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केले के बाद अब महाराष्ट्र से दुबई निर्यात किया गया ड्रैगन फ्रूट, जानें किन राज्यों में होती है कमलम की खेती

महाराष्ट्र के सांगली जिले के ताड़ासर गांव से ड्रैगन फ्रूट दुबई भेजे गए हैं. महाराष्ट्र के सांगली जिले के ताड़ासर गांव किसान के मुताबिक ड्रैगल फ्रूट यानी कमलम की खेती के लिए कम ही पानी की जरूरत होती है. इस फल में विभिन्न विटामिनों तथा खनिजों भरपूर होते हैं. 

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Dragon Fruit Exported Maharashtra to Dubai
Dragon Fruit Exported Maharashtra to Dubai
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र से दुबई निर्यात किया गया ड्रैगन फ्रूट
  • कर्नाटक, केरल समेत कई राज्यों में होती है कमलम की खेती

भारत के कई फलों की मांग विदेश में बढ़ रही है. हाल ही में महाराष्ट्र के केले के बाद अब दुबई को ड्रैगन फ्रूट का निर्यात किया गया है. वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक महाराष्ट्र के सांगली जिले के ताड़ासर गांव से ड्रैगन फ्रूट दुबई भेजे गए हैं.

मंत्रालय ने जानकारी दी कि विदेशी प्रजातियों वाले फलों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए फाइबर और खनिज से भरपूर ड्रैगन फ्रूट की खेप दुबई भेजी गई है. बता दें कि ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) को कमलम भी कहा जाता है. महाराष्ट्र के सांगली जिले के ताड़ासर गांव किसान के मुताबिक ड्रैगल फ्रूट यानी कमलम की खेती के लिए कम ही पानी की जरूरत होती है. इस फल में विभिन्न विटामिनों तथा खनिजों भरपूर होते हैं. 


वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार ड्रैगन फ्रूट मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम जैसे देशों में उगाया जाता है. ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन भारत में 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ और इसे घरेलू उद्यान के रूप में उगाया गया. देश के कई राज्यों के किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं.

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इन राज्यों में होती है ड्रैगन फ्रूट की खेती
मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में ड्रैगन फ्रूट (कमलम फल) ज्यादातर कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उगाया जाता है.

ड्रैगन फ्रूट की किस्में
कमलम की तीन मुख्य किस्में हैं. जिसमें गुलाबी सफेद, गुलाबी लाल और पीला सफेद रंग वाले ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं.

ड्रैगन फ्रूट में होते हैं ये पोष्टिक तत्व
ड्रैगन फ्रूट में फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं. जो व्यक्ति के शरीर में तनाव से क्षतिग्रस्त होने वाली कोशिकाओं की मरम्मत और शरीर में आई सूजन को कम करने और पाचन तंत्र में सुधार करने में सहायक है.

 

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