Zero Budget Farming: खेती के लिए खुद बनाती हैं खाद, जीरो बजट फार्मिंग से कमाल कर रही हैं ये महिलाएं

Zero Budget Farming: खेतों में रासायनिक खाद के इस्तेमाल से महिलाओं से लेकर पुरुषों तक में स्वास्थ्य समस्याएं देखी गई हैं. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए महिलाओं ने घर पर जैविक खाद बनाने की शुरुआत की है. इससे उनकी खेती की लागत जीरो होने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिला है.

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zero budget farming by  Uttarakhand women zero budget farming by Uttarakhand women

तेजश्री पुरंदरे

  • नारायणबगड़,
  • 27 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

Zero Budget Farming: खेती-किसानी में रासायनिक खाद या कीटनाशक के इस्तेमाल से जमीन की उत्पादकता कम होती है. इसके अलावा लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. इसी को देखते हुए नारायणबगड़ की किसान महिलाएं जीरो बजट फार्मिंग के तर्ज पर खेती कर रही हैं और घर पर ही खाद बना रही हैं.

रासायनिक खाद के इस्तेमाल से होती हैं ये समस्याएं

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घर पर खाद बनाने की शुरुआत कराने वाले भरत रावत बताते हैं कि जब महिलाएं खेत में बाजार से लाए गए खाद का इस्तेमाल करती थी. इनमें केमिकल्स मिले होने के कारण सांस लेने में तकलीफ होती थी. इन रसायनिक खाद का जितनी तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा था उससे महिलाओं के सर में दर्द, सर्दी जुकाम अस्थमा और अन्य कई परेशानियां होती थीं. महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी खेत में काम करते वक्त इन सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

होम मेड खाद से दूर हुईं परेशानियां

अब 100% होम मेड खाद से सारी परेशानियां दूर हो चुकी हैं. इनमें किसी तरह की कोई मिलावट नहीं है. महिलाएं बताती हैं कि महिला किसान होने के नाते उनका दिन खेतों पर ही काम होता है. ऐसे में इस होम मेड खाद ने सारी परेशानियों को दूर कर दिया है.

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ऐसे बनाती हैं खाद

यह खाद महिला किसान खुद अपने घर पर बनाती हैं. इसमें गाय का गोबर, गौमूत्र, गुड़ और मिट्टी का घोल बनाया जाता है और खेतों में इसी का इस्तेमाल किया जाता है. इससे फसल भी पौष्टिक होती है.

200 किसानों के साथ शुरू किया था काम

इसका फायदा यह है कि पहले जो पैसा बाजार से खाद खरीदने में लगता था अब उसकी दर शून्य हो चुकी है. महिला किसान जीरो बजट फार्मिंग की तर्ज पर काम कर रही हैं. भरत रावत बताते हैं कि उन्होंने इस मिशन की शुरुआत 200 किसानों के साथ की थी. वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग जीरो बजट फार्मिंग से जुड़े केमिकल वाले खाद और खाने से सभी बच सके.

 

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