सुल्तान का कमाल, मछली पालन के साथ सब्जी की खेती, 15 साल तक मिलेगा लगातार मुनाफा

Fish Farming: हरियाणा के करनाल के रहने वाले किसान सुल्तान सिंह एक्वापोनिक्स तकनीक के माध्यम से मछली पालन और सब्जी की खेती करते हैं. इसके सहारे वह 1 एकड़ में 64 क्विंटल सब्जियों को पैदा कर रहे हैं. साथ ही साल भर में पांच से छह लाख की मछलियों का भी उत्पादन करते हैं. जिससे उन्हें बढ़िया मुनाफा मिल रहा है.

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Aquaponics Farming Aquaponics Farming

aajtak.in

  • करनाल,
  • 01 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

Success Story: नई-नई तकनीकों के सहारे किसानों के लिए खेती आसान बनाने की कोशिश हो रही है. किसानों को इन तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित भी किया जा रहा है. एक्वापोनिक्स भी कुछ इसी तरह की तकनीक है. इस तकनीक में बिना मिट्टी के पानी और फ्लोटिंग बोर्ड के सहारे खेती की जा सकती है. किसान इस तकनीक में मछली पालन के साथ-साथ लोग टमाटर, लाल, पीली हरी शिमला मिर्च, ब्रोकली, स्ट्रोबेरी, प्याज, तोरी, घीया और खीरा और हरी एवं लाल मिर्च का उत्पादन कर सकेंगे.

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सुल्तान का कमाल

हरियाणा के करनाल के रहने वाले किसान सुल्तान सिंह एक्वापोनिक्स तकनीक के माध्यम से मछली पालन और सब्जी की खेती करते हैं. वह कहते हैं कि इस तरह की खेती मछली पालक किसानों के लिए तकनीक वरदान साबित हो सकती है. इससे उगाई गई सब्जियां पूरी तरह से जैविक होती है. खेतों में जो फसल 3 महीने में तैयार होती है. यहां पर वह सिर्फ 45 दिनों में ही तैयार हो जाती है.

1 एकड़ में 64 क्विंटल सब्जियां

सुल्तान सिंह के मुताबिक, मछली पालक किसान इस तकनीक के सहारे 1 एकड़ में 64 क्विंटल सब्जियों को पैदा कर सकता है. साथ ही साल भर में पांच से छह लाख की मछलियों का भी उत्पादन किया जा सकता है. शुरुआत में इसमें डेढ़ लाख रुपये तक ढाई से तीन लाख रूपये खर्च आता है. थर्माकोल या फ्लोटिंग बोर्ड की सीट लगाई जाती है. इसे लगाने का एक ही बार खर्च आता है. 15 साल तक ये बोर्ड खराब नहीं होता है. इसका मतलब ये हुआ कि 15 साल तक इसके सहारे बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

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ऐसे की खेती

सुल्तान सिंह बताते हैं कि थर्माकोल की सीट पर 1 फीट के अंतराल पर सब्जी के पौधे लगाए जाते है. सब्जियों को पैदा करने पर होने वाला खर्च भी एक बार ही करना होगा. इससे खर्च और मजूदरी बचेगी, खाद और दवाई भी नही डालनी पड़ेगी. किसान के खेत में पलने वाली मछली का आक्सीजन लेवल भी बढ़ेगा और मछली तंग भी नहीं होगी. मछली का मल मूत्र इन सब्जियों के लिए खाद बन जाता है और पौधो में बार-बार पानी नहीं देना पड़ेगा. 

अन्य किसानों को भी सिखाने को तैयार

सुल्तान सिंह के बेटे नीरज चौधरी ने बताया कि इस पर उन्होंने काफी रिसर्च की है. उनका प्रयोग सफल हो गया है. अगली बार वह चार हेक्टेयर भूमि पर इस तकनीक को लाने वाले है. उन्होंने बताया कि आम व्यक्ति भी इस तकनीक को अपने घर की छत पर अपनाकर जैविक सब्जियां उगा सकता है. इसके लिए बकायदा वह लोगों को भी ट्रेनिंग देने को तैयार हैं. 

(रिपोर्ट: करनाल से कमल दीप की रिपोर्ट)

 

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