अब वेस्ट टॉयलेट पेपर से रोशन होगा आपका घर

अगर इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है तो इससे नगर निगम के डंपिंग यार्ड के ओवरफ्लो हो जाने की समस्या और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता की समस्या को सुलझाया जा सकता है.

Advertisement
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

आशुतोष कुमार मौर्य

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 7:21 PM IST

थर्मल पॉवर के कारण होने वाले प्रदूषण और हाइड्रिल पॉवर के लिए बड़े बांधों के निर्माण के चलते पर्यावरण में पैदा हो रहे असंतुलन को देखते हुए पूरी दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तलाश तेजी से की जा रही है.

ऐसे में यह जानकर आश्चर्य होगा कि अब वेस्ट टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल से बिजली पैदा की जा सकेगी. साइंटिस्ट्स का कहना है कि आवासीय इमारतों में लगाए जाने वाले सौर ऊर्जा पैनलों की कीमत के बराबर ही खर्च पर टू स्टेप प्रॉसेस के जरिए यह मुमकिन है.

Advertisement

अगर इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है तो इससे नगर निगम के डंपिंग यार्ड के ओवरफ्लो हो जाने की समस्या और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता की समस्या को सुलझाया जा सकता है.

वेस्ट टॉयलेट पेपर को अक्सर किसी काम का नहीं समझा जाता. हालांकि यह कार्बन का एक बेहतर स्रोत है और सूखा रहने पर इसमें 70 से 80 फीसदी सेलूलोस मौजूद होता है.

पश्चिमी यूरोप में हर साल औसतन 10 से 14 किलो टॉयलेट पेपर प्रति व्यक्ति की दर से कचरे के तौर पर निकालता है. नालों में जमा होने वाली इस रद्दी की मात्रा भले ही मामूली हो लेकिन यह नगर निगम के कचरे का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम के शोधकर्ताओं के मुताबिक बिजली पैदा करने के लिए यूज्ड टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल वेस्ट की रिसाइकिल प्रॉसेस का सर्वश्रेष्ठ तरीका है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement