यूपी एसएटीएफ ने सेना में फर्जी भर्ती रैकेट चलाने और नियुक्ति पत्र जारी करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सेना का जवान है. उसका कोर्ट मार्शल भी हुआ था. आरोप है कि ये दोनों मेडिकल एग्जाम पास कराने के लिए भी पैसे लेते थे.
एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार को लखनऊ के बिजनौर इलाके से भगोड़े सैनिक पवन राज और एक रक्षा अकादमी के प्रबंधक सतीश यादव को गिरफ्तार कर लिया है. उन्होंने बताया कि उनके पास से कई फर्जी शपथ पत्र और आधार कार्ड बरामद किए गए.
सूत्रों ने कहा कि बिजनौर में मिशन डिफेंस अकादमी चलाने वाले सतीश यादव ने भारतीय सेना के उम्मीदवारों से उनकी मेडिकल परीक्षा पास कराने और उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दिलाने के बदले में पैसे लिए. डिफेंस अकादमी चलाने वाला शख्स पूर्व सैन्यकर्मी पवन राज के साथ मिलकर रैकेट चलाता था.
2017 में शुरू किया दो नंबर का काम
पूछताछ के दौरान पवन राज ने एसटीएफ को बताया कि 2017 में आर्मी मेडिकल कोर, लखनऊ में तैनाती के दौरान उसकी मुलाकात सेना के दो जवानों बाला और सूर्यवंशी से हुई थी. एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि वह उनके गिरोह में शामिल हो गया और सैकड़ों अभ्यर्थियों को उनकी मेडिकल परीक्षाओं में सफलता दिलाने में मदद करके करोड़ों रुपये प्राप्त किए.
हर अभ्यर्थी से लेते थे 4-5 लाख रुपये
उन्होंने बताया कि सूर्यवंशी और बाला को कोर्ट मार्शल के बाद पकड़ लिया गया और जेल भेज दिया गया, लेकिन पवन राज दोषसिद्धि से बचने में कामयाब रहा. एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि पवन राज डिफेंस एकेडमी के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क करता था और प्रत्येक अभ्यर्थी से 4-5 लाख रुपये लेता था.
क्या होता है कोर्ट मार्शल?
जब सेना का कोई जवान या अधिकारी नियमों को तोड़ता है, देशविरोधी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो ऐसे में उसके साथ कोर्ट मार्शल किया जाता है. कोर्ट मार्शल एक तरह की कोर्ट होती है. यह खास तौर पर आर्मी में सेवा देने वाले जवानों और अधिकारियों के लिए होती है. इसमें आर्मी में अनुशासन तोड़ने या अन्य अपराध करने वाले सेना के व्यक्ति पर केस चलाया जाता है. केस की सुनवाई और सजा दिलाने का काम आर्मी का ही होता है. कोर्ट मार्शल मिलिट्री कानून के तहत ही होता है.
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