भूखे बच्चों को रेस्टोरेंट में खाना ख‍िलाया, लेकिन जब बिल देखा तो चौंक गया

कहावत है 'कर भला तो हो भला', लेकिन यह कहावत कई बार हकीकत में भी बदल जाती है. अच्छाई पर भरोसा बनाए रखने के लिए हमें कुछ किस्सों की जरूरत होती है.पढ़िए एक ऐसा ही किस्सा. हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताते हैं जिसका नाम गुप्त रखा गया है. यह पूरी घटना मलयालम में फेसबुक पर राइट थिंकर्स नाम के ग्रुप पर पोस्ट की गई थी. इसे अब तक दो हजार से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है.

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आदर्श शुक्ला

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 12:01 AM IST

कहावत है 'कर भला तो हो भला', लेकिन यह कहावत कई बार हकीकत में भी बदल जाती है. अच्छाई पर भरोसा बनाए रखने के लिए हमें कुछ किस्सों की जरूरत होती है. पढ़िए एक ऐसा ही किस्सा. हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताते हैं जिसका नाम गुप्त रखा गया है. यह पूरी घटना मलयालम में फेसबुक पर राइट थिंकर्स नाम के ग्रुप पर पोस्ट की गई थी. इसे अब तक दो हजार से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है.

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केरल के मल्लापुरम का एक शख्स दिन भर दफ्तर की मीटिंग निपटाने के बाद डिनर के लिए एक छोटे से होटल में दाखिल होता है. खाना ऑर्डर करता है. इसी दौरान जब खाना परोसा जा रहा था तब वह देखता है कि दरवाजे के पीछे दो आंखें बेबसी से खाने के टेबल की तरफ देख रही हैं. वह एक छोटा बच्चा था. राह चलते भीख मांगने वाले बच्चे देखे ही होंगे आपने, बिल्कुल वैसा ही. इस शख्स ने उस बच्चे को आवाज दी, उसे अंदर बुलाया. उसने बच्चे से पूछा कि उसे क्या चाहिए. बच्चे ने टेबल की तरफ इशारा किया. इस शख्स ने एक और प्लेट का ऑर्डर कर दिया.

खाने का ऑर्डर होते ही बच्चे ने बाहर खड़ी अपनी बहन को भी अंदर बुला लिया. जब खाना आया तो भूखा बच्चा उसकी तरफ बढ़ा लेकिन उसकी बहन ने उसे हाथ धोने का इशारा किया. इसके बाद दोनों बच्चों ने चुपचाप खाना खाया, हाथ धोया और चले गए. जिस शख्स ने खाना ऑर्डर किया था उसने अभी तक डिनर शुरू भी नहीं किया था. बहरहाल खाने के बाद जब उसने बिल मंगाया तो उसकी आंखें भर आईं . बिल पर अमाउंट नहीं लिखा था बल्कि एक टिप्पणी लिखी हुई थी. 'हमारे पास कोई ऐसी मशीन नहीं जो इंसानियत का बिल बताती हो'

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