उधार लेने और देने का रिवाज दुनियाभर में सदियों से चला आ रहा है. आधुनिक समय में भी बैंकों की तो कमाई का मुख्य जरिया ही उधार का कारोबार है यानी लोगों को लोन देना और फिर उसपर ब्याज लेकर कमाई करना. लेकिन आम लोगों के बीच ये कर्ज का लेन देन किस तरह का है.
दरअसल, इसका दिलचस्प खुलासा सांख्यिकी मंत्रालय के मॉड्यूलर सर्वे से हुआ है, इसमें कहा गया है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष उधार लेनदेन में काफी आगे हैं. इसमें अलग-अलग राज्यों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लेनदेन के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिनके मुताबिक उत्तर प्रदेश की ज्यादातर महिलाएं उधार पर विश्वास कम करती हैं, ये ना उधार देती हैं और ना ही उधार लेती हैं.
'मनी मैनेजमेंट' में यूपी की महिलाएं आगे
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी की महिलाओं का 'मनी मैनेजमेंट' देश के सभी बड़े राज्यों के मुकाबले सबसे अच्छा है. कुल मिलाकर इन्हें खर्च और बचत के मामले में बेजोड़ कहा गया है.
अपने इस हुनर की वजह से यहां की महिलाएं उधार लेने से बचती हैं. आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली प्रति एक लाख महिलाओं में केवल 3049 यानी 3 फीसदी ने ही उधार लेनदेन किया है, जबकि 21 फीसदी पुरुषों ने उधार लिया है.
उधार लेने में महिलाओं के मुकाबले पुरुष आगे
वहीं शहरी क्षेत्रों की महिलाएं तो इनसे भी ज्यादा जागरूक हैं और उनकी प्रति लाख संख्या केवल 2088 यानी 2 परसेंट है और पुरुषों का आंकड़ा 18 फीसदी है. इससे जाहिर होता है कि ज्यादातर महिलाएं अपनी बचत और खर्चों में कटौती से जरूरतों को पूरा कर लेती हैं. जिन महिलाओं ने उधार लिया भी है उन्हें ये शादी-बीमारी और शिक्षा जैसी जरुरतों के लिए मजबूर में लेना पड़ा है.
अगर उधार लेने की इस आदत की तुलना दूसरे राज्यों से करें तो दक्षिण के राज्य इसमें बहुत आगे हैं. आंकड़ों के मुताबिक आंध्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 60 फीसदी पुरुष और 65 फीसदी महिलाओं ने उधार लिया. कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब 48 फीसदी पुरुष और 27 फीसदी महिलाओं ने उधार लिया.
इसके अलावा जिन राज्यों में पुरुषों के उधार का ट्रेंड ज्यादा है उनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार शामिल हैं. इन राज्यों में पुरुषों के उधार लेने की तादाद डबल डिजिट में है जबकि महिलाओं का हिस्सा 10 परसेंट से कम है.
आदित्य के. राणा