यूपी के संभल में मूसलाधार बारिश के कारण जिले की ऐतिहासिक धरोहर जमींदोज हो गई. दरअसल, बारिश के चलते शहर के मुख्य बाजार स्थित 'चक्की का पाट' और 'प्राचीन किले की दीवार' अचानक भरभराकर गिर गई. गिरते ही चक्की का पाट टूट गया, वहीं किले की दीवार से निकला मलबा सड़क पर फैल गया.
बताया जाता है कि 'चक्की का पाट' पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल (1177 से 1192) का है. यह पुरातत्व विभाग की निगरानी में था. इसके और किले की दीवार गिरने की खबर मिलते ही आधी रात बारिश में ही एसडीएम, नगरपालिका प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची. प्रशासन ने टूटकर गिरे 'चक्की के पाट' को अपने कब्जे में ले लिया, साथ ही सड़क से 'किले की दीवार' का मलबा साफ करवाया.
मालूम हो कि संभल जिले में बुधवार दोपहर से लगातार बारिश हो रही थी. जिसके चलते रात को सदर कोतवाली इलाके के मुख्य बाजार में डाकखाना रोड पर स्थित ऐतिहासिक धरोहर 'चक्की का पाट' और 'प्राचीन किले की दीवार' भरभराकर गिर पड़ी. जहां किले की दीवार का मलबा सड़क पर फैल गया, वहीं चक्की के पाट के दो खंड हो गए.
मान्यता है कि संभल के इस ऐतिहासिक 'चक्की का पाट को 'सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में उनके योद्धा आल्हा-ऊदल ने अपनी वीरता का परिचय देने के लिए किले की दीवार पर एक ही छलांग में टांग दिया था. तभी से कई किलो वजनी ये 'चक्की का पाट' प्राचीन किले की दीवार पर टंगा हुआ था. दूर-दूर से लोग इसको देखने के लिए आते हैं.
उधर, घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मूसलाधार बारिश के दौरान ही मौके पर जमा हो गए. एसडीएम विनय मिश्रा, नगरपालिका के ईओ और कोतवाली पुलिस को लेकर घटनास्थल पहुंच गए. एसडीएम ने लोगों से हादसे की जानकारी ली. फिर, पुलिस-प्रशासन की टीम ने किले की दीवार के मलबे मे दबे 'चक्की के पाट' को बाहर निकला. हालांकि, तब तक 'चक्की का पाट' एक किनारे से क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसके बाद प्रशासन ने चक्की के पाट को कब्जे में ले लिया.
फिलहाल, डीएम डॉ राजेंद्र पौंसिया ने इस ऐतिहासिक 'चक्की के पाट' को दुरुस्त कर दोबारा इसे पुराने स्वरूप में स्थापित कराने के निर्देश दिए हैं. वहीं, एसडीएम विनय मिश्रा ने बताया कि मलबे की वजह से रास्ता बाधित था, इसलिए सबसे पहले मलबे को हटवाया गया. अब हमारी कोशिश है कि 'चक्की के पाट' के बचे हुए हिस्से को संरक्षित किया जाए. दोबारा इसको पुराना रूप देने का प्रयास किया जाएगा.
अभिनव माथुर