थम नहीं रहा कोरोना का कहर, भारत में हर एक लाख की आबादी पर इतने केस

भारत ने पहले से ज्यादा रियायतों के साथ लॉकडाउन 4.0 में प्रवेश कर लिया है. ताकि इससे अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिले.

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सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2020,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

  • देश में कोरोना मरीजों की संख्या एक लाख के पार
  • भारत में हर एक लाख आबादी पर 7 कोरोना केस

देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है. हर रोज कोरोना वायरस के नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि हो रही है. वहीं अब देश में कोरोना वायरस के कारण एक लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. वहीं कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन लागू है. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह तक देश में कोरोना के कुल केस की संख्या एक लाख 1 हजार 139 हो गई है.

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भारत ने पहले से ज्यादा रियायतों के साथ लॉकडाउन 4.0 में प्रवेश कर लिया है. ताकि इससे अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिले. अब लगातार ये भी कहा जा रहा है कि लोगों को वायरस के साथ ही रहना सीखना होगा. तो सवाल ये है कि हमारे बीच वायरस कितना फैल चुका है?

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दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में टेस्ट किए गए हर 1,000 लोगों में 1 से लेकर 6 लोग पॉजिटिव निकले हैं. इनमें स्पेन और अमेरिका में कोरोना पॉजिटिव निकलने वालों की दर ज्यादा है. दुनिया में कम से कम 10,000 केस वाले 46 देशों में भारत शामिल है.

लेकिन भारत उन देशों में है, जहां कोरोना के फैलने के आंकड़े दूसरों के मुकाबले कम हैं. इन 46 देशों में सिर्फ चीन और इंडोनेशिया ही ऐसे हैं जहां कोरोना फैलने की दर भारत से कम है.

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एक लाख की आबादी पर मामले

भारत की हर एक लाख की आबादी पर सात कोरोना मामले रिपोर्ट किए गए हैं. वहीं चीन और इडोनेशिया में ये संख्या 6 है. जबकि स्पेन में हर एक लाख की आबादी पर 591 केस दर्ज हुए हैं. और अमेरिका में ये आंकड़ा 456 है. भारत में केस की संख्या कम होने की कई वजहें हो सकती हैं.

भारत ने कितनी आबादी का किया टेस्ट?

इनमें से एक वजह ये हो सकती है कि यहां नियंत्रण के उपाय बेहतर हैं और दूसरी वजह ये भी हो सकती है कि भारत में टेस्टिंग रेट कम है. भारत ने अपनी आबादी के अनुपात में बहुत कम टेस्ट किए हैं. दुनिया में सिर्फ चार देश यानी मेक्सिको, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और मिस्र ही ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी आबादी के अनुपात में भारत की तुलना में कम टेस्ट किए. भारत ने अपनी सिर्फ 0.15 फीसदी आबादी का ही टेस्ट किया है.

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