चीन में मौलिक आजादी का दमन सिर्फ उसकी जमीन या हांगकांग तक ही सीमित नहीं है. चीन की अधिनायकवादी नीतियों के विरोध में विदेश में रहने वाले चीनी मूल के जो नागरिक आवाज उठाते हैं, उनके खिलाफ भी बीजिंग ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है.
जून 2014 में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने फॉक्स हंट के नाम से एक ऑपरेशन लॉन्च किया. इसका उद्देश्य वित्तीय अपराधों के आरोपी भगोड़े चीनी नागरिकों को वापस देश में लाना बताया गया.
लेकिन अमेरिका के फेडरल जांच ब्यूरो (FBI) ने अब सार्वजनिक तौर पर चीन के असल मकसद को लेकर अलार्म बजाया है. ब्यूरो के मुताबिक, ये मकसद चीनी प्रवासियों के बीच बढ़ते असंतोष पर प्रहार करना है.
एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने वॉशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट से कहा, 'चीन फॉक्स हंट को एक किस्म का अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी अभियान बताता है. लेकिन ऐसा है नहीं. फॉक्स हंट चीनी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए राष्ट्रपति शी की छेड़ी मुहिम है, जिन्हें वो खतरा मानते हैं और जो चीन के बाहर दुनिया भर में रहते हैं.'
फॉक्स हंट के हथकंडे, निशाने
रे ने चीनी एजेंटों के अमेरिका में अपनाए जा रहे उन हथकंडों के बारे में बताया जो फॉक्स हंट के निशाने वाले लोगों के खिलाफ अपनाए जाते हैं. ताकि उन्हें चीन लौटने के लिए मजबूर किया जा सके.
रे ने कहा, 'फॉक्स हंट के सैकड़ों पीड़ित यहीं अमेरिका में रहते हैं. इनमें से कई अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक हैं. चीनी सरकार उन्हें बलपूर्वक चीन लौटने के लिए मजबूर करना चाहती है, और इसके लिए बीजिंग जो हथकंडे अपनाता है, वो चौंकाने वाले हैं.'
रे ने बताया, 'मिसाल के लिए, जब फॉक्स हंट के एक टारगेट का पता नहीं लगाया जा सका, तो उसके अमेरिका में रहने वाले परिवार के पास चीनी सरकार ने एक मैंसेजर को भेजा. परिवार को टारगेट तक ये संदेश पहुंचाने के लिए कहा गया कि उसके पास दो विकल्प हैं. या तो तत्काल चीन लौट जाएं या खुदकुशी कर लें.'
एफबीआई डायरेक्टर के मुताबिक, बीजिंग का काउंटर इंटेलीजेंस वर्क 'हमारे देश (अमेरिका) की सूचना और बौद्धिक संपदा के साथ-साथ आर्थिक मजबूती के लिए भी दीर्घकालिक खतरा है.'
रे के मुताबिक, चीनी फॉक्स हंट हिट-लिस्ट में चीनी कम्युनिस्ट शासन के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, असंतुष्ट और आलोचक शामिल हैं जो चीन की ओर से व्यापक पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन किए जाने के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं.
रे का कहना है कि चीनी एजेंट अमेरिका में रहने वाले अपने टारगेट्स पर अक्सर दबाव डालते हैं. इसके लिए चीन में अब भी रहने वाले उनके रिश्तेदारों का हवाला देकर धमकियां दी जाती हैं. रे ने अमेरिका में रहने वाले फॉक्स हंट पीड़ितों को समर्थन की पेशकश की. साथ ही उनसे अपील की कि वे अपने स्थानीय एफबीआई फील्ड ऑफिस से संपर्क करें.
अपने संबोधन में, रे ने यह भी बताया कि एफबीआई के एक्टिव काउंटर-इंटेलिजेंस केसों में से लगभग आधे चीन और इसकी गतिविधियों से जुड़े थे. रे ने इंगित किया कि औसतन एफबीआई को हर 10 घंटे में चीन से जुड़ा एक नया काउंटर इंटेलीजेंस केस खोलने को मिलता है. रे ने बताया कि चीन बड़े पैमाने पर हैकिंग, पहचान (आइडेंटिटी) की चोरी और बौद्धिक संपदा जासूसी में शामिल रहा है. एफबीआई के दफ्तरों में इस तरह के 1,000 की संख्या तक केस फैले हो सकते हैं.
एफबीआई प्रमुख ने कहा, 'अमेरिका के लोग चीनी चोरी के इतने बड़े पैमाने पर पीड़ित हैं कि यह मानव इतिहास में पूंजी के सबसे बड़े ट्रांसफर में से एक की नुमाइंदगी करता है.' हाल ही में, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने 'चीनी कम्युनिस्ट पार्टी' की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के बारे में बात की. उन्होंने कहा, 'चीनी कम्युनिस्ट पार्टी लोगों की जिंदगी पर पूरा नियंत्रण चाहती है. इसका मतलब आर्थिक नियंत्रण है, इसका मतलब राजनीतिक नियंत्रण है, इसका मतलब शारीरिक नियंत्रण है, और शायद सबसे महत्वपूर्ण बात, इसका मतलब विचार नियंत्रण है.'
चीन के फॉक्स हंट की ट्रैकिंग
अपने लॉन्च के पहले छह महीनों में, फॉक्स हंट ने चीन के बाहर रहने वाले लगभग 700 संदिग्धों को चीन वापस पहुंचाने में कामयाबी पाई. 2015 में, ऑपरेशन के तहत बड़ा मकसद हल किया गया जब इटली से झांग नाम की एक महिला का चीन प्रत्यर्पण हुआ. यह पहली बार था जब किसी यूरोपीय देश ने वित्तीय अपराध के आरोप में किसी शख्स को चीन को सौंपने पर रजामंदी दी.
लेकिन अगस्त 2015 की शुरुआत में, ओबामा प्रशासन ने बीजिंग को चेतावनी दी कि चीनी सरकारी एजेंट अंडरकवर होकर अमेरिका में अहम चीनी प्रवासियों को वापस चीन भेजने के लिए ऑपरेट कर रहे हैं. इनमें से कई चीनी प्रवासियों को चीन ने भ्रष्टाचार के आरोपों में वांछित बता रखा है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चीनी कानून-प्रवर्तन एजेंटों ने गुप्त रूप से कार्रवाई की और उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पूर्व-सरकारी अधिकारियों का पीछा किया जो चीन से निकल आने में कामयाब रहे थे.
2014 में ऑपरेशन फॉक्स हंट की शुरुआत के बाद से चीन ने पहले साल में ही कथित तौर पर 56 देशों में गतिविधियां आयोजित कीं. इन देशों में अमेरिका, कनाडा, स्पेन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका भी शामिल थे.
चीन का राष्ट्रपति बनने के एक साल बाद शी जिनपिंग के आदेशों के तहत इस पूरे कैंपेन की रूपरेखा तैयार की गई. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने तथाकथित भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के लिए आधार तैयार किया. साथ ही उसने एक नए भ्रष्टाचार-विरोधी जनरल दफ्तर की स्थापना की.
चीन की अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है. ये तीनों देश ही संदिग्ध आर्थिक अपराधियों के लिए सबसे लोकप्रिय ठिकाने हैं. लेकिन ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने शुरू में 2014 और 2017 के बीच चीनी संदिग्धों के प्रत्यर्पण को सुनिश्चित करने के लिए चीन के प्रयासों में सहयोग किया. ऐसा ओबामा प्रशासन की ओर से बीजिंग को ऑपरेशन फॉक्स हंट पर चेतावनी देने के बावजूद किया गया.
फॉक्स हंट के तौर-तरीके
चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के तत्कालीन उप निदेशक लियू डोंग ने खुलासा किया कि फॉक्स हंट टीम में ‘हंटर्स’ शामिल होते हैं. इनकी औसत उम्र 30 साल होती है. इनमें से कुछ 20 के दशक के अपने शुरुआती वर्षों वाले भी होते हैं.
चीन की सरकारी संवाद एजेंसी शिन्हुआ को 2015 में दिए एक इंटरव्यू में लियू ने कहा, 'इस ऑपरेशन में युवाओं की जरूरत होती है जो लंबे घंटों तक काम कर सकें और बार-बार लंबी दूरी की यात्राए करने में सक्षम हों.' इनके चयन के मानदंडों में खोजी काम का अनुभव, कानूनी जानकारी और विदेशी भाषा में दक्षता शामिल होती है.
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लियू के मुताबिक, चीन की फॉक्स हंटर्स टीम को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के लिए पर्याप्त स्मार्ट होना चाहिए, ताकि विभिन्न देशों में कानून-प्रवर्तन विभागों को हैंडल कर सके. साथ ही उनमे जोखिम के उच्च स्तर को निपटने की भी क्षमता होनी चाहिए. शैक्षणिक योग्यता के संबंध में, अधिकांश टीम के सदस्यों के पास अर्थव्यवस्था और कानून में मास्टर डिग्री होती है. लियू ने बताया कि फॉक्स हंट ऑपरेशन्स हमेशा बेहद गोपनीयता और तेजी के साथ प्लान किए जाते हैं.
तेजी को उच्च प्राथमिकता
टास्क मिलने के बाद, होटल और एयर टिकट जैसी आवश्यक बुकिंग तुरंत की जाती हैं. एक बार टास्क फोर्स के सदस्य या "हंटर्स" अपने टारगेट वाले देश में पहुंच जाते है तो सारे ऑपरेशनल फैसले खुद करते हैं. बीजिंग में उनके समकक्ष
संदिग्धों के बारे में लगातार इंटेलीजेस इनपुट उपलब्ध कराते रहते हैं. बताया गया है कि कई महिला पुलिस अधिकारी भी इन अभियानों में हिस्सा लेती हैं.
सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि महिला पुलिस अधिकारियों की दक्षता सूक्ष्म निरीक्षण और मनोवैज्ञानिक निर्णय लेने की महिलाओं की विशिष्टता और माहौल को संभालने की उनकी क्षमता में निहित है.
इंटरपोल का दुरुपयोग?
गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़ने वाले अपराधियों का पीछा करने और पकड़ने में मदद के लिए इंटरपोल अहम संगठन है. लेकिन चीन इस संगठन का दुरुपयोग राजनीतिक असंतुष्टो तक पहुंचने के लिए करता रहा है.
2019 में, एंटरटेनमेंट मैगजीन ‘वैराइटी’ ने शंघाई फिल्म ग्रुप की आगामी फिल्म फॉक्स हंट के बारे में स्टोरी की थी. शंघाई फिल्म ग्रुप सार्वजनिक रूप से लिस्टेड है और चीनी सरकार की ओर से समर्थित भी है.
फिल्म स्पष्ट रूप से चीनी असंतुष्टों को एक साफ चेतावनी जारी करने के उद्देश्य से थी. वैराइटी ने स्टोरी में पब्लिक सिक्योरिटी के डिप्टी मिनिस्टर मेंग किंगफेंग को इंटरपोल के बारे में बोलते हुए उद्धृत किया था.
मेंग ने कहा था- 'अमेरिका और कनाडा, जिन देशों के साथ चीन की कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, वे चीनी भगोड़ों के लिए शीर्ष गंतव्य बन गए हैं. चीन में कानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल प्रोटोकॉल्स का इस्तेमाल करने की आवश्यकता है.'
चीनी सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के कथित तौर पर लाभान्वितों के नाम पर जिन लोगों की तलाश थी, उनमें इंटरपोल के चीनी प्रमुख, मेंग होंगवेई भी शामिल थे, जिन्हें 2018 में गिरफ्तार किया गया था और हाल ही में दोषी करार दिए जाने के बाद साढ़े 13 साल कारावास की सजा सुनाई गई.
2014 के बाद से, ऑपरेशन फॉक्स हंट ने 4,300 से अधिक चीनी भगोड़ों पर संदिग्ध भ्रष्टाचार के आरोप में शिकंजा कसा. उन्हें गिरफ्तार किया गया और 120 से अधिक देशों से वापस चीन लाया गया.
चीनी असंतुष्टों के लिए पनाहगाह बने अहम देशों पर फोकस करने के लिए चीन ने मार्च 2015 में फॉक्स हंट के अपग्रेड के तौर पर ऑपरेशन स्काईनेट शुरू किया.
हांगकांग विरोध प्रदर्शन
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस महीने, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण संधियों को निलंबित कर दिया है. ये कदम चीन के उस नए सिक्योरिटी कानून के बाद उठाया गया जिसके तहत असंतुष्टों को हांगकांग से चीन की मुख्य भूमि पर प्रत्यर्पित किया जा सकता है.
आशंका है कि चीन अब इसी तरह के कानून के साथ ताइवान को निशाना बना सकता है. यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि एफबीआई प्रमुख ने चीन की तरफ से पेश होने वाले खतरों पर एक पूरा सत्र समर्पित किया. ताकि अभिव्यक्ति की आजादी के लोकतांत्रिक और बुनियादी सिद्धांतों पर चीन के प्रहार को जगजाहिर किया जा सके.
(लेखक सिंगापुर स्थित ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट हैं)
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