जब करीबी हो जाए पराया और अनजान बन जाए भगवान....यूक्रेन से आई दिल छू देने वाली कहानी

यूक्रेन में युद्ध चल रहा है, बमबारी हो रही है और जमीन पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है. लेकिन इस बीच भी इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिल रही है कि पूरी दुनिया सलाम करते नहीं थक रही.

Advertisement
यूक्रेन से आई दिल छू देने वाली कहानी यूक्रेन से आई दिल छू देने वाली कहानी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 6:49 AM IST
  • यूक्रेन की धरती पर मजबूत होती इंसानियत
  • अनजान बन रहे भगवान, निभा रहे फर्ज

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया को तबाही का ऐसा मंजर दिखा दिया है जो आने वाले कई सालों तक मन को खौफजदा करने वाला है. कहीं पर बमबारी से तबाही...कहीं पर गोलियों की तड़तड़ाहट से मातम, इस एक जंग ने कई रंग दिखा दिए हैं. लेकिन इस क्रूर से दिखने वाले युद्ध में भी इंसानियत जिंदा है और लोग ही एक दूसरे के लिए फरिश्ता साबित हो रहे हैं.

Advertisement

यूक्रेन की धरती से एक ऐसी ही कहानी सामने आई है जहां पर पिता देश की रक्षा करने के लिए रुका हुआ है, मां इटली में फंस गई है और दो छोटे बच्चे किसी 'अनजान' के सहारे सुरक्षित हुंगरी पहुंच जाते हैं. किसी अनजान पर ऐसा विश्वास आज की दुनिया में मुश्किल से देखने को मिलता है. लेकिन युद्ध के बीच खड़े यूक्रेन ने फिर साबित कर दिया भरोसा और इंसानियत हर जगह एक समान रहती है, सिर्फ नीयत साफ होनी चाहिए.

इस कहानी की बात करें तो इसके चार मुख्य किरदार हैं. एक है 38 वर्षीय पिता जो वैसे तो अपने बच्चों संग यूक्रेन बॉर्डर क्रास करने वाला था, दूसरा किरदार है 58 वर्षीय Ableyeva, तीसरा किरदार हैं वो बच्चे जिन्होंने किसी अनजान के सहारे अपना देश छोड़ा है और आखिर में है उन बच्चों की वो मां जो इटली में फंसी हुई हैं.

Advertisement

अब हुआ ये कि 38 वर्षीय शख्स अपने बच्चों के साथ यूक्रेन छोड़ने की तैयारी कर रहा था. उसे अपने सफर के दौरान Ableyeva नाम की महिला भी मिल गई थी जो उसी के शहर से आती थी. दोनों एक दूसरे से अनजान थे, लेकिन इस मुश्किल समय में एक विश्वास का रिश्ता सा बन गया था. फिर जब ये सभी यूक्रेन के बॉर्डर पर पहुंचे, सिर्फ Ableyeva और उस शख्स के दोनों बच्चों को ही देश छोड़ने की इजाजत मिली. उन बच्चों के पिता को यूक्रेन में ही रोक दिया गया. वजह ये थी कि युद्ध चल रहा था और सरकार का ऊपर से फरमान था कि 18 से 60 साल तक के पुरुषों को देश की रक्षा के लिए यूक्रेन ही रहना होगा.

ऐसे में उस बेबस पिता ने Ableyeva पर अपना भरोसा जताया. उसने अपने दोनों बच्चों को उस महिला के हवाले कर दिया जिससे वो सिर्फ चंद घंटे पहले मिला था. उसने उस महिला को अपने बच्चों का पासपोर्ट भी दे दिया था और उनकी मां का फोन नंबर भी दिया. फिर अपने बच्चों को गले लगाकर वो पिता अपने देश की रक्षा करने के लिए चला गया और Ableyeva ने उसके बच्चों के साथ यूक्रेन की धरती छोड़ हंगरी में दस्तक दे दी.

Advertisement

यहां पर ये जानना भी जरूरी हो जाता है कि Ableyeva खुद अपने बच्चों को लेकर काफी परेशान थी. उसकी खुद की जिंदगी में काफी चुनौतियां चल रही थीं. वो खुद अपने दो बच्चों को युद्ध के बीच यूक्रेन में छोड़कर आई थी. एक तो पुलिस में नौकरी करता तो दूसरी नर्स थी. वो भी वर्तमान स्थिति की वजह से देश नहीं छोड़ सकते थे, ऐसे में Ableyeva ने अकेले ही देश छोड़ने का फैसला किया.

अब हंगरी में Ableyeva और उस शख्स के दोनों बच्चे अकेले थे. वो मासूम तो इस पूरी स्थिति से अनजान थे, लेकिन अपनी मां को काफी याद कर रहे थे. दोनों की नजर सिर्फ उस फोन पर थी जिस पर कभी भी मां का कॉल आ सकता था. फिर वो कॉल आया भी और पता चला कि मां उनके पास आने वाली है.

इन बच्चों की मां का नाम Anna Semyuk है. 33 साल की हैं और अपने बच्चों को लेकर काफी परेशान. जैसे ही वे बॉर्डर पार कर अपने बच्चों से मिलीं, एक को गले लगाया तो दूसरी मायूस बैठी बेटी को गुलाबी कंबल में ढक दिया. फिर Anna Semyuk ने उस महिला का शुक्रिया किया जो उसके दोनों बच्चों को ना जानते हुए भी सुरक्षित यहां तक लेकर आई. दोनों महिलाओं ने एक दूसरे को गले लगाया और काफी देर तक सिर्फ रोतीं रहीं. बोलीं कुछ नहीं लेकिन भावनाएं और दर्द सब समझ गए....

Advertisement

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement