पंजाब नेशनल बैंक में हुए महाघोटाले के बाद आम आदमी के पैसे को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. जहां कुछ लोग बैंक में रखे अपने पैसे की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं, वहीं कुछ अपने बैंक अधिकारों के बारे में जानना चाहते हैं. ऐसे मौके पर हम आपको आपके बैंक से जुड़े 10 अधिकारों के बारे में बता रहे हैं.
द बैंकिंग कोड्स एंड स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया (बीएसबीआई) की तरफ से 'कोड ऑफ बैंक्स कमिटमेंट टू कस्टमर्स (सीबीसीसी)' में एक खाताधारक के अधिकारों को विस्तार से बताया गया है. कोई भी बैंक आपको इन अधिकारों को देने से इनकार नहीं कर सकता है.
चेक कलेक्शन में देरी :
अगर बैंक की तरफ से चेक कलेक्शन में देरी होती है, तो उसे इस देरी के लिए आपको मुआवजा देना होगा. सीबीसीसी के मुताबिक बैंक को यह कार्यवाही अपने स्तर पर खुद ही करनी होगी. बैंक इसके लिए आपके क्लेम करने का इंतजार नहीं करेगा.
देने होंगे नए नोट :
अगर आप किसी भी बैंक में फटे और पुराने नोट बदलने के लिए पहुंचते हैं, तो बैंक आपको इनकार नहीं कर सकता. बैंक आपको पुराने और फटे हुए नोट के बदले नए और अच्छी क्वालिटी वाले नोट देंगे.
ECS में देरी पर मुआवजा:
आपकी तरफ से दिए गए इलेक्ट्रोनिक क्लियरिंग
सर्विस (ईसीएस) इंस्ट्रक्शंस में अगर बैंक की तरफ से किसी भी तरह की देरी
होती है, तो आपको इस पर मुआवजा मिलेगा. सीबीसीसी के अनुसार अगर ईसीएस में
बैंक की तरफ से देरी से आपका वित्तीय नुकसान होता है, तो
बैंक को मुआवजा नीति के तहत मुआवजा देना होगा. हालांकि खाते में
बैलेंस न होने पर अगर ईसीएस फेल होता है, तो उसके लिए आपको फाइन भरना
पड़ेगा.
टर्म डिपोजिट्स खुद नहीं कर सकते रिन्यू :
जब भी आप किसी बैंक के साथ टर्म डिपोजिट्स खोलते हैं, तो बैंक आप से मैच्योरिटी इंस्ट्रक्शंस लेता है. अगर आपने नहीं दिए तो मैच्योरिटी की तारीख आने से कुछ समय पहले ही बैंक आपको इसकी सूचना देगा. अगर आप इसके बाद भी कोई इंस्ट्रक्शन बैंक को नहीं देते, तो ही टर्म डिपोजिट्स रिन्यू की जाएगी.
कभी भी विद्ड्रॉअल का है अधिकार :
अगर आप किसी भी टर्म डिपोजिट को मैच्योरिटी से पहले विद्ड्रॉ करना चाहते हैं, तो कोई भी बैंक आपको ऐसा करने से नहीं रोक सकता. आप जब चाहें, तब अपनी टर्म डिपोजिट को विद्ड्रॉ कर सकते हैं.
ड्यूज नहीं भर पाए, तो ये है रास्ता :
आप किसी वजह से अगर बैंक लोन और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर नहीं भर पा रहे हैं, तो सेटलमेंट का एक रास्ता बचता है. बैंक को यदि आप ड्यू डेट से कुछ समय पहले ही बता देते हैं कि आप ड्यूज नहीं भर पाएंगे, तो बैंक आपकी तरफ से दी गई वजहों की जांच करेगा. जांच से संतुष्ट होने के बाद बैंक आपको 'वन टाइम सेटलमेंट' का ऑप्शन देगा और इसके नियम व शर्तें भी आपको बताई जाएंगी.
मिलेगा दुगुना मुआवजा :
बैंक अगर आप से बिना पूछे आपको सौंपे क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड को एक्टिवेट कर देता है और आपकी मर्जी के बिना उससे खर्च हो जाता है, तो बैंक आपको डबल मुआवजा देगा. सीबीसीसी के अनुसार ऐसी स्थिति में बैंक न सिर्फ आपको जो खर्च हुआ, वह पैसे लौटाएगा. बल्कि जितना खर्च हुआ, उसका दुगुना मुआवजे के तौर पर आपको देगा.
लोन रिजेक्ट करने का देना होगा कारण:
कोई भी बैंक अगर आपकी लोन एप्लिकेशन अस्वीकार करता है, तो उसे इसकी वजह भी बतानी होगी. ऐसा न होने पर आप इसकी शिकायत कर सकते हैं, जिसकी बदौलत संबंधित अधिकारी के खिलाफ बैंक एक्शन ले सकता है.
15 दिन के भीतर सेटल करना होगा क्लेम :
किसी खाताधारक की अगर मृत्यु हो जाती है और उसका कोई नॉमिनी नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में बैंक उसके खाते में पड़े पैसे को दबा नहीं सकता. बैंक इस स्थिति में मृतक के कानूनी वारिस को बैंक में पड़े डिपोजिट्स और पैसों को सुपुर्द करेगा. खाताधारक की मृत्यु होने पर जरूरी दस्तावेज जमा होने के 15 दिन के भीतर बैंक को खाते से जुड़े क्लेम सेटल करना होगा. इसमें देरी होने पर मृतक का कानूनी वारिस बैंक से इसकी शिकायत कर सकता है.