अमेरिकी इस्लामिक उपदेशक खालिद यासीन ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की तारीफों में कसीदे पढ़ते हुए उन्हें दुनिया के उन पांच लोगों में से एक बताया है, जो जरूरत पड़ने पर इंसानियत को बचाएंगे. दरअसल, दशकों पहले ईसाई धर्म को छोड़कर इस्लाम अपनाने वाले खालिद यासीन तुर्की यात्रा पर हैं और इस्तांबुल पहुंचकर उन्होंने अर्दोआन की तारीफ में यह बात कही है. इसके साथ ही उन्होंने अपने मुस्लिम बनने को लेकर भी खुलकर बात की है.
खालिद यासीन ने कहा कि अर्दोआन का नजरिया काफी ज्यादा अच्छा है. किसी और नेता का उनके जैसा नजरिया नहीं है. खालिद ने आगे कहा कि अर्दोआन दुनिया के उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं, जो दुनिया और इंसानियत की मदद करेंगे. खालिद ने आगे कहा कि वे कभी अर्दोआन से नहीं मिले हैं, लेकिन उनसे मिलना जरूर चाहते हैं.
खालिद यासीन ने अर्दोआन को लेकर आगे कहा कि सबसे पहले, वे अर्दोआन को धन्यवाद कहना चाहते हैं, क्योंकि जो उन्होंने किया है, वो आसान नहीं है. अर्दोआन सिर्फ अपने देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए जरूरी हैं. खालिद यासीन ने आगे कहा कि वे दुआ करते हैं कि अर्दोआन अपने इस नजरिए पर बरकरार रहें.
इस्लाम कबूल करने पर क्या बोले खालिद यासीन
इस्लामिक उपदेशक खालिद यासीन ने ईसाई धर्म में परवरिश के बाद इस्लाम कबूल करने को लेकर कहा कि साल 1964 में उन्होंने प्रसिद्ध अमेरिकी मुस्लिम एक्टिविस्ट Malcolm X का न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा एक आर्टिकल पढ़ा, जिसके बाद खालिद की इस्लाम के बारे में पढ़ने की इच्छा बढ़ गई.
खालिद यासीन ने बताया कि वे एकदम से मुस्लिम नहीं बन गए. पहले उन्होंने इस बारे में पढ़ना और रिसर्च करना शुरू किया. खालिद उस समय पर काफी अच्छे से इस्लाम को जान रहे थे. इस्लाम के बारे में हर चीज पढ़ते थे. साल 1965 में खालिद ने Malcolm X की न्यूयॉर्क में स्पीच सुनी, जिससे वे और ज्यादा प्रभावित हो गए.
खालिद ने बताया कि स्पीच के दौरान हम कुछ तीन चार लोगों को एक अलग ही स्तर का जुड़ाव महसूस हुआ. जब हम ऊपर सीढ़ियों पर बैठे थे तो Malcolm X ने हमें बुलाया और बातचीत की. जिसके बाद मैं भी एक मुसलमान बन गया.
तुर्की क्यों आए हुए हैं खालिद यासीन
तुर्की आने को लेकर खालिद यासीन ने बताया कि वे इससे पहले आठ बार तुर्की आ चुके हैं. इस बार वे एक लक्ष्य के साथ तुर्की आए हैं. उन्होंने कहा कि वे तुर्की के रियल मीडिया ग्रुप के जरिए इस्लाम के बारे में लोगों को समझाएंगे. उनके स्पीच और बातचीत को कई भाषाओं में ट्रांस्लेट किया जाएगा, जिसमें तुर्की की भाषा भी शामिल होगी.
उन्होंने बताया कि यूरोप के सबसे पास तुर्की है, इसलिए वे तुर्की में ही एक स्टूडियो खोलना चाहेंगे.
तुर्की को लेकर खालिद ने कहा कि उन्होंने तुर्की के इतिहास को बहुत अच्छे से पढ़ा है. मुस्लिम देशों में तुर्की का इतिहास शानदार रहा है. तुर्की एक महान देश है. खालिद ने आगे कहा कि अगर खुदा मुझे और जिंदगी देगा तो वे तुर्की में थोड़ा और रहना चाहेंगे. खालिद ने बताया कि वे यहां एक दफ्तर खोलना चाहते हैं और नए तुर्की के निर्माण में खुद भी एक ईंट बनना चाहते हैं. खालिद ने कहा कि उन्हें तुर्की से बहुत ज्यादा प्यार है.
वहीं पश्चिम देशों में हो रही इस्लामोफोबिया की चर्चा को लेकर उन्होंने कहा कि उन लोगों को इस्लाम से इसलिए डर लगता है, क्योंकि वे इसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं. खालिद ने आगे कहा कि इस्लामोफोबिया ज्यादा समय तक नहीं रहेगा और एक दिन यह दौर भी गुजर जाएगा.
कौन हैं खालिद यासीन
इस्लामिक उपदेशक खालिद यासीन का जन्म न्यूयॉर्क में एक ईसाई परिवार में हुआ था. उनके 9 और भाई-बहन थे. खालिद यतीम नहीं थे, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत की वजह से उन्हें किसी दूसरे परिवार ने गोद ले लिया था. इसके बाद जवानी तक वे ईसाई धर्म के रीति-रिवाजों में ही पले-बढ़े. बाद में वे Malcolm X जैसी हस्तियों से काफी ज्यादा प्रभावित हुए और इस्लाम को कबूल कर लिया.
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