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साइंस न्यूज़

इंसानों की वजह से 100 साल में ही विलुप्त हो गई ये खूबसूरत तितली

Xerces blue Extinct Human
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करीब 80 साल पहले आखिरी बार दिखी थी ये खूबसूरत तितली. इसका नाम है जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly). माना जाता है कि उसके बाद तितली की यह प्रजाति विलुप्त हो गई. इसकी वजह है इंसान. यानी इंसानों की वजह से धरती पर विलुप्त होने वाला यह पहला जीव है. या यूं कह लें कि पहला अमेरिका कीड़ा जो इंसानों की वजह से खत्म हो गया. इसके लिए शोधकर्ताओं ने सीधे तौर पर इंसानों को ही जिम्मेदार ठहराया है. इस तितली के विलुप्त होने की ये है कहानी...(फोटोःगेटी)

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जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) के विलुप्त होने की पूरी कहानी और इंसानों की गलतियों की पूरी रिपोर्ट 21 जुलाई को बायोलॉजी लेटर्स नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है. जिसमें 93 साल पुरानी जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) के डीएनए की जांच की गई है. जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई को वैज्ञानिक भाषा में ग्लाउकोसाइकी जेरसेस (Glaucopsyche Xerces) कहते हैं. इस स्टडी की एक कॉपी शिकागो स्थित फील्ड म्यूजियम में भी रखी जाएगी, ताकि लोगों को इंसानों की गलतियां बताई जा सकें. (फोटोःगेटी)

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फील्ड्स ग्रेन्गर बायोइन्फॉरमेटिक्स सेंटर के सह-निदेशक और इस स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता फेलिक्स ग्रेवी कहते हैं कि 100 साल पहले से इंसानी गतिविधियों की वजह से जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) जैसी खूबसूरत तितली की प्रजाति नष्ट हो गई. हमारी रिसर्च इस बात को पुख्ता करती है. हमने इस तितली के डीएनए की जांच भी की है. आमतौर पर जेरसेस ब्लू (Xerces Blue) के नाम से जानी जाने वाली यह तितली आखिरी बार सैन फ्रांसिस्को प्रायद्वीप पर 1940 की शुरुआत में दिखी थी. (फोटोःगेटी)

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हैरानी की बात ये है कि 1852 में ही तितली की इस प्रजाति को खोजा गया था. यानी 100 साल से भी कम समय में तितली की यह प्रजाति धरती से विलुप्त हो गई. तेजी से बढ़ते शहरों, प्रदूषण और हैबिटेट खोने की वजह से जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) की प्रजाति खत्म हो गई. इंसानों की लालच ने इस प्यारे जीव को धरती से गायब कर दिया है. वैज्ञानिक बहुत दिनों तक इस दुविधा में थे कि ये प्रजाति खत्म नहीं हुई है. क्योंकि ठीक इसी की तरह दिखने वाली सिल्वरी ब्लू (Silvery Blue) तितली आज भी बहुतायत में पाई जाती है. (फोटोःगेटी)

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कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एंटोमोलॉजिस्ट कोरी मॉरियू ने कहा कि जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) और सिल्वरी ब्लू (Silvery Blue) प्रजातियों में बहुत ज्यादा समानताएं हैं. जिसकी वजह से कई जीव विज्ञानियों को यह लगा कि जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई एक बड़ी प्रजाति का हिस्सा है, जो उससे अलग हो गई थी. लेकिन ऐसा नहीं था, यह एक अलग प्रजाति थी, जो खोजे जाने के बाद बेहद कम समय में खत्म हो गई. क्योंकि कोरी और फेलिक्स ने 1928 में मिली जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) के पेट से डीएनए निकालकर उसका अध्ययन किया. (फोटोःगेटी)

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जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) के डीएनए की जांच करने के बाद पता चला कि इस तितली के खोजे जाने के बाद से इसके खत्म होने तक इसके डीएनए में इतनी तेजी से बदलाव आए कि यह प्रजाति पूरी तरह से नष्ट हो गई. इतनी तेजी से किसी भी जीव के डीएनए में बदलाव या टूटफूट नहीं देखा गया. यह एक हैरतअंगेज प्राकृतिक घटना है, जो कि इंसानी गतिविधियों की प्रतिक्रिया में हुई. (फोटोःगेटी)

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फेलिक्स का कहना है कि हमने जेरसेस ब्लू बटरफ्लाई (Xerces Blue Butterfly) की प्रजाति खत्म होने की प्रक्रिया से यह सीखा है कि इन जीवों को कैसे बचाया जा सकता है. हम अपनी पुरानी गलतियों से सीख सकते हैं. उन्हें दोबारा नहीं करने का प्रयास कर सकते हैं. हम ऐसे सुंदर प्राकृतिक जीवों को बचाने का हर संभव कोशिश कर सकते हैं. इस समय हम जिस दौर से गुजर रहे हैं उसे इन्सेक्ट एपोकैलिप्स (Insect Apocalypse) कह सकते हैं. यानी कीड़ों का सर्वनाश. जिसे रोकना जरूरी है, नहीं तो इकोसिस्टम बदलेगा.  (फोटोःगेटी)

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वहीं, कोरी मॉरियू ने कहा कि कीड़ों के सर्वनाश की प्रक्रिया के बीच से गुजर रहे हैं. दुनिया में हजारों कीड़ों की प्रजातियों के साथ दिक्कत हो रही है. ये कीड़े मिट्टी की उवर्रता को बढ़ाते हैं. पॉलीनेशन में मदद करते हैं. इनकी वजह से पौधे फलते-फूलते हैं. जिन्हें शाकाहारी जीव खाते हैं. इन शाकाहारी जीवों को मांसाहारी जीव खाते हैं. यानी एक भी कीड़े की प्रजाति नष्ट हुई तो पूरी की पूरी फूड चेन बिगड़ जाएगी. (फोटोःगेटी)