मिट्टी के लिए टॉनिक होता है कच्चा कोयला, ऐसे करें इस्तेमाल, पौधों में होगी जबरदस्त वृद्धि

बागवानी में पोधों की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी होती है कि पौधे को आवश्यक तत्व मिलना. इससे पौधे काफी अच्छी तरीके से फलते फूलते हैं. इस क्रम में बायोचार बड़ी उपयोगी साबित होती है. इसे मिट्टी में छिड़काव किया जाता है. इस बनाना काफी आसान है. जनिए क्या है बायोचार और कैसे बनती है?

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आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

किसी भी पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए कई चीजों की आवश्यकता पड़ती है. जिसमें पानी, मिट्टी, धूप ये सब आवश्यक पहलू हैं. लेकिन इनमें मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण है. क्योंकि पौधे नाइट्रोजन, फस्फोरस एवं पोटैशियम को मिट्टी से प्राप्त करते हैं. पौधों को इनकी काफी मात्रा में जरूरत होती है. ऐसे में पौधे की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में खाद का छिड़काव किया जाता है. आज हम आपको ऐसी तरकीब बताएंगे, जिससे पौधे में काफी अच्छी ग्रोथ देखने को मिलेगी.

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पौधों की अच्छी उपज के लिए बायोचार बड़ा उपयोगी माना जाता है. यह एक प्रकार का कोयला है. जो बेहद कम ऑक्सीजन के साथ तैयार किया जाता है. यह मिट्टी की पोषक तत्वों के अवशोषण और जल धारण क्षमता को बढ़ाता है. इसलिए इसे पौधों का टॉनिक भी कहा जाता है.

बायोचार कैसे बनती है?

बायोचार को तैयार करने के लिए लकड़ी, पत्तियां, जैविक अवशेष या खाद जैसे कार्बनिक पदार्थों को गर्म करके बनाया जाता है. कार्बनिक पदार्थों से कोयला बनाने की इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस कहा जाता है. पायरोलिसिस नामक प्रक्रिया में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सामग्री को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे चारकोल जैसी सामग्री बनती है जिसे बायोचार कहा जाता है. बायोचार यानी कच्चे कोयले का उपयोग विशेष रूप से मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए किया गया है.

क्या हैं बायोचार के फायदे ?

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इसके कई फायदे हैं. जैसे कि यह मिट्टी की जल सोखने की क्षमता को बढ़ा देती है. यह पानी और पोषक तत्व धारण क्षमता को बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है. बायोचार के उपयोग से पौधों की जड़ों को मिट्टी में गहराई तक बढ़ने में मदद मिलती है. यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करता है और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है, 

किस अनुपात में इसे मिलाएं?

इसमें जैविक सामग्री, जैसे गाय का गोबर, वर्मीकम्पोस्ट, कोकोपीट या प्राकृतिक उर्वरक आदि का 50-50 मिश्रण बनाएं. फिर इसे 10-14 दिनों के लिए अलग रख दें. इसके बाद यह तैयार हो जाता है. अब इसे आप मिट्टी में छिड़काव कर सकते हैं.  इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और पौधों के विकास को बढ़ावा मिलता है.

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