"इस पूरे केस की जांच को कचरा बना दिया. सबूत इकट्ठा करने के बुनियादी नियमों तक की धज्जियां उड़ा दी. पूरे केस की जांच को देख कर ऐसा लगता है जैसे एक गरीब नौकर को राक्षस बनाने की कोशिश हुई है"...निठारी कांड की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की ये सख्त टिप्पणी बहुत कुछ बयां करती है. इसमें भले ही साफ लहजों में कुछ न कहा गया हो, लेकिन इतना जरूर पता चलता है कि सीबीआई ने पूरे केस में लीपापोती की कोशिश की है. इतना ही नहीं असली अपराधी को बचाने के लिए नौकर सुरेंद्र कोली को फंसाने के लिए पूरी कोशिश की गई है. यही बात खुद कोली ने अपनी पत्नी शांति देवी से कही थी, जब वो साल 2014 में उससे मिलने डासना जेल गई थी.
निठारी कांड में गिरफ्तार होने के करीब आठ साल बाद सुरेंद्र कोली की पत्नी शांति देवी अपने दोनों बच्चों के साथ गाजियाबाद के डासना जेल गई थी. उनके साथ कोली के बड़े भाई चंदन और अल्मोड़ा के तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह भी मौजूद थे. अपनी पत्नी और बच्चों को देखकर कोली फूट-फूट कर रोने लगा था. छोटे बेटे को तो उसने पहली बार देखा था, क्योंकि गिरफ्तारी के वक्त उसकी पत्नी गर्भवती थी. लंबे समय बाद पति को देख शांति भी बदहवाश हो गई, लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया और पूछा कि सच्चाई क्या है? इस पर कोली ने कहा था कि पंढेर ने उसे फंसाया है. पुलिस ने तीन महीने तक उसे टॉर्चर किया. उसके पैर के नाखून पिलास से निकाल दिए. इसके बाद दबाव में आकर उसे जुर्म कबूल करना पड़ा था. लेकिन पहली बार फांसी की सजा टलने के बाद उसे उम्मीद जगी. उसने अपना केस मजबूती से लड़ने का निर्णय लिया.
सुरेंद्र कोली से जेल में मिलने के बाद शांति देवी ने बताया था...
1. कोर्ट में अपनी पैरवी खुद करता है कोली
सुरेंद्र कोली ने पत्नी शांति देवी ने बताया था कि उसके पति अपनी कानूनी लड़ाई खुद लड़ रहे हैं. उन्होंने अपने वकील हटा दिए हैं. कोर्ट में खुद अपनी पैरवी करते हैं. इसके लिए जरूरी कानूनी किताबें पढ़ रहे हैं. उन्होंने अपने साथ हो रहे अन्याय के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक को पत्र लिखा है. अपने पक्ष मजबूत करने के लिए कई अहम कागजात जुटा लिए हैं. इतना ही नहीं कोली ने अपनी पत्नी से कहा था कि उसे फंसाया गया है. वो जेल के अंदर रहकर अपनी लड़ाई लड़ेगा. उसने अपने परिजनों से अपील की थी वो बाहर रहकर उसे सपोर्ट करें. कोली ने ये आरोप लगाया था कि उसकी बातों को जेल की चार दिवारी में दबा दिया जा रहा है. उसके खत पते पर जाने से पहले गायब हो जाते हैं.
2. जेल में जहर देकर मारने की हुई कोशिश
शांति देवी ने उस वक्त ये भी खुलासा किया था कि सुरेंद्र कोली को जान से मारने की धमकी दी जा रही है. उस पर दबाव बनाया जा रहा है कि वो इस कांड से जुड़े सारे इल्जाम अपने उपर ले ले. वरना उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी जाएगी. इतना ही नहीं जेल में भी कोली को मारने की कोशिश की गई थी. जेल के ही एक कर्मी को 10 लाख रुपए देकर उसे जहर देने की बात कही गई थी, लेकिन उस शख्स ने कोली के पास आकर ये बात बता दी. इस वजह से वो बच गया. इसके बाद उसने अल्मोड़ा के डीएम को खत लिखकर मंगरूखाल गांव में रह रही अपनी मां, पत्नी और बच्चों के जान पर खतरे की आशंका जताई थी. डीएम ने गांव प्रधान से हर तीन दिन में उनकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था.
3. आठ साल पहले गांव गया था कोली
शांति देवी ने बताया था कि सुरेंद्र कोली आठ साल पहले अपने गांव मंगरूखाल गया था. उस वक्त उसकी बेटी के लिए गांव में एक पूजा रखी गई थी. जिस दिन वो पूजा में बैठा था, उसी दिन मोहिंदर सिंह पंढेर का ड्राइवर गांव आ गया. उसने कोली से कहा कि साहब उसकी सरकारी नौकरी लगवा रहे हैं. इसलिए उसे तुरंत नोएडा बुलाया है. इसके बाद कोली तुरंत ही उस ड्राइवर के साथ अपने गांव से निकल गया. लेकिन नोएडा पहुंचते ही सीबीआई ने उसे हिरासत में ले लिया. इसके बाद उसे पूरे केस की जानकारी हुई. कोली की पत्नी की माने तो इस केस के खुलासे के बाद उसका जीना दुर्भर हो गया था. लोग उसे नर पिशाच की पत्नी के रूप में देखते थे. उसे ताना मारते थे. उसने घर से निकलना बंद कर दिया.
4. पति के जाने के बाद सबने छोड़ा साथ
सुरेंद्र कोली का परिवार बहुत गरीब रहा है. उसके भाई दिल्ली में ही अलग-अलग जगहों पर अपने परिवार के साथ रहते हैं. गांव में कोली की मां के साथ शांति देवी अपने बच्चों के लेकर रहती थी. वो पढ़ी-लिखी भी नहीं है. इसे केस के सामने आने के बाद सब ने उससे नाता तोड़ लिया. किसी ने भी साथ नहीं दिया. यहां तक कि उसने कोली के तीन भाइयों से गुहार लगाई कि वे हर महीने 500-500 रुपए गुजारे के लिए दे दिया करें, ताकि 1500 रुपए में वो अपने बच्चों और मां का पेट पाल सके, लेकिन सभी ने इंकार कर दिया था. तंगी से परेशान होकर वो अपने भाई के पास दिल्ली आ गई. कुछ दिनों बाद भाई ने भी साथ छोड़ दिया, तो नौकरी करके अपने बच्चों की देखभाल कर रही थी.
पत्नी का पता नहीं, मां दुनिया छोड़ गई
निठारी कांड में भले ही सुरेंद्र कोली जेल में है, लेकिन असली सजा उसके परिवार ने काटी है. उसके कथित गुनाहों ने उसके परिवार को बर्बाद कर दिया है. आज उसके गांव मंगरूखाल में कोई नहीं है. बस गांव के एक बाहरी इलाके में बना उसके घर खंडहर होकर अपने अतीत को बचाए हुए हैं. कोली के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी जब दिल्ली चली आई तो गांव में उसकी मां अकेले रह गई. वो पागलों की तरफ इधर-उधर घूमती रहती थी. अपने बेटे की बेगुनाही की बातें किया करती थी. गांव की महिलाएं उसे खाना दे देती थी. कुछ साल पहले उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. शांति देवी का कुछ पता नहीं है. बस इतना बताया जाता है कि वो दिल्ली में ही रहकर अपने बच्चों को किसी तरह से पाल रही है.
मुकेश कुमार गजेंद्र