फरवरी के महीने के 13 दिन बीत चुके हैं. ये महीना खेती-किसानी के लिहाज से काफी अहम माना जाता है. इस महीने कई फसलों की खेती कर किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. फूल गोभी, हरी मटर, शिमला मिर्च, प्याज, लेट्स या लेट्यूस भी कुछ इसी तरह की फसल है. इन फसलों की खेती से किसान कम वक्त में बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
फूलगोभी
इसकी बुवाई नर्सरी विधि से की जाती है. एक हेक्टेयर के लिए 200 से 300 ग्राम बीज की जरूरत होती है. नर्सरी में बीज लगाने के बाद जब पौधे 4-5 सप्ताह के हो जाएं, तो उन्हें खेतों में लगा दें. रंगीन फूलगोभी की खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का महीना सबसे बेहतर माना जाता है.
फसल की अच्छी उपज के लिए खाद की सही मात्रा डालनी जरूरी है. गोबर की सड़ी हुई खाद को मिट्टी में मिला सकते हैं. यह फसल के विकास में बेहद सहायक साबित होगी. इसके अलावा मिट्टी की जांच भी करा सकते हैं. जांच कराने से मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी का पता लग जाता है. फिर उस हिसाब से आप इसकी खेती बेहतर तरीके से करने का प्लान कर सकते हैं.
पौधों की रोपाई के बाद 100-110 दिनों बाद फसल काटने के लिए तैयार हो जाती है. एक हेक्टेयर से औसतन 200-300 क्विंटल गोभी की फसल प्राप्त होती है. रंगीन फूलगोभी की बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफ़ा होता है.
शिमला मिर्च
शिमला मिर्च के बीज मंहगे होने के कारण इसकी पौध प्रो-ट्रेज में तैयार करनी चाहिए. इसके लिए अच्छे से उपचारित ट्रेज का उपयोग किया जाना चाहिए. ट्रे एक हेक्टयर क्षेत्रफल में 200-250 ग्राम संकर एवं 750-800 ग्राम सामान्य किस्म के बीज की आवश्यकता होती है.
30 से 35 दिन में शिमला मिर्च के पौध रोपाई योग्य हो जाते हैं. रोपाई के समय रोप की लम्बाई तकरीबन 16 से 20 सेमी एवं 4-6 पत्तियां होनी चाहिए. रोपाई के पूर्व रोप को 0.2 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम में डुबो कर पूर्व मे बनाए गए छेद मे लगाना चाहिए। पौधो की रोपाई अच्छी तरह से उठी हुई तैयार क्यारियाँ मे करनी चाहिएं क्यारियों की चौड़ाई सामान्यतः 90 सेमी रखनी चाहिए. पौधों की रोपाई ड्रिप लाईन बिछाने के बाद 45 सेमी की दूरी पर करनी चाहिए. एक क्यारी पर पौधों की सामान्यतः दो कतार लगाते हैं.
शिमला मिर्च की खेती करने के लिए जमीन का पीएच मान 6 होना चाहिए. जबकि शिमला मिर्च का पौधा 40 डिग्री तक के तापमान को भी सह सकता है. शिमला मिर्च का पौधा रोपाई के 75 दिन बाद उत्पादन देना शुरू कर देता है. वहीं इसके उत्पादन की बात करें तो 1 हेक्टेयर में शिमला मिर्च की फसल का उत्पादन 300 क्विंटल होता है.
लेटस
लेट्स या लेट्यूस को फरवरी के मौसम में भी ग्रो कर सकते हैं. यह बहुत ही लोकप्रिय सलाद पत्ता होता है, जो कई वैरायटी में मिल जायेगा जैसे कि लेट्स आइसबर्ग और लेटस लोलो रोसो आदि. फरवरी महीने के दौरान लेटस के बीजों को सीधे गमले या ग्रो बैग में लगा सकते हैं. बीज लगाने के 45 से 60 दिनों के बाद आपको लेट्स हार्वेस्ट करने को मिल जाएगी.
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