फिर झूठ... डोनाल्ड ट्रंप गजब हैं! दूसरे देश की तस्वीरें दिखाकर घेर लिया दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति को

डोेनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को अश्वेतों के कथित नरसंहार के लिए घेरा था. उन्होंने रामफोसा को घेरने के लिए जिस तस्वीर और वीडियो का इस्तेमाल किया, वो किसी और देश की निकली हैं.

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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को ट्रंप ने गलत तस्वीर दिखाकर घेरा (Photo- Reuters) दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को ट्रंप ने गलत तस्वीर दिखाकर घेरा (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मई 2025,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से सामने जिस तरीके से दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को घेरा, उसे पूरी दुनिया ने देखा. ट्रंप ने एक वीडियो का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए रामफोसा पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों का नरसंहार हो रहा है. ट्रंप ने जिस वीडियो की तस्वीरें दिखाकर रामफोसा को घेरने की कोशिश की, वो दक्षिण अफ्रीका की नहीं बल्कि कांगो गणराज्य की थीं. ट्रंप ने तस्वीरों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जिसकी सच्चाई अब सामने आ चुकी है.

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ट्रंप ने जिस वीडियो के स्क्रीनशॉट दिखा रामफोसा को घेरने की कोशिश की, वो समाचार एजेंसी रॉयटर्स के वीडियो का स्क्रीनशॉट है. अब रॉयटर्स ने खुद ट्रंप के झूठ का खुलासा किया है.

दरअसल, रामफोसा के साथ व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बैठक के दौरान ट्रंप ने एक आर्टिकल का प्रिंट आउट दिखाते हुए कहा था, 'ये सभी श्वेत किसान हैं जिन्हें दफनाया जा रहा है.'

आखिर क्या है वीडियो की सच्चाई?

रॉयटर्स ने बताया कि जिस वीडियो से स्क्रीनशॉट लिए गए हैं, वो 3 फरवरी को प्रकाशित हुआ था. हालिया विवाद के बाद एजेंसी की फैक्ट चेक टीम ने इसकी जांच की और बताया कि वीडियो में कांगो के गोमा शहर में मानवाधिकार कार्यकर्ता शवों के बैग उठाते हुए दिखाई दे रहे हैं. शव उन लोगों के हैं जो रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों के साथ लड़ाई में मारे गए थे.

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ओवल ऑफिस बैठक में ट्रंप ने रामाफोसा को एक दक्षिण अफ्रीका में श्वेतों के कथित नरसंहार को बताते हुए एक ब्लॉग पोस्ट भी दिखाया जिसमें दक्षिण अफ्रीका और कांगो में संघर्ष और नस्लीय तनाव की बात कही गई थी.

ब्लॉग पोस्ट को अमेरिका की एक रूढ़िवादी ऑनलाइन पत्रिका, अमेरिकन थिंकर ने प्रकाशित किया था. ब्लॉग पोस्ट में श्वेतों के कथित नरसंहार को लेकर एक तस्वीर शामिल है जिसे कोई कैप्शन नहीं दिया गया था. तस्वीर के नीचे बस "यूट्यूब स्क्रीन ग्रैब" लिखा गया था. इसी के साथ कांगो के रॉयटर्स वीडियो का लिंक भी शामिल था.

व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं, अमेरिकन थिंकर की प्रबंध संपादक और संबंधित पोस्ट की लेखक एंड्रिया विडबर्ग ने रॉयटर्स के सवाल के जवाब में लिखा कि ट्रंप ने 'तस्वीर की गलत पहचान की है.'

अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को ठीक करने ट्रंप से मिलने गए थे रामफोसा

अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के संबंध हाल के दिनों में बेहद खराब हुए हैं. ट्रंप दक्षिण अफ्रीका के भूमि कानूनों, विदेश नीति और श्वेत अल्पसंख्यकों के साथ कथित बुरे व्यवहार को लेकर रामफोसा सरकार की लगातार आलोचना करते रहे हैं.

संबंधों में आई खटास को दूर करने के मकसद से ही रामफोसा अमेरिका पहुंचे थे. जब ट्रंप ने रामफोसा पर श्वेत किसानों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए तो उन्होंने बेहद ही शालीनता से इससे इनकार कर दिया. लेकिन ट्रंप ने रामफोसा को लेखों के स्क्रीनशॉट दिखाते हुए कई बार Death, Death शब्द का इस्तेमाल किया जिससे माहौल बेहद तनापूर्ण हो गया.

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ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए सिरिल रामफोसा ने कहा कि अफ्रीका में हिंसा बढ़ी है और देश की सभी जातियां, वर्ग इससे जूझ रहे हैं. हिंसा में केवल श्वेत ही नहीं बल्कि अश्वेत  भी मारे जा रहे हैं. श्वेतों से ज्यादा अश्वेत लोगों की हत्याएं हुई हैं.

रामफोसा ने वीडियो की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हम पता लगाएंगे कि वीडियो कहां का है. उन्होंने कहा, 'हमारे देश में अपराध है और इससे सभी प्रभावित हैं चाहे श्वेत हो या अश्वेत. मेरी अमेरिकी यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करना था, जो 1994 में रंगभेद युग के बाद से निचले स्तर पर है.'

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