बांग्लादेश में सोमवार को भीषण हिंसा के बाद तख्तापलट हुआ. प्रदर्शनकारियों के उग्र होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और देश छोड़ दिया. आर्मी चीफ ने लोगों से शांति की अपील की है और ऐलान किया है कि सेना एक अंतरिम सरकार बनाएगा. इस बीच बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के नेता तारिक रहमान ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बधाई दी है.
तारिक रहमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'शेख हसीना का इस्तीफा लोगों की ताकत का सबूत है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण होगा, जो दिखाता है कि कैसे लोगों का साहस अत्याचारों पर काबू पा सकता है. समाज के सभी वर्गों के छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बधाई. इस ऐतिहासिक दिन पर अपने साथियों के प्रति न्याय और प्रेम की उनकी निस्वार्थ भावना प्रबल हुई है. आइए, मिलकर बांग्लादेश का एक लोकतांत्रिक और विकसित राष्ट्र के रूप में पुनर्निर्माण करें, जहां सभी लोगों के अधिकार और स्वतंत्रता सुरक्षित हों.'
कौन हैं तारिक रहमान?
कुछ महीने पहले बांग्लादेश में भारत के खिलाफ चलाए गए 'इंडिया आउट कैंपेन' में तारिख रहमान का नाम आया था. रिपोर्ट्स का दावा था कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी नेता खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ही इस कैंपेन का नेतृत्व कर रहे हैं.
तारिक रहमान को आतंकवाद फैलाने का दोषी पाए जाने पर साल 2018 में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. 21 अगस्त 2004 को अवामी लीग की रैली में आतंकी हमले में वो दोषी पाए गए थे. लंदन में रह रहे तारिक रहमान पर आरोप है कि वो पार्टी में भारत विरोधी भावना भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. तारिक रहमान के नेतृत्व में ही बीएनपी ने सोशल मीडिया के जरिए इंडिया आउट कैंपेन को शुरू किया था.
पीएम हाउस में घुसे प्रदर्शनकारी
बांग्लादेश में हजारों प्रदर्शनकारी सोमवार को राजधानी ढाका में शेख हसीना के आधिकारिक आवास में घुस गए और तोड़फोड़ की. प्रदर्शनकारियों ने उनके पिता मुजीबुर्रहमान की मूर्ति को हथौड़ों से तोड़ दिया और उनकी पार्टी के कार्यालयों में आग लगा दी. 76 वर्षीय हसीना ने अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दे दिया है.
बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में लड़ने वाले दिग्गजों के परिवारों के लिए 30% सरकारी नौकरियों को आरक्षित करने वाली कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग के साथ पिछले महीने शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, बाद में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गया. सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान की ओर से शेख हसीना के इस्तीफे की घोषणा के बाद अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए देश भर में उत्साही भीड़ सड़कों पर उतर आई.
शेख मुजीब की मूर्ति पर चलाया हथौड़ा
शेख हसीना के इस्तीफे से उनकी 15 साल की सत्ता समाप्त हो गई. हजारों प्रदर्शनकारियों ने सैन्य कर्फ्यू का उल्लंघन किया और उनके आधिकारिक आवास पर धावा बोल दिया. सोशल मीडिया पर वीडियो में प्रदर्शनकारियों को ढाका में 1971 के मुक्ति संग्राम के नायक और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्ति पर चढ़कर हथौड़ों से उसे तोड़ते हुए देखा जा सकता है.
धानमंडी और ढाका में अवामी लीग के कार्यालय को आंदोलनकारियों ने आग के हवाले कर दिया और सरकार विरोधी नारे लगाए. उन्होंने राजधानी में गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल के आवास पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की. सरकार ने सोमवार सुबह पूरी तरह से इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने लोगों से 'ढाका तक लॉन्ग मार्च' में शामिल होने के लिए कहा था. प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों के बीच झड़प के चलते इस मार्च ने भीषण हिंसा का रूप ले लिया.
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