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साइंस न्यूज़

Ancient Killer Croc: प्राचीन मगरमच्छ खा जाते थे डायनासोर, पेट में मिला अवशेष, नई खोज

ancient killer crocodile
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मगरमच्छ बड़े होते हैं लेकिन क्या वो इतने बड़े होते थे कि डायनासोर को खा जाते? लेकिन हाल ही में एक ऐसे प्राचीन मगरमच्छ का जीवाश्म मिला है, जिसके पेट में आधा पचा और आधा सुरक्षित डायनासोर है. पेट में मिला डायनासोर एक युवा ऑर्निथोपॉड (Ornithopod) हैं. यह दो पैरों पर भागने वाला शाकाहारी डायनासोर था. इसी डायनासोर की प्रजाति में डक-बिल्ड डायनासोर (Duck Billed Dinosaur) भी शामिल हैं. (फोटोः डॉ. मैट व्हाइट/ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम)

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हम जिस मगरमच्छ की बात कर रहे हैं, वो ग्रेट ऑस्ट्रेलियन सुपर बेसिन (Great Australian Super Basin) में मिला है. यह जीवाश्म क्रेटेशियस कॉल (Cretaceious Period) का है. यानी 14.55 करोड़ साल से लेकर 6.95 करोड़ साल पुराने. इस मगरमच्छ के जीवाश्म में से पूंछ, पिछले पैर और पेल्विस वाला हिस्सा खत्म हो चुका है. लेकिन उसकी खोपड़ी और शरीर के अन्य हिस्सों के कंकाल सुरक्षित हैं. (फोटोः ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम)

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यह प्राचीन मगरमच्छ अपनी मृत्यु के समय 8 फीट लंबा था. शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर यह जीवित रहता तो और ज्यादा बड़ा होता. क्वींसलैंड के विंटन में स्थित ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम द्वारा जारी बयान के मुताबिक इस प्राचीन मगरमच्छ का नाम कोनफ्राकतोसूकुस सॉरोकतोनुस (Confractosuchus sauroktonos) है. इसका जबड़ा इतना बड़ा होता था कि यह ऑर्निथोपॉड जैसे डायनासोरों को सीधे निगल जाता था. (फोटोः डॉ. मैट व्हाइट/ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम)

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वैज्ञानिकों ने इसे यह नाम कोनफ्राकतोसूकुस सॉरोकतोनुस (Confractosuchus sauroktonos) लैटिन और ग्रीक शब्दों को मिलाकर बनाया गया है. जिसका मतलब होता है Broken Crocodile Dinosaur-Killer. डायनासोर किलर नाम मगरमच्छ के पेट में पड़े अवशेषों को देखकर आया. ब्रोकेन यानी टूटा हुआ इसलिए क्योंकि इसका जीवाश्म सुरक्षित नहीं है. साल 2010 में खनन के समय इसकी कुछ हड्डियां टूट गई थीं. लेकिन इस मगरमच्छ के पेट में डायनासोर की हड्डियां मिली थीं. (फोटोः ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम)

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ये प्राचीन मगरमच्छ यानी क्रोकोडिलियंस (Crocodilians) ट्राइएसिक काल (Triassic Period) में डायनासोरों के साथ रहते थे. यह 25.19 करोड़ साल से लेकर 20.13 करोड़ साल पहले की बात है. उस समय इन मगरमच्छों को कुछ डायनासोर स्वादिष्ट लगते थे. इसके सबूत डायनासोरों के जीवाश्म से भी मिले हैं. डायनासोरों के जीवाश्म पर मगरमच्छों के दातों के निशान और कुछ में फंसे हुए दांत भी मिले हैं. यानी मगरमच्छों को डायनासोरों को खाना अच्छा लगता था. (फोटोः गेटी)

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पैलियोटोंलॉजिस्ट्स का मानना है कि क्रोकोडिलियंस की आंतों में ताकतवर एसिड होता था, जो डायनासोरों को पचा लेता था. नई स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि प्राचीन मगरमच्छ आसानी से डायनासोरों को खा जाती थी. यह स्टडी गोंडवाना रिसर्च नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है. छोटे डायनासोरों की हड्डियां कमजोर होती थीं. इन्हें आसानी से पचाया जा सकता था. इनके जीवाश्म का अध्ययन X-ray, कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (CT) से किया गया. इसके बाद डिजिटल थ्रीडी मॉडल बनाया गया. (फोटोः डॉ. मैट व्हाइट/ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम)

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जीवाश्म में मिली डायनासोर की हड्डियां आज भी आपस में जुड़ी हुई हैं. जिस ऑर्निथोपॉड की हड्डियां मगरमच्छ के पेट में मिली हैं, वो 1.7 किलोग्राम का था. लेकिन मगरमच्छ ने इतनी जोर से इस डायनासोर को काटा था, या चबाया था कि डायनासोर की सबसे मजबूत हड्डी फीमर (Femurs) को भी तोड़ दिया था. दूसरी फीमर हड्डी में मगरमच्छ का दांत फंसा था. (फोटोः गेटी)

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इस मगरमच्छ के पेट की स्टडी करने पर पता चला कि यह डायनासोर इसका आखिरी खाना था. हालांकि, ये बात तो पुष्ट हो चुकी है कि प्राचीन मगरमच्छ डायनासोरों को बड़े चाव से खाते थे. डायनासोर उनके रोजाना के खाने में शामिल थे. ऑस्ट्रेलियन एज ऑफ डायनासोर म्यूजियम के रिसर्च एसोसिएट मैट व्हाइट ने कहा कि डायनासोर क्रेटेशियस काल में इकोलॉजिकल फूड वेब में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे. (फोटोः गेटी)

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मैट ने बताया कि हमारे पास ऐसे जीवाश्मों की कमी है कि हम तुलनात्मक स्टडी कर सकें. लेकिन जैसे ही हमें कोई इस तरह का जीवाश्म मिलता है तो हम उसका अध्ययन जरूर करेंगे. ताकि यह पता चल सके कि ऑस्ट्रेलिया में इस तरह के मगरमच्छ कितने और कहां-कहां रहते थे. (फोटोः गेटी)