भारतीय मजदूर संघ का दावा- राष्ट्रपति ने रद्द किए यूपी, एमपी, गुजरात के श्रम कानून अध्यादेश

इन अध्यादेशों के द्वारा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात सरकारों ने श्रमिक हितों वाले कई कानूनों को निलंबित कर दिया था. लॉकडाउन की वजह से इंडस्ट्री की खराब हालत को देखते हुए तीनों राज्य सरकारों ने कई श्रम कानूनों को निलंबित करने का प्रस्ताव किया और इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा.

Advertisement
कई राज्यों ने लाए हैं काम के घंटे बढ़ाने जैसे बदलाव वाले वाले अध्यादेश कई राज्यों ने लाए हैं काम के घंटे बढ़ाने जैसे बदलाव वाले वाले अध्यादेश

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

  • कई राज्यों ने लाए श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेश
  • इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था
  • BMS ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया है

RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने दावा किया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में श्रम कानूनों में बदलाव वाले अध्यादेशों को रद्द कर दिया है. इन अध्यादेशों के द्वारा तीनों सरकारों ने श्रमिक हितों वाले कई कानूनों को निलंबित कर दिया था.

Advertisement

हालांकि श्रम मंत्रालय ने अभी इस खबर की पुष्टि नहीं की है. गौरतलब है ​कि श्रम कानून संविधान की समवर्ती सूची का हिस्सा है. यानी इसके बारे में राज्य नए कानून तो बना सकते हैं या उसमें बदलाव कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति से अनुमोदन लेना पड़ता है.

इसे भी पढ़ें: 53 दवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, मोदी सरकार ने बनाया प्लान

कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन की वजह से इंडस्ट्री की खराब हालत को देखते हुए तीनों राज्य सरकारों ने कई श्रम कानूनों को निलंबित करने का प्रस्ताव किया और इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा.

क्या कहा मजदूर संघ ने

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ के क्षेत्रीय मंत्री पवन कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश सरकार ने अध्यादेश के रूप में ऐसे प्रस्ताव लाए थे कि इन राज्यों की ज्यादातर श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया जाए. लेकिन राष्ट्रपति ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया है. हम केंद्र सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हैं.'

Advertisement

गुरुवार को भारतीय मजदूर संघ का 66वां स्थापना दिवस था. इस अवसर पर पवन कुमार ने बताया कि उनका संगठन अब भी 24 जुलाई से 30 जुलाई तक चलने वाले 'सरकार जगाओ सप्ताह' कार्यक्रम जारी रखेगा. इस दौरान संगठन सरकार से यह मांग करेगा कि लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए लोगों को नौकरी और वेतन देना सुनिश्चित किया जाए, काम के घंटे 8 से 12 कर देने के राज्य सरकारों के आदेश को तत्काल वापस लिया जाए, रेलवे और डिफेंस के निजीकरण को तत्काल रोका जाए.

इसके तहत पहले दिन यानी आज गुरुवार को संगठन से जुड़े कामगार सड़कों पर मार्च निकालेंगे. वे ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में लागू सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करेंगे.

इसे भी पढ़ें: क्या वाकई शराब पर निर्भर है राज्यों की इकोनॉमी? जानें कितनी होती है कमाई?

कुमार ने कहा कि 17 राज्यों ने श्रम कानूनों का नरम बनाकर काम के घंटे बढ़ा दिए हैं, इस बहाने कि कंपनियां लॉकडाउन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उत्पादन बढ़ाना चाहती हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement