क्या है सौभाग्य योजना, बजट में इस बार किस प्रावधान की उम्मीद

इस योजना के तहत मोदी सरकार हर घर को रोशन करने के लक्ष्‍य पर काम कर रही है. योजना का मुख्य उद्देश्य घर-घर से अंधेरा दूर करना है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमति शाह (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमति शाह (फाइल फोटो)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2019,
  • अपडेटेड 4:43 PM IST

मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए 'सहज बिजली हर घर योजना' (सौभाग्य योजना) लॉन्च की थी. यह योजना विशेष रूप से गरीब परिवारों को बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है. मोदी सरकार अब दोबारा सत्ता में काबिज हो गई और 5 जुलाई को संसद में बजट पेश करेगी. ऐसे में उम्मीद की जा रही है सौभाग्य योजना को बढ़ावा देने के लिए बजट में सरकार कोई खास रणनीति लेकर आ सकती है.

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दरअसल, इस योजना के तहत मोदी सरकार हर घर रोशन करने के लक्ष्‍य पर काम कर रही है. योजना का मुख्य उद्देश्य घर-घर से अंधेरा दूर करना है. मार्च 2019 तक सरकार ने लक्ष्य का 99.93 फीसदी मुकाम हासिल कर लिया है. मोदी सरकार की इस योजना की गूंज चुनावी सभाओं में भी सुनाई दी. पिछले महीने हुए लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा में सौभाग्य योजना की सफलता का दावा करते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने 77 लाख घरों में इस योजना के तहत बिजली पहुंचाई है.

योजना का उद्देश्य

सौभाग्य योजना का पूरा नाम 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना' सौभाग्य है. जिनका नाम 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना में है, उन्हें मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलेगा. जिनका नाम नहीं है वह 500 रुपये देकर बिजली का कनेक्शन ले सकते हैं. ये 500 रुपये 10 किस्तों में भी दे सकते हैं. योजना के तहत जिस घर तक बिजली नहीं पहुंची, वहां के घरों को एक सोलर पैक मिलेगा.

उत्तर प्रदेश, ओडिशा, जम्मू कश्मीर, झारखंड, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के सभी गांव में बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से सौभाग्य योजना की शुरुआत 25 सितम्बर 2017 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर की गई थी.

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सरकार ने बिजली से वंचित देश के 4 करोड़ घर के हिसाब से सौभाग्य योजना के लिए 16300 करोड़ रुपये का बजट रखा है. सौभाग्य योजना के तहत सरकार मिट्टी के तेल का विकल्प बिजली को बनाएगी. हर घर तक बिजली पहुंचाने का 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि 10 फीसदी खर्च राज्य सरकारों को उठाना होगा और 30 फीसदी हिस्सा बैंकों से लोन के रूप में लिया जाएगा.

योजना का लाभ

सरकार की मानें तो हर घर में बिजली होने से रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल वगैरह की पहुंच सुधरेगी और इससे उन्हें सभी महत्वपूर्ण सूचना मिल पाएगी. किसानों को नई कृषि तकनीक, मशीनरी, गुणवत्तापूर्ण बीज, योजनाओं आदि के बारे में जानकारी मिल सकेगी जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और फलस्वरूप उनकी आय बढ़ेगी. किसान और युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने पर भी विचार कर सकते हैं. यही नहीं, सौभाग्य योजना से खासकर महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार होगा. अंधेरे में घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है.

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