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इस जीव की जीभ को कहते थे 'बैलिस्टिक टंग', मिसाइल की तरह करती थी हमला

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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भारत के पड़ोसी देश में करोड़ों साल पहले ऐसा जीव रहता था जो अपने शिकार पर बैलिस्टिक मिसाइल जितनी तेजी से हमला करता था कि उसे बचने का मौका ही नहीं मिलता था. इस उभयचरी यानी एंफिबियन जीव की जीभ को बैलिस्टिक टंग कहा जाता है. यानी अपने शिकार पर बैलिस्टिक मिसाइल जितनी तेजी से हमला. आइए जानते हैं कि इस जीव की क्या खासियत थी...(सभी फोटो- फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री)

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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यह जीव भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में 9.90 करोड़ साल पहले पाया जाता था. वैज्ञानिकों को इसके अवशेष मिले हैं जो कि एक अंबर में बंद थे. करोड़ों सालों से सुरक्षित इन अवशेषों का अध्ययन करने पर पता चला कि इस जीव की जीभ बैलिस्टिक मिसाइल की तरह काम करती थी. 

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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वैज्ञानिकों को इस जीव की प्रजाति के बारे में ज्यादा नहीं पता. लेकिन इसे वैज्ञानिकों ने यक्ष पेरेटी (Yaksha Perettii) नाम दिया है. इस जीव के जीवाश्म के तौर पर ऊपरी सिर का कंकाल मिला. इसके आधार पर इस जीव का थ्रीडी इमेज तैयार की गई. इसके बाद अध्ययन किया गया कि इसकी जीभ (पीले रंग की हड्डी) कैसे काम करती है. 

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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यक्ष पेरेटी सिर्फ 52 मिलीमीटर लंबा था. यानी करीब 2.04 इंच. इसमें इसके पूंछ की लंबाई नहीं जोड़ी गई है. लेकिन यह अपनी जीभ को इतनी तेजी से बाहर निकालता था जैसे कोई बैलिस्टिक मिसाइल हमला करती हो. इसके शिकार का तरीका था - बैठो, इंतजार करो और फिर हमला करो. इस जीव के बारे में साइंस मैगजीन में 6 नवंबर को लेख प्रकाशित हुआ है. 

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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टेक्सस के सैम ह्यूस्टन स्टेट यूनिवर्सिटी के पैलियोंटोलॉजिस्ट जुआन डाजा ने बताया कि इसका नाम यक्ष पेरेटी क्यों दिया गया. म्यांमार की लोक कहानियों में यक्ष का मतलब होता है प्राकृतिक आत्मा जो पेड़ों की जड़ों की रक्षा करता है. पेरेटी नाम स्विट्जरलैंड के खनिज विज्ञानी एडोल्फ पेरेटी के नाम से लिया गया है. जिन्होंने सबसे पहले जीवाश्म खोजे थे. 

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जुआन ने बताया कि यक्ष पेरेटी और गिरगिट में काफी समानताएं हैं. लेकिन ये जीव पूरी तरह से सरीसृप की कैटेगरी में नहीं आता. यह एक दुर्लभ उभयचरी जीव है. म्यांमार में तो इसकी जीभ मिली है, लेकिन इससे पहले ऐसे ही जीवाश्म स्पेन, कनाडा और जापान में भी मिल चुके हैं. अब हम उन सबको मिलाकर फिर से अध्ययन करेंगे. ताकि और जानकारी मिल सके. 

ancient amphibian Yaksha perettii with ballistic tongue
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स्मिथसोनियन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के पैलियोबायोलॉजिस्ट डेविड डे मार ने बताया कि आप अगर ध्यान से देखेंगे तो आपको इस जीव के जबड़े के अंदर रॉड जैसी सीधी हड्डी दिखाई देगी. यह अंग सिर्फ अल्बरपेटनॉयड्स प्रजाति के जीवों में होता था. यक्ष अपने मजबूत पैरों से पेड़ों पर लटके रहते थे. इंतजार करते थे शिकार का. जैसे ही शिकार आता वो उस पर मिसाइल जैसी तेज जीभ से हमला कर देते.