महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले का अर्धपुर तहसील काबुली चने की खेती का हब बनता जा रहा है. यहां के किसान 20 साल से लगातार काबुली चने की खेती करते आ रहे हैं. इसी तहसील के देलुब गांव किसान नुरखान पठान को 100 एकड़ में काबुली चने की खेती से सालाना 60 लाख रुपये का मुनाफा हासिल हुआ है.
काबुली चने की उपज में हुई वृद्धि
नुरखान पठान बताते हैं कि एक एकड़ में काबुली चने की बुवाई में 40 हजार रुपये की लागत आती है. 60 हजार रुपये का मुनाफा होता है. काबुली चना 10 से 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल में बिकता है. बता दें कि इस साल फसल की उपज में वृद्धि हुई है, ऐसे में किसान बढ़िया मुनाफा कमाने की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं, पिछले साल उपज में गिरावट के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था.
काबुली चने की खेती का हब बना देलुब गांव
अर्धपुर तहसील में देलुब के किसान बड़ी मात्रा में काबुली चना उगाते हैं. नांदेड़ में यह फसल पिछले 20 वर्षों से रबी मौसम की प्रमुख फसल के रूप में देखा जाता है. यहां काबुली चना का क्षेत्रफल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. इस कारण देलुब अब काबुली चना के गांव के तौर पर जाना जाने लगा है.
उपज से खुश है किसान नुरखान पठान
देलुब गांव के नुरखान पठान पिछले कुछ वर्षों से काबुली चने की खेती कर रहे हैं. संतोषजनक उपज होने के चलते उन्होंने इस फसल के रकबे में वृद्धि कर दी है. इस साल उन्होंने 100 एकड़ में काबुली चना लगाया है और अच्छी आमदनी हो रही है. वह बेहद खुश हैं. नुरखान कहते हैं कि अगर फसल से किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है तो किसान दुगनी मेहनत और हौसले से खेती करता है.
(रिपोर्ट: कुवरचंद मंडले)
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