मुआवजा देने की बजाय किसान के खाते से ही काट लिए रुपये, फोरम ने बीमा कंपनी पर ठोका जुर्माना

किसान सूरजमल नैन ने बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से फसल का बीमा कराया था. 2017 में सूरजमल नैन ने इंश्योरेंस कंपनी से फसल नुकसान का मुआवजा मांगा था. बताते चलें कि किसान के खाते से बीमा कंपनी कंपनी से  4704 रुपये भी काट लिए थे.

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विजेंद्र कुमार

  • जींद ,
  • 26 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 10:41 AM IST

हरियाणा के जींद के रहने वाले किसान सूरजमल नैन बीमा कंपनी से 6 साल की लंबी लड़ाई लड़ रहे थे. वह अपनी कपास की फसल पर हुए नुकसान के खिलाफ कंज्यूमर फोरम पहुंचे थे. अब फोरम सूरजमल नैन के पक्ष में फैसला सुनाया है. फोरम ने बीमा कंपनी पर जुर्माना लगाया है. साथ ही किसान के खाते में जल्द से जल्द मुआवजे की राशि भेजने का फैसला किया है.

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बीमा कंपनी ने किसान के खाते से काट लिए थे पैसे

किसान सूरजमल नैन ने बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से फसल का बीमा कराया था. 2017 में सूरजमल नैन ने इंश्योरेंस कंपनी से फसल नुकसान का मुआवजा मांगा था. कंपनी ने किसान को मुआवजा देने से ही इनकार कर दिया था. विरोध में किसान कंज्यूमर फोरम पहुंचे और बीमा कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया. बताते चलें कि किसान के खाते से बीमा कंपनी कंपनी से 4704 रुपये भी काट लिए थे.

कंज्यूमर फोरम ने किसान के पक्ष में सुनाया फैसला

2017 में सूरजमल नैन की 3 एकड़ में लगी कपास की फसल बर्बाद हो गई. इसके बाद किसान ने फसल बीमा कंपनी में आवेदन देकर फसल नुकसान का मुआवजा मांगा. कंपनी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. बीमा कंपनी के सैंकड़ों चक्कर लगाने के बाद भी किसान की फरियाद नहीं सुनी गई और न ही उन्हें मुआवजे का पैसा मिला. बार-बार आवेदन देने के बावजूद कंपनी ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया. इससे परेशान होकर किसान सूरजमल नैन ने 16 जून 2022 को जींद के उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई.  इस पर फोरम ने सभी पक्षों की बात सुनी और सूरजमल नैन के पक्ष में फैसला सुनाया.

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30 दिनों के भीतर देना होगा मुआवजा का पैसा

कंज्यूमर फोरम के फैसले के मुताबिक, मुआवजे के तौर पर किसान को 82 हजार 800 रुपये शिकायत तारीख से 9 पर्सेंट की दर से ब्याज जोड़कर दिया जाएगा. इसके साथ ही बीमा कंपनी की तरफ से किसान को मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमा लड़ने के लिए पांच हजार रुपये देने होंगे. आदेश में कहा गया कि 30 दिनों के भीतर कंपनी को मुआवजा का पैसा देना होगा. अगर निर्धारित समय में मुआवजे का पैसा नहीं दिया जाता है तो कंपनी को पूरा पैसा 12 परसेंट ब्याज जोड़कर देना होगा.

 

 

 

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