यूनेस्को ने कहा- पाक में अलगाव की भाषा बनी उर्दू

'मातृ भाषा दिवस' के अवसर पर यूनेस्को ने एक नीति पत्र जारी करते हुए तुर्की, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ग्वाटेमाला में विविध जातीय समाजों का हवाला दिया और इस बात की सिफारिश की कि बच्चों को उस भाषा में शिक्षा दी जाए जिन्हें वे समझते हैं.

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पाक में अलगाव की भाषा बनी उर्दू पाक में अलगाव की भाषा बनी उर्दू

लव रघुवंशी / BHASHA

  • इस्लामाबाद,
  • 22 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 7:06 AM IST

भाषा के दोधारी तलवार हो सकने के बारे में चेतावनी देते हुए यूनेस्को ने कहा है कि पाकिस्तानी स्कूलों में उर्दू का लगातार इस्तेमाल इस विविध जातीय मुल्क को राजनीतिक तनाव की ओर ले गया है. साथ ही इसने यह सिफारिश की है कि बच्चों को उसी भाषा में शिक्षा देनी चाहिए जिसे वे समझते हैं.

'मातृ भाषा दिवस' के अवसर पर यूनेस्को ने एक नीति पत्र जारी करते हुए तुर्की, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ग्वाटेमाला में विविध जातीय समाजों का हवाला दिया और इस बात की सिफारिश की कि बच्चों को उस भाषा में शिक्षा दी जाए जिन्हें वे समझते हैं.

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उर्दू भाषा से बढ़ा राजनीतिक तनाव
यूनेस्को ने शुक्रवार को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के सरकारी स्कूलों में उर्दू भाषा को निर्देश भाषा की तरह लगातार इस्तेमाल किए जाने ने भी राजनीतिक तनाव को बढ़ाया है.

अलगाव की भाषा बन गई उर्दू
हालांकि पाकिस्तान में आठ प्रतिशत से भी कम आबादी उर्दू भाषा बोलती है. यूनेस्को ने कहा कि आजादी के बाद पाकिस्तान ने अपना गठन होने पर राष्ट्रभाषा के रुप में और स्कूलों में निर्देश भाषा के तौर पर उर्दू का इस्तेमाल स्वीकार किया था. लेकिन छह बड़े भाषायी समूहों और 58 छोटे भाषायी समूहों वाले इस देश में उर्दू अलगाव की भाषा बन गई है.

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