चीन के दबाव में वर्ल्ड बैंक ने रोकी डूइंग बिजनेस रिपोर्ट! खुलासे से सभी हैरान 

World Bank Ease of Doing Business: स्वतंत्र जांच में यह खुलासा हुआ है कि वर्ल्ड बैंक की ओर से 2018 की रिपोर्ट तैयार करने में चीन के दबाव के चलते हेरफेर की गई थी. ऐसी रिपोर्ट आने से दुनिया भर के देश हैरान हैं और विश्व बैंक की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं.

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वर्ल्ड बैंक ने रोक दी अहम रिपोर्ट (फाइल फोटो) वर्ल्ड बैंक ने रोक दी अहम रिपोर्ट (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 17 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST
  • चीन ने बनाया था वर्ल्ड बैंक पर दबाव
  • इस वजह से रोकनी पड़ी रिपोर्ट

दुनिया भर में कारोबारी सुगमता के लिए पैमाना माने जाने वाली World Bank की Ease of Doing Business रिपोर्ट जारी करने का सिलसिला रोक दिया गया है. इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं. एक स्वतंत्र जांच में यह खुलासा हुआ है कि वर्ल्ड बैंक की ओर से 2018 की रिपोर्ट तैयार करने में चीन के दबाव के चलते हेरफेर की गई थी. 

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ऐसी रिपोर्ट आने से दुनिया भर के देश हैरान हैं और विश्व बैंक की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक बैंक की एथिक्स कमिटी के कहने पर लॉ फर्म विल्मरहेल की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक पर चीन के दबाव को लेकर चिंता जताई गई है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की तत्कालीन चीफ एग्जीक्यूटिव क्रिस्टलीना जॉर्जिएवा को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं. 

आईएमएफ में भी दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाल रहीं क्रिस्टलीना ने स्टाफ पर दबाव बनाया था कि वे चीन की रैंकिंग को बेहतर दिखाएं. गुरुवार को जारी की गई जांच रिपोर्ट में ये खुलासे हुए हैं. आईएमएफ के तत्काली अध्यक्ष जिम योंग किम पर भी चीन का दबाव होने की बात कही गई है.

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हालांकि जॉर्जिएवा ने जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं और उन्होंने IMF के कार्यकारी बोर्ड के सामने अपना पक्ष रखा है. अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भी इन खुलासों को लेकर कहा है कि वह इसका अध्ययन करेगा. यदि ऐसा है तो यह गंभीर मसला है. 

विश्व बैंक ने स्वीकार की है अनियमितता 

वर्ल्ड बैंक ने चीन पर तो कुछ नहीं कहा है, लेकिन उसके बयान के मुताबिक इस कारोबार सुगमता रिपोर्ट को बंद करने की वजह डेटा की अनियमितता को लेकर उठाए गए सवाल हैं. आंतरिक जांच के दौरान  वर्ष 2018 और 2020 की रिपोर्ट में डेटा अनियमितता को लेकर सवाल खड़े हुए थे. 

वर्ल्ड बैंक की आंंतरिक रिकरिपोर्ट में कहा गया कि साल 2018 के लिए जो रिपोर्ट जारी की गई थी, उसमें चीन की पोजिशन 78वें पायदान पर दी गई थी, जबकि यह काफी नीचे 85वें स्थान पर होनी चाहिए थी. 

भारत की Ease of Doing Business रैकिंग

बीते कुछ सालों में Doing Business रिपोर्ट में भारत की रैकिंग सुधरी है. वर्ष 2020 में भारत की रैकिंग 63 रही. इसकी एक बड़ी वजह मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों को माना जाता है. वर्ष 2014 में जब वह प्रधानमंत्री बने थे तब इस रैंकिंग में भारत का स्थान 142 था. साल 2017 में ये 130 और 2018 में 77 हुआ. 

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