सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा, किसानों को भी होगा बंपर फायदा! पीपीपी मॉडल पर बना देश का पहला एथेनॉल प्लांट तैयार

छत्तीसगढ़ में पीपीपी के जरिए तैयार देश का पहला एथेनॉल प्लांट बनकर तैयार हो गया है. यहां गन्ने के रस का इस्तेमाल करके एथेनॉल बनाया जाएगा. बता दें, अप्रैल महीने से इस प्लांट में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. इससे किसानों को भी फायदा मिलेगा. वहीं, पेट्रोल-डीजल भी सस्ता हो सकता है. आइए जानते हैं क्या होगा एथेनॉल का फायदा.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST

छत्तीसगढ़ में नया एथेनॉल प्लांट करीब-करीब तैयार हो चुका है. यह पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के जरिए तैयार देश का पहला एथेनॉल प्लांट होगा. अप्रैल महीने से इस प्लांट में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है.  कवर्धा जिले में भोरमदेव शक्कर कारखाने के बगल में इस प्लांट को स्थापित किया गया है. यहां गन्ने के रस का इस्तेमाल करके एथेनॉल बनाया जाएगा.  बता दें कि  2020 में सीएम भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने इस प्लांट की मंजूरी दी थी. इस प्लांट को लगाने के लिए युद्ध स्तर पर काम चला और अब यह उत्पादन के लिए तैयार है. एक अनुमान के मुताबिक, 80 किलोलीटर उत्पादन का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है, जिसे भविष्य में और भी बढ़ाने की योजना है. 

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क्या है एथेनॉल का फायदा?
दरसअल, एथेनॉल को पेट्रो पदार्थों यानी पेट्रोल और डीजल आदि में मिश्रण करने की मंजूरी मिली है. इससे काफी मात्रा में पेट्रो पदार्थों की बचत होगी. साथ ही एथेनॉल के अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण भविष्य में यह पेट्रो पदार्थों का विकल्प भी बन सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, एथेनॉल के उत्पादन से राज्य में पेट्रोल-डीजल के रेट में कमी आ सकती है. वहीं, एथेनॉल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन की उम्र भी बढ़ती है. इसके अलावा, एथेनॉल निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ के किसानों से ज्यादा से ज्यादा गन्ना खरीदना संभव हो सकेगा. यानी किसानों को फसल की ज्यादा और पूरी कीमत मिल पाएगी.

गन्ने की खरीद जारी 
भोरमदेव कारखाने में बड़ी तादाद में गन्ना पहुंचना शुरू हो चुका है. एक अनुमान के मुताबिक, रोज करीब पांच सौ ट्रैक्टर गन्ने की पर्चियां कट रही हैं. इनका रस शक्कर कारखाने से सटे 35 एकड़ में बने एथेनॉल प्लांट में जाएगा. बता दें कि कवर्धा जिले में 30 हजार हेक्टेयर में गन्ना लगाया जाता है. यहां 450 छोटी गुड़ फैक्ट्रियां हैं, जिनमें से 250 चालू हैं. इस प्लांट के पूरा होने के पूर्व गन्ने के बंद कारखानों को भी फिर से शुरू किया गया है. ऐसे में जाहिर है कि एथेनॉल का उत्पादन भविष्य में और बढ़ेगा.  

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गन्ने की खेती पर जोर 
एथेनॉल के उत्पादन के लिए सरकार की योजना है कि गन्ने की खेती वाले इलाकों के रकबों को बढ़ाया जाएगा. इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करने के लिए कृषि विभाग ने खाका भी तैयार कर लिया है. सिंचाई की व्यवस्था और गन्ने के खेती के लिए मुफीद मृदा का परीक्षण भी इसमें शामिल है. सरकार का जोर है कि किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए. इससे किसानों की सालाना आय तो बढ़ेगी ही, साथ ही पेट्रो पदार्थ के विकल्प एथेनॉल के उत्पादन का दायरा भी बढ़ेगा.

(श्रीप्रकाश तिवारी की रिपोर्ट)

 

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