खेती-किसानी में नई-नई तकनीकें आना शुरू हो गई हैं. इन तकनीकों के सहारे किसानों के लिए खेती आसान और मुनाफे वाली बनाने की कोशिश हो रही है. इसी कड़ी में एक्वापोनिक्स तकनीक से खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. इस तकनीक के तहत खेती के लिए मिट्टी की जगह पानी की जरूरत होती है. दो टैंक बनाए जाते हैं एक में मछलियों की खेती, वहीं दूसरे में फ्लोटिंग कीबोर्ड पर सब्जियों की खेती की जाती है.
एक्वापोनिक्स तकनीक में दोगुना मुनाफा
एक्वापोनिक्स तकनीक से खेती करने में किसानों को दोगुना मुनाफा हो सकता है. दरअसल, इस तकनीक में दो टैंक तैयार किए जाते हैं. एक टैंक में मछली पाली जाती है. वहीं, दूसरे टैंक में फ्लोटिंग कीबोर्ड पर सब्जियां उगाई जाती हैं. दोनों टैंक को एक दूसरे से एक पाइप के सहारे जोड़ा जाता है.
क्या है तरीका
इस तकनीक में सब्जी में कीटनाशक, या कोई खाद देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है. यह खुद पानी से अपने जरुरत के हिसाब से भोजन ले लेती हैं. इसमें पौधे लगाने के लिए पहले छोटे ट्रे में पौधा तैयार करना पड़ता है इसके बाद इसे तैरते हुए बोर्ड पर रखा जाता है. मछलियों वाले टैंक में उनके मल से पानी में अमोनिया में वृद्धि होती है. फिर इस टैंक के पानी को सब्जियों वाले टैंक में ट्रांसफर कर देते हैं.
पानी की होती है बचत
दूसरे टैंक में पौधे मिट्टी की जगह पानी से आवश्यक पोषक तत्वों को सोखते हैं. इसके बाद इस पानी को मछलियों के टैंक में वापिस डाल देते है. यह प्रकिया कई बार दोहराई जाती है. इस तरह की खेती करने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती है. जलवायु या वातावरण के चुनाव के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता है. इस तकनीक से खेती करने के दौरान 95 फीसदी तक पानी की बचत होती है. इस तकनीक नें इसकी फसल में बीमारियां नहीं होती है.
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