मौत के वायरस की इनसाइड स्टोरी, वुहान की लैब से ही लीक हुआ कोरोना?

दुनिया के इतिहास में कभी ऐसी कोई महामारी नहीं आई जिसने एक साथ एक ही वक्त में पूरी दुनिया को अपने शिकंजे में ले लिया हो. अमेरिका इससे इतना ज्यादा परेशान इसलिए है क्योंकि जितना सितम कोरोना उस पर ढहा रहा है. उतना सितम ना तो दुनिया के किसी और देश में है और ना ही खुद चीन में.

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वुहान से निकलकर कोरोना ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है वुहान से निकलकर कोरोना ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है

शम्स ताहिर खान / परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

  • चीन के नाम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी!
  • कहा- जांच में 'सच' खुला तो करारा जवाब मिलेगा

कोरोना वो सवाल है. जिसका जवाब ढूंढते-ढूंढते चार महीने गुजर चुके हैं. कोरोना का वायरस वो लाइलाज बीमारी है. जिसकी वजह से डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वुहान वो जन्मभूमि है. जहां कोरोना का जन्म हुआ. चीन वो देश है, जिसने फिश मार्केट और वायरोलॉजी लैब के बीच ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जिसका रहस्य दुनिया सुलझा ही नहीं पा रही है और अब इसी चक्रव्यूह के बीच एक इंटर्न की एंट्री होती है और रहस्य और ज्यादा गहरा जाता है.

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सवाल तो वाजिब है. जब पूरी दुनिया जूझ रही है तब चीन में कोरोना को लेकर खौफ क्यों नहीं है. क्यों जब दुनिया के तमाम बड़े शहरों में लॉकडाउन है. तब शंघाई और बीजिंग अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ रहे हैं. क्यों जब दुनिया में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का आंकड़ा हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है. तब चीन में कोविड-19 से होने वाली मौतें और मामले रुक से गए हैं. क्यों जब तमाम दुनिया की अर्थव्यवस्था खस्ता हो रही है. तब चीन की अर्थव्यवस्था और निर्यात तेजी से बढ़ रहा है. शक तो पैदा होता है. होना भी चाहिए. लेकिन अगर ये शक यकीन में तब्दील हो गया तो सोचिए चीन का क्या होगा?

दुनिया के इतिहास में कभी ऐसी कोई महामारी नहीं आई जिसने एक साथ एक ही वक्त में पूरी दुनिया को अपने शिकंजे में ले लिया हो. अमेरिका इससे इतना ज्यादा परेशान इसलिए है क्योंकि जितना सितम कोरोना उस पर ढहा रहा है. उतना सितम ना तो दुनिया के किसी और देश में है और ना ही खुद चीन में. जहां से इस वायरस की शुरुआत हुई तो क्या सच में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की लैब से ही निकला है कोरोना का जिन्न. फिर उन तमाम थ्योरीज का क्या. जिसमें चीन ने इसके लिए चमगादड़ों को ज़िम्मेदार ठहराया.

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अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स ने अपनी एक रिपोर्ट में ये दावा किया कि दुनिया को मुश्किल में डालने वाला कोविड-19 का वायरस चमगादड़ों से इंसान में नहीं आया. बल्कि इंसान से इंसान में आया. इसे वुहान की लैब में ही तैयार किया गया. और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में काम करने वाली एक इंटर्न की गलती की वजह से ये लैब से लीक होकर बाहर आ गया.

इंटर्न की गलती से ये वायरस कैसे लीक हुआ ये हम आपको बताएंगे. मगर उससे पहले ये जान लीजिए कि आखिर इस लैब में चीन वायरस बना ही क्यों रहा था. दरअसल चीन का ये वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी दुनिया की पी4 लेवल की लैब में से एक है. ये बनी ही वायरस संक्रमण स्ट्रेन रखने के लिए. उन पर रिसर्च करने और टेस्टिंग करने वाली ये ग्लोबल लैबोरेट्री है.

सूत्रों के मुताबिक हालांकि कोरोना वायरस कोई बायोवेपन नहीं है. बल्कि चमगादड़ के बीच स्वाभाविक रूप से पैदा होने वाला वायरस है. जिस पर वुहान लैब में रिसर्च की जा रही थी. वायरस का पहला चरण बैट-टू-ह्यूमन था और कोरोना की पहली संक्रमित मरीज़ फिश मार्केट में काम करने वाली कोई बुज़ुर्ग महिला नहीं बल्कि वो इंटर्न थी जिसकी गलती की वजह से ये लीक हुआ. इसके बाद से ही ये वायरस ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसफर होने लगा.

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शुरुआती जांच में माना गया था कि कोरोना का ये वायरस उस वुहान फिश मार्केट से फैला जहां चमगादड़ों को खाने के लिए बेचा जाता था. चीन ने भी इस महामारी के फैलने के लिए फिश मार्केट को ही दोषी ठहराया है. हालांकि इस रिपोर्ट के मुताबिक वुहान की उस फिश मार्केट में चमगादड़ कभी बेचा ही नहीं गया और अब तो ये दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भी कर रहे हैं.

फॉक्स न्यूज की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मंत्रिमंडल कोरोना वायरस से पैदा हुई महामारी की जांच कराना चाहता है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि चीन के वुहान में चमगादड़ों पर हो रही रिसर्च से ये वायरस पैदा हुआ. इसके अलावा अमेरिका का खुफिया विभाग भी कोरोना की उस टाइमलाइन को खंगालने की कोशिश कर रही है. जिसकी जानकारी सरकार के पास है. ताकि असल में वहां जो हुआ उसकी सही-सही तस्वीर बन पाए. अमेरिका का दावा है कि वुहान में कई अजीब चीजें हो रही हैं. जिसकी जांच होनी अभी बाकी है. और उसके बाद ही सच का पता लगाया जा सकेगा.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने बताया कि हम हर चीज की पूरी जांच कर रहे हैं, ताकि हम ये जान सकें कि वायरस बाहर कैसे आया और दुनियाभर में कैसे फैला और आज इसने अमेरिका और पूरी दुनिया में इतनी तबाही मचाई है और इतने लोगों की जान ली है. खुली मानसिकता वाले और पारदर्शी देश इतने सक्षम होते हैं कि चीजों को नियंत्रण में रख सकें और सुरक्षित रहें. वे बाहरी लोगों को अनुमति देते हैं ताकि वे आश्वस्त हो सकें कि सभी प्रक्रिया सही है. काश ऐसा यहां भी होता. हमें इसके बारे में और जानकारी होती और हम आज ये भी जान पाते कि वहां क्या हुआ?

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अब सवाल ये है कि आखिर चीन इस महामारी को अपनी जमीन पर क्यों तैयार कर रहा था. जबकि इससे उसे भी इतना ही खतरा था. जितना बाकी दुनिया को है. जानकारों का मानना है कि चीन दरअसल दुनिया को ये दिखाने के लिए वायरस पर स्टडी कर रहा था कि किसी वायरस को पहचानने या उससे लड़ने में वो अमेरिका के बराबर या ज्यादा सक्षम है. बस इसी वर्चस्व की लड़ाई में उससे ये गलती हो गई. या कहें कि उसने ये गलती जानबूझ कर की. हालांकि इन बातों का साबित होना अभी बाकी है.

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अब आते हैं उस इंटर्न पर जिसकी गलती की वजह से ही आज इंसानियत खतरे में हैं. फॉक्स न्यूज का दावा है कि कोरोना वायरस भले ही प्राकृतिक हो सकता है. लेकिन इंसानों तक ये वुहान की लैब से ही निकलने के बाद पहुंचा. बताया गया कि वुहान की लैब में काम कर रही इंटर्न ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया. जिसकी वजह से वो कोरोना संक्रमित हो गई. हालांकि वो इससे अनजान थी. इस बीच वो पहले अपने व्वॉयफ्रेंड से मिली और फिर अपने परिवार वालों से. जिससे वो सब संक्रमित होते चले गए. यहां तक कि ब्वॉयफ्रेंड के घर वाले भी इसकी चपेट में आ गए. और इस तरह बढ़ते-बढ़ते ये खतरनाक वायरस वुहान की फिश मार्केट तक पहुंच गया. जिसके बाद ये वायरस वुहान में पूरी तेजी से फैलने लगा.

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इससे पहले ये दावा किया गया था कि वुहान में कोरोना की पहली शिकार होने वाली 57 साल की वेई गुइजियान नाम की महिला थी. जो वहीं की सी फूड मार्केट में झींगा बेचने का काम करती है. और वहां से महज 500 मीटर की दूरी पर ही उसका घर भी था. बताया गया कि इसी महिला में पहली बार फ्लू के लक्षण देखे गए थे. कोरोना संक्रमित होने के बाद वेई का पहले अस्पताल में इलाज किया गया. फिर क्वारनटीन की मियाद पूरी होने और उसकी तबियत ठीक होने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया. पहले ये कहा गया कि वेई ठीक होने के बाद फिर से काम पर लौट आई है. मगर अब खबर आ रही है कि कोरोना की इस पेशेंट जीरो की खबर बाहर आने के बाद से ही उसका कुछ पता नहीं चल रहा है कि वो कहां है.

उधर, कोरोना वायरस के फैलने के मामले में चीन ने अपनी गर्दन फंसती देख ये कहते हुए गेंद विश्व स्वास्थ संगठन के पाले में डाल दिया कि वो कोरोना से जुड़ी तमाम जानकारियां देकर अपना फर्ज निभा चुका है. साथ ही वो ये भी बता चुका है कि ये वायरस किसी लैब में तैयार नहीं हुआ है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका WHO पर चीन को बचाने और कोरोना को लेकर गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है. बहरहाल, अमेरिका और चीन की वर्चस्व की इस लड़ाई में WHO की हालत फुटबाल जैसी हो गई है.

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