साइबर हमले का डर! अमेरिका ने घोषित किया नेशनल इमरजेंसी

ट्रंप के इस आदेश का जिक्र करते हुए फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन के चेयरमैन अजित पाई ने कहा इस इमरजेंसी से अमेरिकी सूचना और संचार तंत्र को मजबूती मिलेगी. कुछ विदेशी कंपनियों की ओर से मिली धमकी के बाद अमेरिका का यह महत्वपूर्ण कदम है, और अमेरिका के नेटवर्क की सुरक्षा करेगा.

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अमेरिका में आपातकाल घोषित (फाइल फोटो- डोनाल्ड ट्रंप) अमेरिका में आपातकाल घोषित (फाइल फोटो- डोनाल्ड ट्रंप)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2019,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में साइबर हमले की आशंका को देखते हुए अमेरिकी कंप्यूटर्स को बचाने के लिए नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दिया है. ट्रंप ने इमरजेंसी लगाने के पीछे तर्क दिया है कि विदेशी ताकतें अमेरिका के कम्यूनिकेशन सिस्टम को हैक करना चाहती हैं.

अमेरिका ने किसी देश या कंपनी का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया है. ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप के इस कदम के पीछे चीन की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी हुआवेई का हाथ हो सकता है. हुआवेई टेलीकॉम कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्क सप्लाई करने वाली कंपनी है. हुआवेई कंपनी पर सवाल उठाए जाते हैं कि इस कंपनी को चीन की सेना और सुरक्षा एजेंसियां चलाती हैं.

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ट्रंप के इस आदेश का जिक्र करते हुए फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन के चेयरमैन अजित पाई ने कहा कि इस इमरजेंसी से अमेरिकी सूचना और संचार तंत्र को मजबूती मिलेगी. कुछ विदेशी कंपनियों की ओर से मिली धमकी के बाद अमेरिका का यह महत्वपूर्ण कदम, अमेरिका के नेटवर्क की सुरक्षा करेगा.

ट्रंप प्रशासन लगातार कोशिश करता रहा है कि हुआवेई कंपनी के इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल अमेरिका के मित्र देश न करें. काफी हद तक अमेरिका को इस संबंध में सफलता भी मिली है. इससे पहले ट्रंप ने एक बिल पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें चीन के हुआवेई और ZTE कॉर्प के उपकरणों के इस्तेमाल को बैन किया जाए.

अमेरिका और चीन के मध्य जारी ट्रेड वार किसी से छिपा नहीं है. हुआवेई कंपनी यूरोप में विस्तार के लिए प्रयासरत है. ऐसे में अमेरिका की चिंता है कि कहीं यह कंपनी नाटो के सदस्य देशों की प्राइवेट और व्यापारिक जानकारियों का लाभ न उठाने लगे.

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इससे पहले अमेरिका के ही जस्टिस डिपार्टमेंट ने चीन की दिग्गज टेलिकॉम कंपनी हुआवेई पर बड़ा आरोप लगाया था. अमेरिका का आरोप था कि हुआवेई ने अमेरिकी कंपनी टी मोबाइल की तकनीक चोरी की है. इसके अलावा बैंकिंग गड़बड़ी, न्याय में रुकावट डालने जैसे भी आरोप अमेरिका की ओर से लगाए गए. इस मामले में अमेरिका ने कंपनी, शीर्ष अधिकारी पर कुल 23 मामले दर्ज किए.

हुआवेई कंपनी की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर मेंग वानझू को कनाडा में इसी आरोप के चलते गिरफ्तार किया गया था. अब अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है कि मेंग वानझू को अमेरिका में प्रत्यर्पित किया जाए.

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