वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तीखी बहस देखने को मिली. अमेरिका ने साफ कहा कि वेनेजुएला या उसकी जनता के खिलाफ कोई युद्ध नहीं चलाया जा रहा है, बल्कि यह लंबे समय से चले आ रहे आपराधिक मामलों से जुड़ी एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई थी.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग में अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ आक्रामकता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. यह बैठक सोमवार को बुलाई गई थी, जिसमें मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए हालात पर चर्चा हुई.
अमेरिकी प्रतिनिधि वॉल्ट्ज ने परिषद को संबोधित करते हुए कहा, वेनेजुएला या उसके लोगों के खिलाफ कोई युद्ध नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं थी, बल्कि यह वर्षों पुराने आपराधिक आरोपों से जुड़ी एक कानूनी कार्रवाई थी.
हालांकि सुरक्षा परिषद के कई सदस्यों ने इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई. खासतौर पर इस बात पर चिंता जताई गई कि किसी संप्रभु देश के मौजूदा राष्ट्रपति की गिरफ्तारी से क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं.
इस आपात बैठक का अनुरोध कोलंबिया ने किया था. कोलंबिया ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे वेनेजुएला की संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन बताया.
संयुक्त राष्ट्र में कोलंबिया की राजदूत लियोनोर ज़लाबाता टोरेस ने कहा, किसी भी परिस्थिति में एकतरफा बल प्रयोग को सही ठहराने का कोई आधार नहीं है. इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन है.
रूस ने अमेरिका पर और तीखा हमला बोला. रूसी राजदूत वासिली नेबेंज़िया ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति का अपहरण किया है और तत्काल रिहाई की मांग की.
नेबेंज़िया ने कहा, काराकास के खिलाफ अमेरिका द्वारा किए गए इन अपराधों का कोई औचित्य नहीं हो सकता. मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क में हिरासत में रखा गया है. उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व से मांग की कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के वैध राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा किया जाए.
चीन ने भी अमेरिकी कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई. संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप राजदूत सुन लेई ने कहा कि बीजिंग अमेरिका के इस कदम से गहराई से स्तब्ध है और इसे दबंगई वाला व्यवहार बताया.
सुन लेई ने कहा, हम अमेरिका से मांग करते हैं कि राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए.
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