जुर्म की दुनिया में कई ऐसे नाम सामने आते हैं, जो अपने वहशीपन के लिए जाने जाते हैं. वो दरिंदगी की सारी हदों को पार कर कुछ इस तरह से वारदातों को अंजाम देते हैं कि जो भी देखे या सुने उसका दिल खौफ से भर जाए. उसका दिमाग दहशत के अंधेरे में गुम हो जाए. उनकी वहशी करतूतें किसी शैतान से कम नहीं होती. ऐसा ही एक नाम है सीरियल किलर राजा कोलंदर का.
उसका नाम इन दिनों सुर्खियों में इसलिए है कि उसकी करतूतों को उजागर करती एक डाक्यूमेंट्री हाल ही में Netflix पर स्ट्रीम हो रही है. जिसका नाम 'इंडियन प्रिडेटर: द डायरी ऑफ अ सीरियल किलर' है. जिसका निर्माण India Today Original ने किया है. इसमें निर्देशन और स्क्रिप्ट का शानदार गठजोड़ देखने को मिलता है. इंडिया टुडे ग्रुप की इस डाक्यूमेंट्री को देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. आज क्राइम कथा में पेश है कहानी उसी खौफनाक सीरियल किलर की.
14 दिसम्बर 2000, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
इलाहाबाद के शंकरगढ़ कस्बे में रहने वाले पत्रकार धीरेंद्र सिंह दैनिक समाचार पत्र आज में काम करते थे. उन्होंने अपने काम से अपनी अलग पहचान बनाई थी. उस दिन भी वो अपने काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन फिर कभी लौटकर वापस नहीं आए. उनके परिजनों ने उन्हें सभी जगह तलाश किया. उनके बारे में पड़ोस से लेकर दफ्तर तक और दोस्तों से लेकर रिश्तेदारों तक पूछताछ की, लेकिन धीरेंद्र का कुछ अता नहीं चला. मामला पुलिस तक जा पहुंचा. पुलिस ने बिना देर किए थाना कीडगंज में पत्रकार की गुमशुदगी दर्ज कर ली और धीरेंद्र की तलाश शुरु कर दी. लेकिन पुलिस को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ये तलाश लंबी होने वाली है.
राम निरंजन कोल की गिरफ्तारी
इस दौरान पुलिस ने जब परिवार से पूछा कि क्या धीरेंद्र की किसी से कोई रंजिश या दुश्मनी थी? तो परिजनों ने सीधे तो किसी पर आरोप नहीं लगाया. मगर इस बीच धीरेंद्र के घरवालों ने पुरानी रंजिश के चलते राम निरंजन कोल नाम के एक शख्स पर शक होने की बात कही. इसी शक की बिनाह पर पुलिस ने पत्रकार धीरेंद्र के गुम हो जाने के करीब एक हफ्ते बाद राम निरंजन कोल और उसके साले वक्षराज को गिरफ्तार कर लिया था.
कौन है राम निरंजन कोल
दरअसल, राम निरंजन कोल का नाम ही राजा कोलंदर है. वह शंकरगढ़ इलाके का रहने वाला है. 90 के दौर में राजा कोलंदर नैनी में मौजूद सीओडी छिवकी में कर्मचारी था. उसकी पत्नी फूलन देवी उन दिनों इलाहाबाद जिला पंचायत की सदस्य थी. राजा कोलंदर ने 90 के दशक में ही जुर्म की राह पकड़ी थी. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक साल 1998 में थाना धूमनगंज क्षेत्र के मुंडेरा मुहल्ले में टीवी-वीसीआर किराए पर चलाने वाले एक युवक का मर्डर हुआ था. जिसमें राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर का नाम आया था. इसके बाद वो फरार हो गया था. साल 2000 में भी उसने ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया और पुलिस का सिरदर्द बन गया. अपनी काली करतूतों से उसने इलाके में दहशत पैदा कर दी थी.
ऐसे पड़ा राजा कोलंदर नाम
जरायम की दुनिया में राम निरंजन कोल का नाम बड़ा होता जा रहा था. वह आदिवासी कोल समाज से आता है. लिहाजा, उसका रौब और दहशत देखकर उसकी जाति-बिरादरी के लोग उसे कोल जाति का राजा मानने लगे. तभी उसका नाम राम निरंजन कोल की बजाय राजा कोलंदर हो गया. पुलिस की फाइल हो या आम लोग, सभी उसे राजा कोलंदर के नाम से जानने लगे थे. धीरे-धीरे उसका यही नाम जुर्म की दुनिया में भी आम हो गया. कम ही लोग उसके असली नाम से वाकिफ थे.
यूं खुला धीरेंद्र सिंह की हत्या का राज
पत्रकार धीरेंद्र को गुमशुदा हुए करीब 8 दिन बीत चुके थे. उनके परिवार वाले पुलिस के सामने किसी अनहोनी की आशंका पहले ही जता चुके थे. अब राजा कोलंदर पुलिस की गिरफ्त में था. पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की. पहले वह पुलिस को बरगलाता रहा. लेकिन बाद में उसने पुलिस के सामने जो कहानी बयां की उसे सुनकर पुलिसवाले भी खौफजदा हो गए. हकीकत ये थी कि 14 दिसम्बर 2000 को ही पत्रकार धीरेंद्र सिंह का कत्ल हो चुका था.
पत्रकार धीरेंद्र सिंह के कत्ल की वजह
अब पुलिस के सामने वो राज खुलने जा रहा था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. राम निरंजन कोल उर्फ राजा कोलंदर के बयान दर्ज किए जा रहे थे. वो बोलता जा रहा था, पुलिसवाले खामोशी से सुनते जा रहे थे. इस कत्ल की पटकथा 1998 में ही लिखी गई थी. जब एक मामले में पत्रकार धीरेंद्र सिंह के भाई ने राजा कोलंदर को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. तभी से राजा कोलंदर धीरेंद्र सिंह के परिवार से दुश्मनी रखने लगा था. उसे पता था कि पत्रकार होने के नाते धीरेंद्र की पुलिस में खासी इज्जत थी. उसके खिलाफ दर्ज हुए मामले में भी उसका हाथ था. लिहाजा वो उससे रंजिश में बदला लेना चाहता था. कुछ जानकारों के मुताबिक पत्रकार धीरेंद्र सिंह को राजा कोलंदर की कुछ काली करतूतों के बारे में पता चल गया था. इस वजह से भी वो धीरेंद्र को अपना दुश्मन मानता था.
गोली मारकर किया था धीरेंद्र का मर्डर
राम निरंजन कोल उर्फ राजा कोलंदर ने पुलिस को बताया कि वारदात के दिन उसने पत्रकार धीरेंद्र सिंह को विश्वास में लेकर अपने पिपरी फार्म हाउस पर बुलाया था. जब धीरेंद्र सिंह वहां पहुंचे तो दिन ढल चुका था. सर्दियों का मौसम था. जब धीरेंद्र सिंह अपनी मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे तो राजा कोलंदर और उसका साला वक्षराज वहां अलाव जलाकर वहीं बैठे थे. उन दोनों ने धीरेंद्र सिंह को भी आग के सामने बैठ जाने को कहा. जब धीरेंद्र भी अलाव के पास बैठ गए तभी उनकी पीठ पर वक्षराज ने गोली मार दी. मौके पर ही धीरेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया.
ऐसे किए थे लाश के टुकड़े
राजा कोलंदर और उसका साला वक्षराज लाश को ठिकाने लगाने की तैयारी पहले ही कर चुके थे. उन दोनों ने धीरेंद्र की लाश को टाटा सूमों कार में डाला और मध्य प्रदेश की सीमा में दाखिल हो गए. जहां उन दोनों ने पहले धीरेंद्र का सिर और लिंग उसके जिस्म से काटकर अलग किया. फिर लिंग और धड़ को वहीं खेत में दफना दिया. जबकि उसका सिर एक पन्नी में लपेटकर रीवा के बाणसागर तालाब में फेंक दिया. उसके कपड़े उन्होंने एक झाड़ी में फेंक दिए थे. इसके बाद दोनों वहां से निकलकर वापस फार्म हाउस पर आ गए.
बांट दिया था धीरेंद्र का सामान
राजा कोलंदर ने पुलिस को बताया कि उसने पत्रकार धीरेंद्र सिंह की लाश को ठिकाने लगाने के बाद उनकी मोटरसाइकिल बनारस में रहने वाले अपने समधी दशरथलाल को दी थी. जबकि धीरेंद्र के जूते वक्षराज ने रख लिए थे. अब बाकी था धीरेंद्र का मोबाइल फोन, जो खुद राजा कोलंदर ने अपने पास रख लिया था. अब पुलिस को आला-ए-कत्ल यानी वो हथियार बरामद करना था, जिससे धीरेंद्र सिंह का कत्ल हुआ था. और वो सारा सामान जो कत्ल के बाद राजा कोलंदर ने ठिकाने लगाया था.
ऐसे हाथ लगी थी राजा कोलंदर की डायरी
पुलिस जब जांच के दौरान राजा कोलंदर और जिला पंचायत सदस्य फूलन देवी के घर पहुंची तो वहां से धीरेंद्र सिंह का सामान बरामद हो गया. इसी तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ वो डायरी भी लगी, जो आगे पुलिस के लिए एक बड़ा राजफाश करने वाली थी. पुलिस के अधिकारियों ने जब राजा कोलंदर की उस डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए तो उनके होश फाख्ता हो गए. उस डायरी में कत्ल और दरिंदगी की ऐसी दास्तान लिखी थी कि हर कोई सुनकर हैरान परेशान था. कोई यकीन नहीं कर पा रहा था कि जिसे लोग आम मुजरिम समझते थे, वो असल में एक वहशी आदमखोर दरिंदा है.
खोपड़ी से भेजा निकाल कर बनाता था सूप
धीरेंद्र सिंह हत्याकांड की जांच में जुटी थाना कीडगंज पुलिस को डायरी से एक नहीं दो नहीं बल्कि कई लोगों के कत्ल की कहानी मिली, जो साबित कर रही थी कि राजा कोलंदर कितना बड़ा आदमखोर और खूनी है. पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया था. अब ये मामला केवल एक पत्रकार के कत्ल का नहीं रह गया था, बल्कि पुलिस के सामने एक सीरियल किलर था, जो लोगों का खून करके उनके जिस्म के टुकड़े-टुकड़े कर देता था. फिर मरने वाले की खोपड़ी से भेजा या जिस्म से दूसरे अंग निकाल कर उसे उबालता था और सूप बनाकर पी जाता था. उसका मानना था कि इस सूप से उसका दिमाग तेज होगा और उसे अपार शक्ति मिलेगी.
सामने आई 14 लोगों के कत्ल की खौफनाक कहानी
सच सामने आने लगा तो पुलिस के हाथ पाव भी फूलने लगे. पुलिस ने राजा कोलंदर की निशानदेही पर अशोक कुमार, मुइन, संतोष और कालीप्रसाद के नरमुंड बरामद किए तो डायरी में लिखी सारी कहानी सच हो गई. पूछताछ में पता चला कि आदमखोर राजा कोलंदर ने कुल मिलाकर 14 लोगों का कत्ल किया. वह जरा-जरा सी बात पर लोगों का खून कर देता था. फिर उनकी खोपड़ी से भेजा निकाल उबालता और सूप बनाकर पी जाता था. वो लाश को अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर जंगल या दूर दराज के सुनसान इलाकों में फेंक दिया करता था. पुलिस उन सभी मामलों की तहकीकात करती रही.
कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
आदमखोर राजा कोलंदर अब पुलिस की हिरासत में था. मामला अदालत में जा पहुंचा था. जहां इस मामले की सुनवाई करीब 11 साल तक चलती रही. 1 दिसंबर 2012 को इलाहाबाद के अपर सत्र न्यायाधीश मेहताब अहमद ने राम निरंजन कोल उर्फ राजा कोलंदर और उसके साले वक्षराज को मुल्जिम करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही दोनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. वहां से मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, लेकिन राजा कोलंदर को राहत नहीं मिली. तभी से आदमखोर वहशी दरिंदा राजा कोलंदर जेल में सजा काट रहा है.
सीरियल किलर की डायरी
जुर्म की दुनिया में इस सीरियल किलर राजा कोलंदर का नाम हमेशा उसके वहशीपन और दरिंदगी के लिए याद रखा जाएगा. और याद रखी जाएगी उसकी वो डायरी जिसने इस खूनी दरिंदे के गुनाहों का एक एक लम्हा कानून के सामने उजागर कर दिया. उस डायरी में दास्तान-ए-गुनाह इस कातिल ने खुद लिखी थी. जो अब जेल की काल कोठरी में अपने दिन गिन रहा है.
परवेज़ सागर