भारत और अमेरिका के बीच हो सकती है ये बड़ी डील, रूस छूट रहा पीछे?

भारत और अमेरिका के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान रक्षा से जुड़े कई अहम सौदों पर मुहर लग सकती है. भारत और अमेरिका सरकार के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले ही डील को लेकर बातचीत भी शुरू हो चुकी है. अगर मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत की अमेरिका के साथ बड़ा रक्षा सौदा होता है तो यह रूस के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा.

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नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:13 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है. 12 फरवरी को पीएम मोदी फ्रांस से अमेरिका पहुंच जाएंगे और नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 13 फरवरी को मुलाकात करेंगे. इसी दौरान रक्षा से जुड़े कई अहम सौदों पर मुहर लग सकती है. दोनों नेताओं की मुलाकात से पहले ही भारत और अमेरिका की बीच डील को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है. सूत्रों की मानें तो भारत अमेरिका से स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल के सह-उत्पादन और फाइटर जेट इंजन की खरीद व सह-उत्पादन को लेकर बड़ी डील कर सकता है. मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा रक्षा सौदा होता है तो इस पर रूस की नजर भी रहेगी.

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दरअसल, भारत सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदता है. दोनों देशों के बीच दशकों पुराना मजबूत रक्षा संबंध है. भारतीय सेना में जो हथियार इस्तेमाल होते हैं, उनमें से अधिकतर रूस से ही खरीदे गए हैं. भारत का मिग-21  विमान हो या एस-400 मिसाइल सिस्टम, यह सब भारत ने रूस से ही खरीदा है. ऐसे में भारत अगर रूस से अपना रक्षा कारोबार थोड़ा अमेरिका शिफ्ट करता है तो उससे रूस को चिंता जरूर हो सकती है. 

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप कारोबार पसंद नेता हैं और वह चाहते हैं कि भारत अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा हथियारों की खरीदारी करे.

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने जब पीएम मोदी से फोन पर बात की थी तो उस समय भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से हथियारों की बड़ी डील की इच्छा जताई थी. भारत अगर डोनाल्ड ट्रंप की चाहत के अनुसार अमेरिका से हथियार खरीदता है तो इससे भारत और अमेरिकी रिश्ते मजबूत होंगे. 

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अमेरिका से क्या डील करने की तैयारी कर रहा भारत ?

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल के सह-उत्पादन को लेकर बातचीत हो रही है. यह  स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल अमेरिकन डिफेंस कंपनी जरनल डायनामिक्स ने बनाया है जो यूएस आर्मी में भी इस्तेमाल की गई हैं. वहीं सूत्रों की मानें तो दोनों देश फाइटर जेट इंजन्स के सह-उत्पादन को लेकर साल 2023 में हो चुकी डील को भी आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. यह फाइटर जेट्स भारतीय वायुसेना की शान बढ़ाएंगे.

रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, भारत अमेरिका के साथ जो लेन-देन करना चाहता है, उस पर वह तेजी से काम कर रहा है. संजीव कुमार ने आगे कहा कि, इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि, संजीव कुमार ने इससे ज्यादा कुछ नहीं बताया.

सूत्रों की मानें तो, भारतीय सरकार की स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के अधिकारी आने वाले दिनों में अमेरिकी अधिकारियों और जनरल इलेक्ट्रिक की एयरोस्पेस यूनिट के साथ मुलाकात करेंगे. यह कंपनी GE-414 इंजन बनाती है. इस मीटिंग में इस सौदे को मार्च तक फाइनल करने पर बातचीत होगी.

सूत्रों की मानें तो भारत अमेरिका से माउंटेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम और सैंकड़ों स्ट्राइकर खरीदेगा. इसके बाद भारत अमेरिका के साथ एक सरकारी फर्म के माध्यम से उनका सह-उत्पादन भी करेगा. हालांकि, अभी अमेरिका या भारत सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. 

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हथियारों की खरीदारी को लेकर दशकों पुराना है रूस और भारत का संबंध
भारत और रूस पिछले काफी समय से बड़े रक्षा सौदे करते आए हैं. भारत अपना अधिकतर हथियार रूस से ही खरीदता है. रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय सेना जिन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करती है, उनमें करीब 80 फीसदी रूस में ही बने हैं. 

पिछले साल स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की मार्च में आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि, पिछले 5 सालों में भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया और इस आयात में रूस की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है. 

वहीं रूस के कुल हथियार निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 36 फीसदी है. यूक्रेन युद्ध की वजह से थोड़ा असर जरूर पड़ा है, उसके बावजूद भी रूस और भारत ने रक्षा सौदों के मामले में मजबूत संबंध बनाए हुए हैं. यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका ने दुनिया भर में चेतावनी दी थी कि जो भी देश रूस के साथ कारोबार करेगा, उसे नुकसान उठाना पड़ेगा. उसके बावजूद भारत ने रूस से न सिर्फ तेल की खरीद जारी रखी, इसके साथ ही हथियारों का कारोबार भी चलता रहा. हालांकि, ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में भारत पर रूस से तेल ना खरीदने को लेकर भी दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं.

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