गए थे. यूपी में बीजेपी की सरकार आने के बाद जमीन के मालिक एहतेशाम ने आजम खान सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था. सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 504, 506 और 120बी के तहत केस दर्ज है.

Advertisement

इसमें आजम खान को आपराधिक साजिश रचने का दोषी माना गया, जबकि बाकी तीन लोगों पर घर में घुसकर मारपीट करने, धमकाने और डकैती जैसे गंभीर दोष सिद्ध हो चुके हैं. दो आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो चुके हैं. दोषियों पर लगाई गई धाराओं में आईपीसी की धारा 452 के तहत अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है. शेष धाराओं में अधिकतम छह महीने से लेकर दो साल तक की सजा का प्रावधान है.

बताते चलें कि पिछले साल फेक बर्थ सर्टिफिकेट केस में सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई गई थी. फेक बर्थ सर्टिफिकेट का यह केस साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से जुड़ा है. तब अब्दुल्ला आजम ने रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उनकी जीत भी हुई थी. 

चुनावी नतीजों के बाद उनके खिलाफ हाई कोर्ट में केस दाखिल कर दिया गया था. उन पर आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने चुनावी फार्म में जो उम्र बताई है, असल में उनकी उम्र उतनी नहीं है. आरोप था कि अब्दुल्ला विधायक का चुनाव लड़ने की उम्र का पैमाना पूरा नहीं करते हैं. शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अब्दुल्ला का डेट ऑफ बर्थ 1 जनवरी 1993 है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र में 30 सितंबर 1990 है. 

Advertisement

यह मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद इस पर सुनवाई शुरू हुई थी. अब्दुल्ला आजम की तरफ से पेश किए गए जन्म प्रमाण पत्र को फर्जी पाया गया था. इसके बाद स्वार सीट से उनका चुनाव रद्द कर दिया गया था. अब्दुल्ला पर पहले जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने और विदेशी दौरे करने के साथ ही सरकारी उद्देश्य के लिए दूसरे प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने का भी आरोप है. 

इसके अलावा उन पर जौहर विश्वविद्यालय के लिए भी इसका उपयोग करने का आरोप है. दरअसल, अब्दुल्ला आजम के पास दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र हैं. एक 28 जून 2012 को रामपुर नगर पालिका ने जारी किया गया था, जिसमें रामपुर को अब्दुल्ला के जन्मस्थान के रूप में दिखाया गया है. वहीं दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जनवरी 2015 में जारी किया गया था, जिसमें लखनऊ को उनका जन्मस्थान दिखाया गया है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement