रोजगार बढ़ाने पर फोकस, बजट में MSME सेक्टर के लिए योजनाओं का खुलेगा पिटारा?

भारत की जीडीपी में MSME का करीब 30 परसेंट योगदान है. ऐसे में 2024-25 के पूर्ण बजट में इस सेक्टर पर खासा फोकस रह सकता है क्योंकि बेरोजगारी की चुनौती से निपटने में ये सेक्टर काफी मदद कर सकता है.

Advertisement
Budget 2024-25 Budget 2024-25

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

पूर्ण बजट से पहले हर सेक्टर अपनी डिमांड्स के पूरा होने की आस लगाए बैठा है. हाल के बरसों में जिस तरह से सरकार ने MSME सेक्टर के लिए योजनाओं की भरमार की है उससे अनुमान है कि इस बार के बजट में भी सरकार सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों के लिए कुछ सौगातों का एलान कर सकती है. इसकी एक बड़ी वजह इस सेक्टर का रोजगार मुहैया कराने में योगदान है.

Advertisement

दरअसल, भारत की जीडीपी में MSME का करीब 30 परसेंट योगदान है. नए जमाने में अब कई स्टार्टअप्स भी इसी सेक्टर का हिस्सा हैं. ऐसे में 2024-25 के पूर्ण बजट में इस सेक्टर पर खासा फोकस रह सकता है क्योंकि बेरोजगारी की चुनौती से निपटने में ये सेक्टर काफी मदद कर सकता है. इसके लिए सेक्टर से जुड़े लोग वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने हर माध्यम से अपनी डिमांड रख रहे हैं.

रोजगार बढ़ाने के लिए अतिरिक्त फंड

वैसे MSME सेक्टर के कारोबारियों के साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय भी वित्त मंत्री से कुछ दिन पहले ही अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग कर चुका है. इस फंड का इस्तेमाल मंत्रालय प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत आवेदनों के निपटारे के लिए करने की योजना है. PMEGP के तहत सरकार खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से स्वरोजगार के लिए रियायती दरों पर बैंक लोन मुहैया कराती है.

Advertisement

सरकार ने 2021-2026 के लिए PMEGP के तहत साढ़े 13 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया हुआ है. कोविड के बाद तमाम राहत और रियायतों के बावजूद MSME सेक्टर की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है. ऐसे में इस क्षेत्र की मांग है कि कैश फ्लो को बेहतर बनाने वाली किसी योजना को लाने का सरकार इंतजाम करे जिसमें स्टार्टअप्स की फंडिंग का मुद्दा काफी जरुरी है. 

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस

MSME सेक्टर चाहता है कि सरकार को इस सेगमेंट में भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर ज्यादा काम करना चाहिए. ईज ऑफ डूइंग के लिए बजट में सरकार एमएसएमई सेक्टर के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बना सकती है. इसके लिए आईटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में निवेश पर हुए खर्च में टैक्स राहत दी जा सकती है. इससे उन्हें भविष्य की एआई, सप्लाई चेन सिस्टम और सीआरएम जैसी तकनीक को अपनाने में आसानी होगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement