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विश्व

जापान में 60 सेकंड लेट हुई ट्रेन तो देना पड़ता है जवाब

aajtak.in
  • 14 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:47 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ मिलकर भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया है.  भारत की पहली बुलेट ट्रेन को तैयार करने में जापान की तरफ से टेक्नोलॉजी व वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है.

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भारत की पहली बुलेट ट्रेन मैनेज करने के गुर भी जापान भारत को सिखाएगा. इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि भारत में आने वाले बुलेट ट्रेन का जापान में मैनेजमेंट कैसे होता है. 

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हमेशा टाइम पर :
जापान में बुलेट ट्रेन को शिंकासेन के नाम से जाना जाता है. यहां सबसे पहली बुलेट ट्रेन 1964 में शुरू हुई थी.  तब से लेकर अब तक इसका रिकॉर्ड है कि यह कभी भी लेट नहीं हुई है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर किसी दिन ट्रेन एक मिनट से ज्यादा लेट हुई, तो ड्राइवर को लेट होने पर जवाब देना पड़ता है. यह आजतक औसतन सिर्फ 60 सेकंड ही लेट हुई है.

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सबसे सुरक्षित :
जापान में हर 3 मिनट के अंतराल पर एक बुलेट ट्रेन चलती है. सबसे तेज होन के बाद भी आज तक इनकी वजह से कोई दुर्घटना नहीं हुई  है. इन ट्रेनों पर एक एडवांस सेफ्टी सिस्टम लगा हुआ है. इसमें आधुनिक सेंसर लगे हुए हैं, जो भूकंप व प्राकृतिक आपदा का पहले ही पता लगाने में सक्षम हैं और ऐसी आशंका होने पर ट्रेन को ये खुद ही रोक लेते हैं.

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सिर्फ 7 मिनट में होती है सफाई  :
बुलेट ट्रेन की सफाई महज 7 मिनट में पूरी कर दी जाती है. इस प्रक्रिया को  'सेवन मिनट मिरकल (7 मिनट का जादू) नाम दिया गया है. जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुचंती है. सफाईकर्मी यात्र‍ियों के उतरने का इंतजार करते हैं और उनके उतरने के तुरंत बाद अंदर घुस जाते हैं और महज 7 मिनट के भीतर ट्रेन का हर कोना साफ कर देते हैं.

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यात्री सबसे पहले :
जापान की बुलेट ट्रेन के ड्राइवर से लेकर सफाईकर्मी तक, सबके लिए यात्री सबसे पहले हैं. यहां यात्रियों को सम्मान के साथ ट्रेन में बिठाया जाता है. इसके अलावा जब वे उतरते हैं, तो उनका धन्यवाद भी किया जाता है. यही नहीं, सिर्फ 7 मिनट में सफाई करने वाले सफाईकर्मी भी यात्र‍ियों  के उतरते वक्त उन्हें धन्यवाद करते हैं.

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वैश्व‍िक स्तर पर पहचान :
जापान की शिंकासेन दुनियाभर में फेमस है. ब्रिटेन, चीन और ताइवान में बुलेट ट्रेन ने रफ्तार भरनी शुरू कर दी है. अब भारत और अमेरिका समेत थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया व अन्य देशों में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.

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प्राइवेट सेक्टर चलाता है रेलवे :
जापान रेलवेज ग्रुप. यह 6 कंपनियों का एक समूह है,  जो यहां का रेल मैनेजमेंट चलाते हैं.  इन कंपनियों ने 1987 में जापान की राष्ट्रीय रेलवे को अपने हाथ में लिया था. तब से जेआर ग्रुप ही यहां का रेलवे मैनेजमेंट देखता है.

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