जावेद अख्तर समेत 375 हस्तियों ने लगाई सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की गुहार

देश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जावेद अख्तर समेत कई नामचीन हस्तियों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की गुहार लगाते हुए कहा कि इन्हें अपराधी नहीं ठहराया गया है. और न ही वे देश से भागने या फिर कानून से बचने की कोई योजना बना रहे हैं. हम मांग करते हैं कि उन्हें मानवीय आधार पर तुरंत जमानत दी जाए.

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कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग उठी (फाइल फोटो) कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग उठी (फाइल फोटो)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 16 जून 2020,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

  • जावेद अख्तर, अनुराग कश्यप समेत कई का अनुरोध
  • कोरोना महामारी को देखते हुए रिहाई की मांग की गई
  • अरुण फरेरा और सुधा भारद्वाज समेत कई हैं जेल में
देशभर में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जावेद अख्तर, नसीरुद्दीन शाह और अनुराग कश्यप समेत 375 से अधिक प्रख्यात हस्तियों ने करीब एक दर्जन सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की है. इन हस्तियों ने भारत सरकार से सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए अनुरोध किया कि कोरोना संकट को देखते हुए देश में वर्तमान में जिस तरह के हालात हैं, उसके आधार पर राजनीतिक कैदियों को तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए.

सामाजिक कार्यकर्ता वरवारा राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुम्बडे, गौतम नवलखा, वर्नोन गोंसाल्वेज, शोमा सेन, अरुण फरेरा, सुरेंद्र गडलिंग, महेंद्र राउत, सुधीर धवले और रोना विल्सन समेत कई अन्य लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इन हस्तियों की तत्काल रिहाई की मांग की गई.

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कार्यकर्ता अपराधी घोषित नहीं

375 से अधिक हस्तियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन कार्यकर्ताओं में से कई प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और कवियों ने, दशकों से भारत के गरीब और हाशिए पर रह रहे लोगों के कल्याण के लिए काम किया है. फिर भी उन्हें राजनीतिक कैदियों में बदल दिया गया और उन्हें कैद कर लिया गया.

बयान में आगे कहा गया है कि महाराष्ट्र के कुछ कैदियों की कोरोना से मौत और कई अन्य के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है.

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बयान में यह भी कहा गया कि इन कार्यकर्ताओं को अपराधी नहीं ठहराया गया है. और न ही वे देश से भागने या फिर कानून से बचने की कोई योजना बना रहे हैं. हम मांग करते हैं कि उन्हें मानवीय आधार पर तुरंत जमानत दी जाए क्योंकि देशभर में कोरोना महामारी फैलने पर उनके जीवन को खतरा है.

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नसीरुद्दीन और प्रकाश राज भी शामिल

सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग वाले बयान में अदूर गोपालकृष्णन, अमोल पालेकर, सौमित्र चटर्जी, नसीरुद्दीन शाह, नंदिता दास, रत्ना पाठक शाह, प्रकाश राज, टीएम कृष्णा, अपर्णा सेन, नयनतारा सहगल, अमिताव घोष, अरुंधति रॉय, मल्लिका साराभाई, जावेद अख्तर, शबाना आजमी, अनुराग कश्यप, रोमिला थापर, इंदिरा जयसिंह, हर्ष मांढेर और अरुणा रॉय ने हस्ताक्षर किए हैं. हिरासत में लिए गए 80 वर्षीय वरवारा राव इस समय गंभीर रूप से बीमार हैं.

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जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी की छात्र सफूरा जगर, जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध करने के लिए हिरासत में ले लिया गया था. बयान में कहा गया कि यह चौंकाने वाला है कि जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी की छात्रा सफूरा जगर जो गर्भवती हैं को सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था, उन्हें जमानत भी नहीं दी जा रही. इससे न सिर्फ उनके बल्कि अजन्मे बच्चे की जान को भी खतरा है.

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