बेमौसम बारिश, बाढ़ से लेकर सूखे तक से किसानों को हर साल जुझना पड़ता है. इन प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को भारी नुकसान पहुंचता है. ऐसे में किसानों को आर्थिक संकट से बचाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के साथ सामने आई थी. इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी के तहत मिल जाती है. किसान को फसल नुकसान होने की स्थिति में 72 घंटों के अंदर बीमा कंपनी और प्रशासन को सूचना देनी होती है. हालांकि, कई बार इस योजना के तहत ऐसे मामले सामने आते हैं, जो मजाक का पात्र बन जाते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से आया है.
12,315 किसानों ने कराया था फसल का बीमा
इटावा में 8 ब्लॉक मिलाकर लगभग 12,315 किसानों की खरीफ की फसल का बीमा हुआ था. खरीफ की फसल में प्रमुख तौर पर धान, बाजरा और मक्का की पैदावार होती है. इटावा के चकरनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत चंबल और यमुना नदी होने की वजह से वहां बाढ़ के हालात बन गए थे. हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई थी. इन फसलों पर बीमा होने से किसान निश्चिंत थे. हालांकि, अब इन फसलों पर को 129 रुपए का मुआवजा देकर किसानों के साथ मजाक किया गया है.
दो दर्जन से अधिक किसानों को 500 से कम मुआवजा
इटावा के किसानों की फसल का बीमा कंपनी "यूनिवर्सल सोपों जनरल इंश्योरेंस कंपनी" से हुआ था. कंपनी ने प्रीमियम के नाम पर किसानों से 3 करोड़ रुपये वसूले थे. अब चकरनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम डिभौली के किसानों को 129 रुपए का मुआवजा देकर उनके साथ उनकी संवेदनाओं से खिलवाड़ किया है. दो दर्जन से अधिक किसान ऐसे हैं जिनको मुआवजा पांच सौ रुपए से भी कम का दिया गया है.
इस किसान को मुआवजे के तौर पर मिले सिर्फ 129 रुपये
डिभौली गांव के निवासी राकेश कुमार कहते हैं कि उन्होंने 5 बीघे में बाजरा की बुवाई की थी. , बाजरा पूरा तैयार हो गया था, तभी बाढ़ आ गई. पूरी फसल बाढ़ के चलते नष्ट हो गई. फसल का बीमा हो चुका था इसलिए हम निश्चिंत थे कि हमारे नुकसान की भरपाई हो सकेगी. अब बीमा कंपनी ने सिर्फ 129 रुपये मुआवजा देकर हमारे साथ मजाक किया है. अगर बाढ़ नहीं आई होती, तो बाजरे की खेती से कुल 30 हजार रुपये प्राप्त होते. मुआवजे के नाम पर हमारे साथ मजाक किया गया है, हम इससे आहत हैं.
किसानों की ये मांग
डिभौली गांव के ही किसान दिव्यांग होम सिंह ने बताया कि हमारे पास लगभग दो बीघा खेती है. बाजरा की फसल बाढ़ के चलते नष्ट हो गई थी. बीमा कंपनी ने मुआवजे के तौर पर 342 रुपए दिए हैं. इससे अच्छा तो वह नहीं देते. खर्च निकालना तो दूर, इससे मजदूरी निकलनी भी मुश्किल हो जाएगी. हमारे साथ धोखा हो गया है. हमारी सरकार से मांग है कि हमारी फसलों की लागत के बराबर मुआवजा मिलना चाहिए.
क्या कहते हैं कृषि अधिकारी
कृषि उपनिदेशक डॉ आर.एन. सिंह के मुताबिक फसल बीमा का आधार होता है. किसान स्वेक्छा से बीमा करवाता है. किसानों को आंशिक और पूर्णतया क्षति पर मुआवजा दिया जाता है. यदि किसी किसान को मुआवजा बहुत कम मिला है और नुकसान अधिक है तो ऐसी स्थिति में इसकी जांच करवाई जाएगी. यदि कहीं कोई लापरवाही हुई है, किसान के नुकसान की भरपाई के साथ सहयोग होगा, जो उचित मुआवजा है उसको दिलाने का प्रयास किया जाएगा.
अमित तिवारी