Papaya Farming Profit: खेती-किसानी में रोजाना नए-नए प्रयोग हो रहे हैं. इन प्रयोगों का किसान भी बढ़िया तरीके से फायदा उठा रहे हैं. ऐसा ही एक प्रयोग थाना इकदिल क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कुशगंवा की निवासी राधा रानी ने 2 बीघा खेत में पपीते की खेती कर शुरू किया है. यह ताइवानी "रेड लेडी" प्रजाति का पपीता है. इसकी सबसे है कि ये पूरी तरह से शुगर फ्री है और बाजार में भी लोगों के बीच इसकी काफी डिमांड है.
इस संस्थान के सहयोग की इस पपीते की खेती
क्षेत्र में अपनी तरह का ये पहला प्रयोग है. राधा रानी बताती हैं कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन संस्थान के सहयोग से महाराष्ट्र से लगभग 50 हजार रुपए कीमत के 1100 पौधे मंगाए थे, जिसमें मौसम की मार या फिर अन्य कारणों से लगभग 400 पौधे नष्ट हो गए, लगभग 700 पौधे पूरी तरह से लहलहा रहे हैं.
3 वर्ष तक लगातार आएंगे फल
इस पपीते के पौधे में फल आना शुरू हो गए हैं, 3 वर्ष तक लगातार फल आएंगे. पपीता का यह प्रजाति 3 फुट की ऊंचाई से ही फल देना प्रारंभ कर देते हैं. अक्टूबर 2021 में पौधे खेतों में लगाए थे, लगभग 10 महीने बीत गए हैं, अब इन पौधों से लगभग ढाई गुना पैदावार होगी. एक पौधे एक क्विंटल से अधिक पपीते की उपज हासिल होगी. उत्साहित राधा रानी को उम्मीद है कि इससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सक्षम हो जाएगा, खेती न होने की वजह से मात्र 2 बीघा में ही यह प्रयास किया है.
अब तक इतना हो गया है खर्च
वह आगे बताती हैं कि आगे अभी हमारा खेती में डेढ़ लाख रुपए खर्च हो चुका है संभावना है कि खर्चे के साथ आमदनी भी होगी, इसकी ट्रेनिंग ली थी. डायबिटीज वालों को भी यह फल काम आएगा यह शुगर फ्री पपीता कहलाता है.
आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावनाएं
बता दें कि राधा रानी के परिवार में तीन बेटे और एक बेटी है. उनके मुताबिक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. हालांकि महिला स्वयं सहायता की मदद से वह अपनी आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार करने का प्रयास कर रही हैं.
अमित तिवारी